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स्कूलों में शिक्षक तैनात नहीं लेकिन विश्वविद्यालय खोल रही सरकार:दानिश
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अमरोहा। बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने कहा कि भाजपा सरकार पर शिक्षा के क्षेत्र में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। कहा कि स्कूलों की बिल्डिंग तैयार है लेकिन शिक्षकों की तैनाती नहीं कर सके हैं, जबकि विश्वविद्यालय खोले जा रहे हैं। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के छह हजार पद रिक्त हैं लेकिन सरकार खामोश है। कहा कि विरोधाभाष से सरकार की मंशा साफ हो गई है।
उन्होंने दावा किया कि वित्त मंत्रालय ने शिक्षा के लिए पांच हजार करोड़ रुपये के बजट की कटौती की है। इसके चलते शिक्षण क्षेत्र में सुधार के बजाए गिरावट आने लगी है। वह बुधवार को संसद की कार्रवाई में हिस्सा लिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 100 सैनिक स्कूल के संचालन का एलान किया है इससे संदेह उत्पन्न होने लगे हैं। बताया कि संसदीय क्षेत्र में एमएसडीपी के तहत स्कूल की बिल्डिंग तैयार हुए पांच साल गुजर गए हैं लेकिन एक भी शिक्षक तैनात नहीं किया गया है। कहा कि विश्वविद्यालयों में छह हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं लेकिन हम केंद्रीय विश्वविद्यालय खोल रहे हैं। जबकि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आधारभूत संरचना को पूरा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के कोचिंग संस्थानों को नियमित किया जाए ताकि वहां पर गरीब परिवार के बच्चे भी पढ़ाई कर सकें। कहा कि गांव में इंटरनेट काम नहीं कर रहा है इसके चलते गरीब परिवारों के बच्चे ऑनलाइन क्लास में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने जामिया मिल्यिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि मेडिकल बिल नहीं पास हो रहे हैं। इसके चलते शिक्षक और स्टाफ को असुविधा हो रही है। संवाद
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उन्होंने दावा किया कि वित्त मंत्रालय ने शिक्षा के लिए पांच हजार करोड़ रुपये के बजट की कटौती की है। इसके चलते शिक्षण क्षेत्र में सुधार के बजाए गिरावट आने लगी है। वह बुधवार को संसद की कार्रवाई में हिस्सा लिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 100 सैनिक स्कूल के संचालन का एलान किया है इससे संदेह उत्पन्न होने लगे हैं। बताया कि संसदीय क्षेत्र में एमएसडीपी के तहत स्कूल की बिल्डिंग तैयार हुए पांच साल गुजर गए हैं लेकिन एक भी शिक्षक तैनात नहीं किया गया है। कहा कि विश्वविद्यालयों में छह हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं लेकिन हम केंद्रीय विश्वविद्यालय खोल रहे हैं। जबकि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आधारभूत संरचना को पूरा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के कोचिंग संस्थानों को नियमित किया जाए ताकि वहां पर गरीब परिवार के बच्चे भी पढ़ाई कर सकें। कहा कि गांव में इंटरनेट काम नहीं कर रहा है इसके चलते गरीब परिवारों के बच्चे ऑनलाइन क्लास में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने जामिया मिल्यिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि मेडिकल बिल नहीं पास हो रहे हैं। इसके चलते शिक्षक और स्टाफ को असुविधा हो रही है। संवाद
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