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Amroha News: मिनी स्टेडियम बना नशेड़ियों का अड्डा, लगे गंदगी के अंबार
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अमरोहा। शहर का मिनी स्टेडियम नशाखोरी का अड्डा बन गया है। नशे की लत में पड़े युवा यहां एकांत में पहुंचकर अपने नशे करते हैं। इंजेक्शन और सिरिंज के ढेर लगे हैं। गंदगी के अंबार लगे हैं। नियमित साफ सफाई और देखरेख नहीं होने से स्टेडियम की हालत बदहाल हो चली है।
युवाओं के खेलकूद अभ्यास के लिए गांधी मूर्ति चौक के निकट मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया गया था। लेकिन इस मिनी स्टेडियम का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। मिनी स्टेडियम में नियमित साफ सफाई नहीं होने के कारण गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। साथ ही मिनी स्टेडियम नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। स्टेडियम के शौचालय में भारी मात्रा में सिरिंज तथा नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाले दवाइयों की खाली शीशियां भी पड़ी हुईं हैं। नशे से संबंधित दवाइयों को बिना डॉक्टरी पर्चे के नहीं बेचा जा सकता। लेकिन इसके बाद भी किस तरह यह नशे की दवाई इसकी लत में लगे युवाओं तक पहुंच रहीं हैं, यह जांच का विषय है। डीआईओएस विष्णु प्रताप सिंह का कहना है कि सफाई कर्मियों की कमी के चलते समस्या हो रही है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है।
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युवाओं में नशे की लत से बढ़ रहा क्राइम
शहर में युवा पीढ़ी के नशे की जद में आने के बाद से अपराधों इजाफा हो रहा है। युवा विभिन्न माध्यमों से नशा कर जरायम की दुनिया में कदम रख रहे हैं। पिछले दो सालों के पुलिस आंकड़ों पर गौर किया जाए तो रोड होल्डअप से लेकर मर्डर तक में युवा अहम रोल में देखे गए हैं। चोरी, डकैती, लूटपाट आदि करना मानों उनका शौक बन गया हो। इन वारदातों में सबसे ज्यादा युवा वर्ग के आरोपी थे। नशे का सबसे आसान तरीका फ्लूड है। युवा हाथ पर या फिर रुमाल पर व्हाइटनर यानी फ्लूड लगाकर उसे सूंघते हैं। नशे जद में केवल युवक ही नहीं, बल्कि किशोर भी आदी हो चुके हैं।
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ये हैं नशा करने के नुकसान
. किसी भी प्रकार का नशा करने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
. रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है।
. बार-बार उल्टी दस्त लगने शुरू हो जाते हैं।
. दिमाग में सूजन आने का खतरा रहता है।
. हार्टअटैक के चांस बढ़ जाते हैं।
. फेफड़ों और गले में कैंसर होता है।
. नेत्र ज्योति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
. यौन रोग होने की संभावना करीब 95 फीसदी बढ़ जाती है।
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युवाओं के खेलकूद अभ्यास के लिए गांधी मूर्ति चौक के निकट मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया गया था। लेकिन इस मिनी स्टेडियम का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। मिनी स्टेडियम में नियमित साफ सफाई नहीं होने के कारण गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। साथ ही मिनी स्टेडियम नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। स्टेडियम के शौचालय में भारी मात्रा में सिरिंज तथा नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाले दवाइयों की खाली शीशियां भी पड़ी हुईं हैं। नशे से संबंधित दवाइयों को बिना डॉक्टरी पर्चे के नहीं बेचा जा सकता। लेकिन इसके बाद भी किस तरह यह नशे की दवाई इसकी लत में लगे युवाओं तक पहुंच रहीं हैं, यह जांच का विषय है। डीआईओएस विष्णु प्रताप सिंह का कहना है कि सफाई कर्मियों की कमी के चलते समस्या हो रही है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है।
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युवाओं में नशे की लत से बढ़ रहा क्राइम
शहर में युवा पीढ़ी के नशे की जद में आने के बाद से अपराधों इजाफा हो रहा है। युवा विभिन्न माध्यमों से नशा कर जरायम की दुनिया में कदम रख रहे हैं। पिछले दो सालों के पुलिस आंकड़ों पर गौर किया जाए तो रोड होल्डअप से लेकर मर्डर तक में युवा अहम रोल में देखे गए हैं। चोरी, डकैती, लूटपाट आदि करना मानों उनका शौक बन गया हो। इन वारदातों में सबसे ज्यादा युवा वर्ग के आरोपी थे। नशे का सबसे आसान तरीका फ्लूड है। युवा हाथ पर या फिर रुमाल पर व्हाइटनर यानी फ्लूड लगाकर उसे सूंघते हैं। नशे जद में केवल युवक ही नहीं, बल्कि किशोर भी आदी हो चुके हैं।
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ये हैं नशा करने के नुकसान
. किसी भी प्रकार का नशा करने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
. रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है।
. बार-बार उल्टी दस्त लगने शुरू हो जाते हैं।
. दिमाग में सूजन आने का खतरा रहता है।
. हार्टअटैक के चांस बढ़ जाते हैं।
. फेफड़ों और गले में कैंसर होता है।
. नेत्र ज्योति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
. यौन रोग होने की संभावना करीब 95 फीसदी बढ़ जाती है।