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मुसलमानों को नजरअंदाज करना गलत, संविधान की भावना के खिलाफ
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अमरोहा। मुफ्ती सैयद अफ्फान मंसूरपुरी ने कहा कि देश में सभी मजहब के लोग एक साथ मिल कर रह रहे हैं। नागरिकता संशोधन बिल काला कानून है। जो एक मजहब के लोगों को अलग करता है। पूर्वजों ने देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी है। धर्म के आधार पर किसी को वरीयता देना संविधान के खिलाफ है। ऐसे कानून का आखिरी दम तक विरोध करेंगे।
वह जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद ग्राउंड में आयोजित जलसे को संबोधित कर रहे थे। कहा कि देश में सभी मजहब के लोगों को धर्म के अनुसार काम करने की आजादी है। हजारों उलमा ने देश की आजादी के लिए जान कुर्बान कर दी है। नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। यह संविधान के मूल प्रावधान को नष्ट करने वाला है। मुसलमान को नजरअंदाज करना बिल्कुल गलत है। यह बिल सभी अमन पसंद लोगों के खिलाफ है। राष्ट्रपति को संबोधित पत्रक एसडीएम सदर सुखवीर सिंह को दिया। विरोध सभा को सैयद जाकिर, मुफ्ती हम्जा, कारी मोहम्मद यामीन, डॉ. सिराजुद्दीन हाशमी, मौलाना दिलदार हुसैन के अलावा अन्य लोग मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीओ सिटी अजय कुमार, तहसीलदार शमीम अहमद, नायब तहसीलदार कृष्ण चौरसिया दल बल के साथ मुस्तैद रहे।
प्रतिरोध मार्च की अनुमति देने से इनकार
अमरोहा। जमीअत उलमा-ए-हिंद ने दोपहर दो बजे से शहर में प्रतिरोध मार्च निकालने की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके चलते जामा मस्जिद के ग्राउंड में विरोध सभा।
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सड़कों पर पानी, कैसे निकलता प्रतिरोध मार्च
अमरोहा। बारिश से शहर की सड़कों पर जलजमाव हो गया था। इसके चलते अनुमति मिलने पर भी प्रतिरोध मार्च निकालना मुश्किल हो जाता, क्योंकि जिस रास्ते से जुलूस प्रस्तावित था वह सभी शहर के लो ग्राउंड वाले इलाके हैं।
नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में ज्ञापन सौंपा
उझारी। जमीयत उलमा-ए-हिंद के आह्वान पर तहसील हसनपुर के नायब सदर मौलाना ग्यासुद्दीन के नेतृत्व में टीपू चौक स्थित बनवाली मस्जिद पर जुमे की नमाज के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम हसनपुर विजय शंकर को सौंपा गया। वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक धार्मिक आधार पर भेदभाव पैदा करता है, इसलिए संविधान की मूल भावनाओं के विपरीत है। इस विधेयक में बर्मा, श्रीलंका और नेपाल के पीड़ित नागरिकों को भी शामिल करने की मांग की गई। इस दौरान कारी राशिद, शोएब चौधरी, शमीम अय्यूब, मुफ्ती तंजील अहमद, मुफ्ती आरिफ कासमी, मुफ्ती साजिद, कारी अरशद, कारी मिनहाज आदि मौजूद रहे।
मजहब के नाम पर बनने वाला कानून मंजूर नहीं
नौगांवा सादात। नौगांवा सादात में जामा मस्जिद के पास शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद जलसे का आयोजन किया गया। इसकी कयादत हजरत मुफ्ती अब्दुल रहमान ने की। कहा कि यह मुल्क हमारा है। हिंदू मुस्लिम गंगा जमुना तहजीब की मिसाल है। कोई भी कानून अगर मजहब के नाम पर बनता है तो हम उसे नामंजूर करते हैं। उसे रिजेक्ट करते हैं। इससे पहले भी मजहब के नाम पर मुल्क को अलग किया गया। बाद में एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान हाफिज मोहम्मद फरमान, हाजी नसरुद्दीन, हाजी इब्ने हसन, मोहम्मद ताहिर, मौलाना मोहम्मद इब्राहिम, मुफ्ती मोहम्मद अखलाक, सन्नवार अंसारी, नवाब अंसारी आदि मौजूद रहे।
