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परिषदीय स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव और मोहल्लों में शिक्षक
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अमरोहा। दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर बेसिक शिक्षा परिषद ने मोहल्ला पाठशाला की शुरुआत कर दी है। दरअसल ऑनलाइन क्लासेज में कई तरह की चुनौतियां आ रही हैं। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई के स्तर में गिरावट आई है। स्मार्ट फोन की उपलब्धता नहीं होने और देहात में इंटरनेट की सुविधा नहीं मिलने से शैक्षिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इसके तहत अब परिषदीय स्कूल के शिक्षक गांव और मोहल्लों में जाने लगेंगे। वह एक जगह पर छात्रों को एकत्र करेेंगे। उन्हें दो घंटे तक भाषा और गणित के बारे में पढ़ाएंगे। रोजाना छात्रों को होम वर्क भी देना है।
कोरोना संक्रमण के चलते बच्चों की शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। हालांकि शिक्षा जगत ने ऑनलाइन क्लासेज शुरूकिया गया लेकिन, इसमें कई तरह की चुनौतियां आने लगी हैं। परिषदीय स्कूलों के छात्रों के पढ़ाई के स्तर में सर्वाधिक गिरावट आई है। स्मार्ट फोन की उपलब्धता और इंटरनेट की सुविधा नहीं मिलने से सभी बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही हैं क्योंकि अधिकांश अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। इसके चलते बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे हालात से निपटने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद ने मोहल्ला पाठशाला की शुरुआत की है। इसके तहत शिक्षक गांव और शहर के मोहल्ले में जाएंगे। वहां पर एक पाठशाला में अधिकतम 15 बच्चों को पढ़ाएंगे। ताकि स्कूल और समुदाय में बेहतर संबंध स्थापित बरकरार रह सके। इसके अलावा गांव में पढ़ाई का बेहतर माहौल बने।
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कोरोना संक्रमण के चलते बच्चों की शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। हालांकि शिक्षा जगत ने ऑनलाइन क्लासेज शुरूकिया गया लेकिन, इसमें कई तरह की चुनौतियां आने लगी हैं। परिषदीय स्कूलों के छात्रों के पढ़ाई के स्तर में सर्वाधिक गिरावट आई है। स्मार्ट फोन की उपलब्धता और इंटरनेट की सुविधा नहीं मिलने से सभी बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही हैं क्योंकि अधिकांश अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। इसके चलते बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे हालात से निपटने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद ने मोहल्ला पाठशाला की शुरुआत की है। इसके तहत शिक्षक गांव और शहर के मोहल्ले में जाएंगे। वहां पर एक पाठशाला में अधिकतम 15 बच्चों को पढ़ाएंगे। ताकि स्कूल और समुदाय में बेहतर संबंध स्थापित बरकरार रह सके। इसके अलावा गांव में पढ़ाई का बेहतर माहौल बने।
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