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पहले जुमे पर मस्जिदों में दुआओं को उठे हजारों हाथ
ब्यूरो अमर उजाला/अमरोहा/ मंडी धनौरा/ गजरौला/हसनपुर/कुआखेड़ा।
Updated Sat, 19 May 2018 01:49 AM IST
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अमरोहा जामा मस्जिद में पहले जुमे को नमाज अदा करते रोजेदार।
- फोटो : अमर उजाला
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माह-ए-रमजान का पहला जुमा भी गुजर गया। शुक्रवार को जुमे की फर्ज नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में हुजूम उमड़ा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने नमाज अदा की। रोजेदारों ने नमाज के बाद आपसी भाईचारे के साथ ही मुल्क में अमन चैन कायम रहने के लिए दुआ की, जिन पर सब ने आमीन कहा।
शुक्रवार को रमजान के पहले जुमे को लेकर रोजेदारों में खासा उत्साह देखने को मिला। रोजेदार सुबह से ही जुमे की तैयारी में जुट गई। दोपहर साढ़े बारह बजे जुमे की अजान शुरू हुई तो एक-एक कर शहर की तमाम छोटी-बड़ी मस्जिदों में भीड़ जुटनी शुरू हो गई। जामा मस्जिद के साथ मोहल्ला कुरैशी, नल, अहमदनगर, बसावनगंज, बटवाल, छेवड़ा, मुरादाबादी गेट, कटकुई आदि इलाकों की मस्जिदों में जुमे की फर्ज नमाज अदा की गई। इससे पहले उलेमा ने खुतबे के दौरान तकरीर की। उन्होंने रमजान की फजीलत बयान करते हुए लोगों को रोजा रखने की नसीहत भी की। कहा कि रोजा और नमाज दोनों फर्ज है। इस लिए दोनों की पाबंदी जरूरी है। नमाज के बाद दुआओं का सिलसिला शुरू हुआ तो लोगों ने कारोबार में बरकत, बीमारी से शिफा के साथ मुल्क में अमन चैन कायम रहने की दुआएं मांगी गई।
मंडी धनौरा क्ष्ाेत्र में मुकददस रमजान माह के पहले जुमे को नगर व ग्रामीण क्षेत्र की मस्जिदें नमाजियों से भर गई। कुआखेड़ा के मदरसा मिफ्ताउल उलूम के मोहतमिम कारी नाजिम ने अपनी तकरीर में रमजान की फजीलत बयान करते हुए कहा कि रमजान के महीने का पहला अशरा रहमत का होता है। अल्लाह ने मुसलमानों को रमजान का महीना अता करके जन्नत में जाने का रास्ता दिखा दिया है। यह महीना मोमिन के लिए अल्लाह की इबादत और रजा के लिए नेक अमल करने के लिए है। रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करने से उसके गुनाह माफ हो जाते हैं।
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उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे रमजान के महीने में खुदा की इबादत के साथ दीन व दुखियों की सेवा करें। ऐसा करने से अल्लाह खुश होगा और उसकी झोली खुशियों से भर जाएगी। इस मौके पर मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआ कराई गई। इकरार अहमद, यासीन, नईम अहमद, असलम, नाजिर आदि मौजूद थे। नगर की सभी मस्जिदों में भी रमजान के पहले जुमे को नमाजियों से मस्जिदें भरी रही।
गजरौला में भी रोजेदारों ने पहले जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की। जामा मस्जिद में मौलाना सदाकत ने नमाज अदा कराई गई। तराबी पढ़ने का भी दौर चला। महिलाओं ने घरों में नमाज अदा कर खुदा की इबादत की। मौलाना सदाकत ने बताया कि रमजान का महीना बरकत का महीना होता है। जिसमें रोजेदार अपने गुनाहों की माफी खुदा से मांगते हैं। कहा कि रमजान में खुदा गुनाहों की माफी दे देता है। शहर की सभी मस्जिदों में रोजेदारों ने नमाज अदा की। माना जाता है कि जुुमे का दिन अल्लाह के दरबार में रहम का दिन होता है। वहीं गांव देहात भी जुमे की नमाज अदा कर रोजेदारों ने अमन की दुआ मांगी।
