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जंगल की जमीन पर कब्जे में कटघरे में राजस्व विभाग
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 28 Aug 2016 01:37 AM IST
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- फोटो : Bureau
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बिहारीपुर में वन विभाग के जंगल पर कब्जे के मामले में राजस्व विभाग कटघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। हुआ यूं कि जिस सरकारी भूमि में करीब साढ़े तीन सौ भी अधिक बीघा जमीन पर राजस्व विभाग ने वर्ष 2010 में लोगों के पट्टे दिए थे।
उसी जमीन को चुपचाप तरीके से गड़बड़झाला कर वर्ष 2011 में वन विभाग के नाम पर दर्शाया गया। अमर उजाला ने जब जंगल पर अवैध कब्जे को उजागर किया तो वन अफसर हरकत में आए। वन व राजस्व अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव बिहारीपुर के जंगल में करीब छह हजार बीघा वन विभाग का जंगल है। इसमें से करीब 1350 बीघा जंगल पर माफिया का कब्जा है। उधर, गांव जेबड़ा ऐतमाली में करीब चार हजार बीघा वन विभाग के जंगल में अब मौके पर महज सौ बीघा ही जंगल बचा है। इसमें से करीब तीन सौ बीघा भूमि पर दबंगों ने फसलें उगा रखीं हैं और बाकी भूमि को अफसर गंगा में कटी बता रहे हैं।
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जंगल पर अवैध कब्जे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया तो, वन अफसरों की नींद उड़ गई। कई बार अफसरों द्वारा सर्वे कराकर वन विभाग की जमीन को चिह्नित करने का आश्वासन दिए जाने के बाद जब बुधवार को सर्वे टीम बिहारीपुर के जंगल में सर्वे करने पहुंची, और करीब साढ़े चार सौ बीघा जंगल पर निशान लगा वन विभाग की भूमि पर कब्जा होने की पुष्टि हुई, तो माफिया के इशारे पर दबंग मौके पर जा पहुंचे और सर्वे को गलत ठहराते हुुए हंगामा कर दिया।
राजस्व लेखपाल की मौजूदगी में सर्वे कराए जाने की बात कहकर सर्वे रुकवा दिया था। उधर, अफसरों पर माफिया के फोन खटकने शुरू हुए तो टीम को बैकफुट पर आना पड़ा था। अब तक करीब 34 लोग वर्ष 2010 में जंगल की जमीन पर पट्टे होने की बात कहते हुए कागजात दिखा चुके हैं। जबकि यह भूमि राजस्व विभाग द्वारा वर्ष 2011 में वन विभाग को दी गई थी।
मतलब साफ है कि इस खेल में राजस्व विभाग ही चाल चलता दिखाई दे रहा है। अफसरों के मुताबिक वर्ष 2010 में ग्रामीणों को पट्टे केवल पेड़ लगाने के लिए दिए गए थे। लेकिन पेड़ लगाने की बजाए, भूमि पर फसलें उगाईं गईं। इस मामले में राजस्व विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
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उसी जमीन को चुपचाप तरीके से गड़बड़झाला कर वर्ष 2011 में वन विभाग के नाम पर दर्शाया गया। अमर उजाला ने जब जंगल पर अवैध कब्जे को उजागर किया तो वन अफसर हरकत में आए। वन व राजस्व अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
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हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव बिहारीपुर के जंगल में करीब छह हजार बीघा वन विभाग का जंगल है। इसमें से करीब 1350 बीघा जंगल पर माफिया का कब्जा है। उधर, गांव जेबड़ा ऐतमाली में करीब चार हजार बीघा वन विभाग के जंगल में अब मौके पर महज सौ बीघा ही जंगल बचा है। इसमें से करीब तीन सौ बीघा भूमि पर दबंगों ने फसलें उगा रखीं हैं और बाकी भूमि को अफसर गंगा में कटी बता रहे हैं।
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जंगल पर अवैध कब्जे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया तो, वन अफसरों की नींद उड़ गई। कई बार अफसरों द्वारा सर्वे कराकर वन विभाग की जमीन को चिह्नित करने का आश्वासन दिए जाने के बाद जब बुधवार को सर्वे टीम बिहारीपुर के जंगल में सर्वे करने पहुंची, और करीब साढ़े चार सौ बीघा जंगल पर निशान लगा वन विभाग की भूमि पर कब्जा होने की पुष्टि हुई, तो माफिया के इशारे पर दबंग मौके पर जा पहुंचे और सर्वे को गलत ठहराते हुुए हंगामा कर दिया।
राजस्व लेखपाल की मौजूदगी में सर्वे कराए जाने की बात कहकर सर्वे रुकवा दिया था। उधर, अफसरों पर माफिया के फोन खटकने शुरू हुए तो टीम को बैकफुट पर आना पड़ा था। अब तक करीब 34 लोग वर्ष 2010 में जंगल की जमीन पर पट्टे होने की बात कहते हुए कागजात दिखा चुके हैं। जबकि यह भूमि राजस्व विभाग द्वारा वर्ष 2011 में वन विभाग को दी गई थी।
मतलब साफ है कि इस खेल में राजस्व विभाग ही चाल चलता दिखाई दे रहा है। अफसरों के मुताबिक वर्ष 2010 में ग्रामीणों को पट्टे केवल पेड़ लगाने के लिए दिए गए थे। लेकिन पेड़ लगाने की बजाए, भूमि पर फसलें उगाईं गईं। इस मामले में राजस्व विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।