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पालिकाध्यक्ष के अधिकार सीज करने पर रोक

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 01 Oct 2022 01:21 AM IST
सार

पहले उसके जवाब का इंतजार करना चाहिए।हसनपुर निवासी नीलम शादाब खान ने वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में बसपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में हसनपुर नगर पालिका से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। नीलम शादाब खान को सामान्य जाति का होने का दावा करते हुए उनके द्वारा दाखिल किए गए पिछड़ी जाति के प्रमाण पत्र को फर्जी बताया था। उच्च न्यायालय ने स्वीकार किया कि बिना याची को सुने उसके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने की कार्यवाही निरस्त की जाती है।

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Prohibition on seizing the powers of the head of the municipality

विस्तार

हसनपुर नगर पालिका की अध्यक्ष नीलम शादाब खान द्वारा निर्वाचन के दौरान जाति प्रमाण पत्र फर्जी लगाने के मामले में जिलाधिकारी ने वित्तीय अधिकार सीज कर दिए थे। मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए वित्तीय अधिकार सीज करने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट का कहना है कि बिना नोटिस जारी किए वित्तीय अधिकारों को सीज किया जाना उचित नहीं है, जो नोटिस जारी किया गया है। पहले उसके जवाब का इंतजार करना चाहिए।
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हसनपुर निवासी नीलम शादाब खान ने वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में बसपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में हसनपुर नगर पालिका से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। चुनाव जीतकर वह पालिका अध्यक्ष चुनी गईं थी। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष अतुल कुमार गर्ग के नेतृत्व में अन्य भाजपाइयों ने चार दिसंबर 2017 को कलक्ट्रेट पहुंचकर उनके खिलाफ मोर्चा खोला था। नीलम शादाब खान को सामान्य जाति का होने का दावा करते हुए उनके द्वारा दाखिल किए गए पिछड़ी जाति के प्रमाण पत्र को फर्जी बताया था। पिछले पांच साल से अलग-अलग टीम द्वारा जांच की चुकी है। 27 सितंबर को जिला अधिकारी बीके त्रिपाठी ने राज्यपाल के निर्देश मिलने के बाद हसनपुर पालिकाध्यक्ष नीलम शादाब खान के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों को सीज कर दिया था। नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। जिसमें सात दिन के भीतर जवाब नहीं देने पर उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। अधिकार सीज होने के आदेश के खिलाफ चेयरमैन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। जिस पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याची को कोई कारण बताओ नोटिस नहीं जारी किया गया और उसको बिना सुने ही वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए। उच्च न्यायालय ने स्वीकार किया कि बिना याची को सुने उसके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने की कार्यवाही निरस्त की जाती है। परंतु न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत के अंतर्गत नया आदेश पारित करने की छूट दी गयी है।
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हाईकोर्ट ने कोई आदेश किया है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। अगर न्यायालय ने कोई आदेश किया है तो उसका पालन किया जाएगा। -बीके त्रिपाठी, डीएम अमरोहा।
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