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वह जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद ग्राउंड में आयोजित जलसे को संबोधित कर रहे थे। कहा कि देश में सभी मजहब के लोगों को धर्म के अनुसार काम करने की आजादी है। हजारों उलमा ने देश की आजादी के लिए जान कुर्बान कर दी है। नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। यह संविधान के मूल प्रावधान को नष्ट करने वाला है। मुसलमान को नजरअंदाज करना बिल्कुल गलत है। यह बिल सभी अमन पसंद लोगों के खिलाफ है। राष्ट्रपति को संबोधित पत्रक एसडीएम सदर सुखवीर सिंह को दिया। विरोध सभा को सैयद जाकिर, मुफ्ती हम्जा, कारी मोहम्मद यामीन, डॉ. सिराजुद्दीन हाशमी, मौलाना दिलदार हुसैन के अलावा अन्य लोग मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीओ सिटी अजय कुमार, तहसीलदार शमीम अहमद, नायब तहसीलदार कृष्ण चौरसिया दल बल के साथ मुस्तैद रहे।
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प्रतिरोध मार्च की अनुमति देने से इनकार
अमरोहा। जमीअत उलमा-ए-हिंद ने दोपहर दो बजे से शहर में प्रतिरोध मार्च निकालने की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके चलते जामा मस्जिद के ग्राउंड में विरोध सभा।
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सड़कों पर पानी, कैसे निकलता प्रतिरोध मार्च
अमरोहा। बारिश से शहर की सड़कों पर जलजमाव हो गया था। इसके चलते अनुमति मिलने पर भी प्रतिरोध मार्च निकालना मुश्किल हो जाता, क्योंकि जिस रास्ते से जुलूस प्रस्तावित था वह सभी शहर के लो ग्राउंड वाले इलाके हैं।
नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में ज्ञापन सौंपा
उझारी। जमीयत उलमा-ए-हिंद के आह्वान पर तहसील हसनपुर के नायब सदर मौलाना ग्यासुद्दीन के नेतृत्व में टीपू चौक स्थित बनवाली मस्जिद पर जुमे की नमाज के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम हसनपुर विजय शंकर को सौंपा गया। वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक धार्मिक आधार पर भेदभाव पैदा करता है, इसलिए संविधान की मूल भावनाओं के विपरीत है। इस विधेयक में बर्मा, श्रीलंका और नेपाल के पीड़ित नागरिकों को भी शामिल करने की मांग की गई। इस दौरान कारी राशिद, शोएब चौधरी, शमीम अय्यूब, मुफ्ती तंजील अहमद, मुफ्ती आरिफ कासमी, मुफ्ती साजिद, कारी अरशद, कारी मिनहाज आदि मौजूद रहे।
मजहब के नाम पर बनने वाला कानून मंजूर नहीं
नौगांवा सादात। नौगांवा सादात में जामा मस्जिद के पास शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद जलसे का आयोजन किया गया। इसकी कयादत हजरत मुफ्ती अब्दुल रहमान ने की। कहा कि यह मुल्क हमारा है। हिंदू मुस्लिम गंगा जमुना तहजीब की मिसाल है। कोई भी कानून अगर मजहब के नाम पर बनता है तो हम उसे नामंजूर करते हैं। उसे रिजेक्ट करते हैं। इससे पहले भी मजहब के नाम पर मुल्क को अलग किया गया। बाद में एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान हाफिज मोहम्मद फरमान, हाजी नसरुद्दीन, हाजी इब्ने हसन, मोहम्मद ताहिर, मौलाना मोहम्मद इब्राहिम, मुफ्ती मोहम्मद अखलाक, सन्नवार अंसारी, नवाब अंसारी आदि मौजूद रहे।