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खेलते समय बुग्गी पर लदे मिट्टी के बोरे मासूम पर गिरे, दबकर कर मौत
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गजरौला (अमरोहा)। ननिहाल में बच्चों के साथ खेलते समय बुग्गी पर लदे मिट्टी के बोरों के नीचे दबकर चार साल की मासूम की मौत हो गई। लहूलुहान अवस्था में परिजन उसे सीएचसी लेकर आए। यहां केंद्र अधीक्षक ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन रोते-बिलखते हुए शव को लेकर गांव लौट गए।
शनिवार की अपरान्ह लगभग साढ़े तीन बजे यह हादसा थाना क्षेत्र के गांव अहरौला तेजवन में हुआ। गांव निवासी बलबीर की पुत्री कमलेश पत्नी महेश अपनी ससुराल गांव फत्तेपुर छीतरा से यहां आई हुई है। बताते हैं कि उसकी चार वर्षीय पुत्री दीपांशी घर के आंगन में खड़ी कटरा बुग्गी में रस्सी से लटककर झूल रही थी। इसी दौरान वहां मोहल्ले के ही दो-तीन बालक और आ गए। वे बुग्गी पर चढ़ गए। बुग्गी पर मिट्टी के दो मिट्टी से भरे कट्टे भी रखे हुए थे। बताते हैं कि अचानक दबाव पड़ने से बुग्गी नीचे गिर गई और वहां खेल रही दीपांशी उसकी चपेट में आ गई। मिट्टी से भरे कट्टे भी उसके ऊपर आ गिरे, जिनके नीचे वह दब गई। शोर होने पर नानी और मां कमलेश वहां दौड़े और बुग्गी हटाकर दीपांशी को बाहर निकाला लेकिन बुरी तरह घायल दीपांशी की सांसें थम चुकी थीं। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर सीएचसी आए। यहां केंद्र अधीक्षक डा. योगेंद्र सिंह ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन बालिका के शव को लेकर लौट गए। बताते हैं कि बालिका का पिता महेश गांव फत्तेपुर छीतरा में राजमिस्त्री का काम करता है। दीपांशी अपने तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर की थी।
आंगन लीपने को लाए थे कच्ची मिट्टी
गजरौला। सीएचसी में मौजूद कमलेश ने रोते हुए बताया कि परिवार वाले आंगन और घर में लीपने के लिए सुबह ही खेत से कच्ची मिट्टी लेकर आए थे। कमलेश ने बताया कि बुग्गी खाली थी। उसमें कटरा बंधा हुआ नहीं था। मिट्टी के कट्टे पीछे की साइड में रखे हुए थे। उस पर बच्चे चढ़ गए और दबाव पड़ने से बुग्गी नीचे आ गिरी। कमलेश के पिता बलवीर सिंह का कहना था कि उन्हें क्या पता था कि जरा सी लापरवाही से उनकी धेवती की जान चली जाएगी।
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शनिवार की अपरान्ह लगभग साढ़े तीन बजे यह हादसा थाना क्षेत्र के गांव अहरौला तेजवन में हुआ। गांव निवासी बलबीर की पुत्री कमलेश पत्नी महेश अपनी ससुराल गांव फत्तेपुर छीतरा से यहां आई हुई है। बताते हैं कि उसकी चार वर्षीय पुत्री दीपांशी घर के आंगन में खड़ी कटरा बुग्गी में रस्सी से लटककर झूल रही थी। इसी दौरान वहां मोहल्ले के ही दो-तीन बालक और आ गए। वे बुग्गी पर चढ़ गए। बुग्गी पर मिट्टी के दो मिट्टी से भरे कट्टे भी रखे हुए थे। बताते हैं कि अचानक दबाव पड़ने से बुग्गी नीचे गिर गई और वहां खेल रही दीपांशी उसकी चपेट में आ गई। मिट्टी से भरे कट्टे भी उसके ऊपर आ गिरे, जिनके नीचे वह दब गई। शोर होने पर नानी और मां कमलेश वहां दौड़े और बुग्गी हटाकर दीपांशी को बाहर निकाला लेकिन बुरी तरह घायल दीपांशी की सांसें थम चुकी थीं। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर सीएचसी आए। यहां केंद्र अधीक्षक डा. योगेंद्र सिंह ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन बालिका के शव को लेकर लौट गए। बताते हैं कि बालिका का पिता महेश गांव फत्तेपुर छीतरा में राजमिस्त्री का काम करता है। दीपांशी अपने तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर की थी।
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आंगन लीपने को लाए थे कच्ची मिट्टी
गजरौला। सीएचसी में मौजूद कमलेश ने रोते हुए बताया कि परिवार वाले आंगन और घर में लीपने के लिए सुबह ही खेत से कच्ची मिट्टी लेकर आए थे। कमलेश ने बताया कि बुग्गी खाली थी। उसमें कटरा बंधा हुआ नहीं था। मिट्टी के कट्टे पीछे की साइड में रखे हुए थे। उस पर बच्चे चढ़ गए और दबाव पड़ने से बुग्गी नीचे आ गिरी। कमलेश के पिता बलवीर सिंह का कहना था कि उन्हें क्या पता था कि जरा सी लापरवाही से उनकी धेवती की जान चली जाएगी।
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