हसनपुर में रमजान के पहले जुमे पर अजान से पहले ही लोग मस्जिदों में पहुंच गए और अजान होने के बाद जमात के साथ जुमे की फर्ज की नमाज अदा की। उलमा ने रमजान की फजीलत बयान की। कहा कि रमजान का महीना बड़ा ही बरकत और रहमतरों का महीना है। इस महीने में अल्लाह ताला रहमत के दरवाजे खोल देता है। दोजक के दरवाजे बंद कर देता है।
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शुक्रवार को रमजान के पहले जुमे को लेकर रोजेदारों में खासा उत्साह देखने को मिला। रोजेदार सुबह से ही जुमे की तैयारी में जुट गई। दोपहर साढ़े बारह बजे जुमे की अजान शुरू हुई तो एक-एक कर शहर की तमाम छोटी-बड़ी मस्जिदों में भीड़ जुटनी शुरू हो गई। जामा मस्जिद के साथ मोहल्ला कुरैशी, नल, अहमदनगर, बसावनगंज, बटवाल, छेवड़ा, मुरादाबादी गेट, कटकुई आदि इलाकों की मस्जिदों में जुमे की फर्ज नमाज अदा की गई। इससे पहले उलेमा ने खुतबे के दौरान तकरीर की। उन्होंने रमजान की फजीलत बयान करते हुए लोगों को रोजा रखने की नसीहत भी की। कहा कि रोजा और नमाज दोनों फर्ज है। इस लिए दोनों की पाबंदी जरूरी है। नमाज के बाद दुआओं का सिलसिला शुरू हुआ तो लोगों ने कारोबार में बरकत, बीमारी से शिफा के साथ मुल्क में अमन चैन कायम रहने की दुआएं मांगी गई।
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मंडी धनौरा क्ष्ाेत्र में मुकददस रमजान माह के पहले जुमे को नगर व ग्रामीण क्षेत्र की मस्जिदें नमाजियों से भर गई। कुआखेड़ा के मदरसा मिफ्ताउल उलूम के मोहतमिम कारी नाजिम ने अपनी तकरीर में रमजान की फजीलत बयान करते हुए कहा कि रमजान के महीने का पहला अशरा रहमत का होता है। अल्लाह ने मुसलमानों को रमजान का महीना अता करके जन्नत में जाने का रास्ता दिखा दिया है। यह महीना मोमिन के लिए अल्लाह की इबादत और रजा के लिए नेक अमल करने के लिए है। रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करने से उसके गुनाह माफ हो जाते हैं।
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उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे रमजान के महीने में खुदा की इबादत के साथ दीन व दुखियों की सेवा करें। ऐसा करने से अल्लाह खुश होगा और उसकी झोली खुशियों से भर जाएगी। इस मौके पर मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआ कराई गई। इकरार अहमद, यासीन, नईम अहमद, असलम, नाजिर आदि मौजूद थे। नगर की सभी मस्जिदों में भी रमजान के पहले जुमे को नमाजियों से मस्जिदें भरी रही।
गजरौला में भी रोजेदारों ने पहले जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की। जामा मस्जिद में मौलाना सदाकत ने नमाज अदा कराई गई। तराबी पढ़ने का भी दौर चला। महिलाओं ने घरों में नमाज अदा कर खुदा की इबादत की। मौलाना सदाकत ने बताया कि रमजान का महीना बरकत का महीना होता है। जिसमें रोजेदार अपने गुनाहों की माफी खुदा से मांगते हैं। कहा कि रमजान में खुदा गुनाहों की माफी दे देता है। शहर की सभी मस्जिदों में रोजेदारों ने नमाज अदा की। माना जाता है कि जुुमे का दिन अल्लाह के दरबार में रहम का दिन होता है। वहीं गांव देहात भी जुमे की नमाज अदा कर रोजेदारों ने अमन की दुआ मांगी।
हसनपुर में रमजान के पहले जुमे पर अजान से पहले ही लोग मस्जिदों में पहुंच गए और अजान होने के बाद जमात के साथ जुमे की फर्ज की नमाज अदा की। उलमा ने रमजान की फजीलत बयान की। कहा कि रमजान का महीना बड़ा ही बरकत और रहमतरों का महीना है। इस महीने में अल्लाह ताला रहमत के दरवाजे खोल देता है। दोजक के दरवाजे बंद कर देता है।