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Amroha News: नईम साबरी ने कव्वाली से बांधा समां
Tue, 24 Jun 2025 01:29 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 24 Jun 2025 01:29 AM IST
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उझारी (अमरोहा)। हजरत शेख दाऊद रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स में आयोजित महफिल-ए-कव्वाली में सूफियाना कलामों की गूंज से समा बंध गया। दिल्ली से आए मशहूर कव्वाल नईम साबरी ने कलाम पेश किए।
महफिल में नईम साबरी ने एक से बढ़कर एक सूफियाना और दरगाही कलाम पेश किए, जिनमें लोगों को खास तौर पर ये शेर बेहद पसंद आए। उन्होंने कहा कि शेख दाऊद के दर पे करम की बारिश है, जो झोली लिए आया, उसी की ताबीर है। जो गुनहगार भी आता है, नवाज़ा जाता है। ये करम ही तो है, जो दर पे लुटाया जाता है।
हमने देखा है उसी दर पे सुकून-ए-दिल को, जहां सजदों में भी इश्क महकता है हर पल। उर्स की इस महफिल में दूर-दराज से आए ज़ायरीन भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रोता मौजूद रहे, जिन्होंने कव्वाली के हर कलाम पर वाहवाही और दाद दी। नईम साबरी ने अपने अंदाज-ए-बयां से सूफी रंगत को इस तरह पेश किया कि श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
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महफिल में नईम साबरी ने एक से बढ़कर एक सूफियाना और दरगाही कलाम पेश किए, जिनमें लोगों को खास तौर पर ये शेर बेहद पसंद आए। उन्होंने कहा कि शेख दाऊद के दर पे करम की बारिश है, जो झोली लिए आया, उसी की ताबीर है। जो गुनहगार भी आता है, नवाज़ा जाता है। ये करम ही तो है, जो दर पे लुटाया जाता है।
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हमने देखा है उसी दर पे सुकून-ए-दिल को, जहां सजदों में भी इश्क महकता है हर पल। उर्स की इस महफिल में दूर-दराज से आए ज़ायरीन भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रोता मौजूद रहे, जिन्होंने कव्वाली के हर कलाम पर वाहवाही और दाद दी। नईम साबरी ने अपने अंदाज-ए-बयां से सूफी रंगत को इस तरह पेश किया कि श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
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