{"_id":"5f2f04fa8ebc3e3cc41bb0ca","slug":"police-gd-jpnagar-news-mbd3584995112","type":"story","status":"publish","title_hn":"आदमपुर प्रकरणः पुलिस की जीडी या झूठ का पुलिंदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आदमपुर प्रकरणः पुलिस की जीडी या झूठ का पुलिंदा
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अमरोहा। जिंदा मिली किशोरी को ऑनर किलिंग का शिकार बताने वाली आदमपुर पुलिस ने न सिर्फ किशोरी के पिता-भाई और रिश्तेदार को सात माह पहले जेल भेजने का कुचक्र रचा था, बल्कि अपनी बात को सच साबित करने के लिए जीडी की लिखापढ़त में भी कलमतोड़ ताकत लगाई थी। नतीजे में आदमपुर थाने की जीडी झूठ का पुलिंदा बन गई। लॉकडाउन में दिल्ली से किशोरी के प्रेमी के घर वापस आने पर पुलिसिया स्क्रिप्ट की धज्जियां उड़ गईं।
आदमपुर थानाक्षेत्र के मलकपुर गांव निवासी किसान की नाबालिग बेटी छह फरवरी 2019 को लापता हो गई थी। उसके भाई की तहरीर पर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की थी। दो लोगों गिरफ्तार कर जेल भेजा था लेकिन किशोरी बरामद नहीं हो पाई थी। पुलिस ने 28 दिसंबर 2019 को अपहरण की रिपोर्ट के उलट नई स्क्रिप्ट तैयार कर किशोरी के पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ही उसकी हत्या का आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। तब से वे जेल में बंद हैं।
एक इत्तेफाक से किशोरी शुक्रवार को सही सलामत मिल गई तो पुलिस की खतरनाक सोच और खुलासे में फर्जीवाड़े से परदा हट गया। पुलिस अभिलेखों को पलटने से स्पष्ट हुआ कि लिखापढ़त की हर लाइन में पुलिस ने मनमानी की। जीडी के मुताबिक किशोरी के सीने में दो गोलियां मारी गई थीं। शव बोरी में भरकर गंगा में फेंक दिया गया था। जीडी में हत्या में इस्तेमाल तमंचा किशोरी के पिता के घर में रखे संदूक से बरामद दर्शाया था। किशोरी के कपड़े गांव के भोपाल के खेत की झाड़ियों से मिलना बताया था। फिलहाल गुरुवार तक ये स्क्रिप्ट हर किसी को सही लग रही थी। लेकिन शुक्रवार को किशोरी के सही सलामत मिलने के बाद पुलिसिया झूठ का पुलिंदा बेनकाब हो गया।
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उठा सवाल-कितने पुलिस वालों पर होगी कार्रवाई..और कब तक
अमरोहा। लापता किशोरी को ऑनर किलिंग का शिकार बता खुद की पीठ थपथपा चुकी पुलिस टीम का हर सदस्य अब दबाव में है। किशोरी के जिंदा होने की बात स्पष्ट होने के बाद एसपी ने आदमपुर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया। खुलासे में लगी नौ सदस्यीय टीम के बाकी सदस्यों में हड़कंप है।
पुलिस की जीडी में खुलासे और केस से जुड़ी चीजों की बरामदगी में इनके योगदान का भी जिक्र है। खुलासे वाली टीम में एसएसआई विनोद कुमार त्यागी, एसआई राकेश कुमार, एसआई आरिफ मोहम्मद, कांस्टेबल कृष्णवीर सिंह, दीपक कुमार, अनिरुद्ध, महिला कांस्टेबल अपेक्षा तोमर और निधि सिंह शामिल थे।
दूसरी ओर सच सामने आने के बाद से किशोरी के परिवार और गांव के लोगों के बीच से पुलिस वालों पर कार्रवाई को लेकर मांग तेज हो गई है। किशोरी के जिंदा मिलने के बाद आदमपुर थाने पर जुटे लोगों ने दोषी पुलिस कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। अब सवाल उठा रहे हैं कि कितने पुलिस वालों पर कार्रवाई होगी और कब तक।
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आदमपुर थानाक्षेत्र के मलकपुर गांव निवासी किसान की नाबालिग बेटी छह फरवरी 2019 को लापता हो गई थी। उसके भाई की तहरीर पर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की थी। दो लोगों गिरफ्तार कर जेल भेजा था लेकिन किशोरी बरामद नहीं हो पाई थी। पुलिस ने 28 दिसंबर 2019 को अपहरण की रिपोर्ट के उलट नई स्क्रिप्ट तैयार कर किशोरी के पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ही उसकी हत्या का आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। तब से वे जेल में बंद हैं।
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एक इत्तेफाक से किशोरी शुक्रवार को सही सलामत मिल गई तो पुलिस की खतरनाक सोच और खुलासे में फर्जीवाड़े से परदा हट गया। पुलिस अभिलेखों को पलटने से स्पष्ट हुआ कि लिखापढ़त की हर लाइन में पुलिस ने मनमानी की। जीडी के मुताबिक किशोरी के सीने में दो गोलियां मारी गई थीं। शव बोरी में भरकर गंगा में फेंक दिया गया था। जीडी में हत्या में इस्तेमाल तमंचा किशोरी के पिता के घर में रखे संदूक से बरामद दर्शाया था। किशोरी के कपड़े गांव के भोपाल के खेत की झाड़ियों से मिलना बताया था। फिलहाल गुरुवार तक ये स्क्रिप्ट हर किसी को सही लग रही थी। लेकिन शुक्रवार को किशोरी के सही सलामत मिलने के बाद पुलिसिया झूठ का पुलिंदा बेनकाब हो गया।
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उठा सवाल-कितने पुलिस वालों पर होगी कार्रवाई..और कब तक
अमरोहा। लापता किशोरी को ऑनर किलिंग का शिकार बता खुद की पीठ थपथपा चुकी पुलिस टीम का हर सदस्य अब दबाव में है। किशोरी के जिंदा होने की बात स्पष्ट होने के बाद एसपी ने आदमपुर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया। खुलासे में लगी नौ सदस्यीय टीम के बाकी सदस्यों में हड़कंप है।
पुलिस की जीडी में खुलासे और केस से जुड़ी चीजों की बरामदगी में इनके योगदान का भी जिक्र है। खुलासे वाली टीम में एसएसआई विनोद कुमार त्यागी, एसआई राकेश कुमार, एसआई आरिफ मोहम्मद, कांस्टेबल कृष्णवीर सिंह, दीपक कुमार, अनिरुद्ध, महिला कांस्टेबल अपेक्षा तोमर और निधि सिंह शामिल थे।
दूसरी ओर सच सामने आने के बाद से किशोरी के परिवार और गांव के लोगों के बीच से पुलिस वालों पर कार्रवाई को लेकर मांग तेज हो गई है। किशोरी के जिंदा मिलने के बाद आदमपुर थाने पर जुटे लोगों ने दोषी पुलिस कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। अब सवाल उठा रहे हैं कि कितने पुलिस वालों पर कार्रवाई होगी और कब तक।