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Amroha News: इस्लाम बचाने के लिए इमाम हुसैन ने दी अपनी व परिवार की कुर्बानी
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अमरोहा/नौगांवा सादात। मौलाना कौसर मुस्तफा ने कहा कि इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए अपना व अपने तमाम घरवालों की कुर्बानी देना पसंद किया लेकिन यजीद के जुल्म के आगे सर नहीं झुकाया। इमाम हुसैन की इसी कुर्बानी की वजह से आज मजहबे इस्लाम का सर बुलंद है।
28 रजब सफरे इमामे हुसैन अल. के सिलसिले से अजाखाना मोहल्ला बगला में सैयद अफजाल अहमद नकवी साहब ने मजलिस का आयोजन किया गया। सिबते सज्जाद व उनके साथियों ने मर्सिया पढ़ा और मौलाना कौसर मुस्तफा ने जाकिरी की। मजलिस में मौलाना कौसर मुस्तफा ने कहा कि आज ही के दिन इमामे हुसैन ने मदीने से कर्बला के लिए सफर शुरू किया था। उन्होंने कहा कि जब यजीद बादशाह बना तो उसने इमाम हुसैन से बैअत मांगी। यजीद का मानना था कि इस्लाम मजहब में जो बातें मना की गई हैं उनको जायज करार दिया जाए। जिसको इमाम हुसैन ने सिरे से नकार दिया। इसी बात को लेकर उन्होंने आज के दिन अपने वतन मदीने से मक्के के रास्ते कर्बला जाने का सफर शुरू किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए अपना व अपने तमाम घरवालों की कुर्बानी देना पसंद किया लेकिन यजीद के जुल्म के आगे सिर नहीं झुकाया। मजलिस में बाकर रजा नकवी, मोहम्मद अली, जावेद हैदर, नइम रजा, खलील मुस्तफा आदि मौजूद रहे।
वहीं नौगांवा सादात में 28 रजब को इमामबाड़ा पक्का बंगला में एक मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में मर्सिया ख्वानी अली हुसैन ने की। इसके बाद मौलाना गजनफर हुसैन ने मजलिस को खिताब किया। जिसमें इमाम हुसैन के मदीने से कर्बला के सफर तक रोशनी डाली। मजलिस के बाद सफर ए इमाम हुसैन की याद में जुलूस निकाला। यह जुलूस मोहल्ला बंगला से होता हुआ बस्ती के तयशुदा रास्तों से गुजरा। जुलूस में अली अंसर, नूर अब्बास उर्फ राणा, अथर अब्बास, अली हैदर, हुसैन अब्बास आदि मौजूद रहे।
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28 रजब सफरे इमामे हुसैन अल. के सिलसिले से अजाखाना मोहल्ला बगला में सैयद अफजाल अहमद नकवी साहब ने मजलिस का आयोजन किया गया। सिबते सज्जाद व उनके साथियों ने मर्सिया पढ़ा और मौलाना कौसर मुस्तफा ने जाकिरी की। मजलिस में मौलाना कौसर मुस्तफा ने कहा कि आज ही के दिन इमामे हुसैन ने मदीने से कर्बला के लिए सफर शुरू किया था। उन्होंने कहा कि जब यजीद बादशाह बना तो उसने इमाम हुसैन से बैअत मांगी। यजीद का मानना था कि इस्लाम मजहब में जो बातें मना की गई हैं उनको जायज करार दिया जाए। जिसको इमाम हुसैन ने सिरे से नकार दिया। इसी बात को लेकर उन्होंने आज के दिन अपने वतन मदीने से मक्के के रास्ते कर्बला जाने का सफर शुरू किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए अपना व अपने तमाम घरवालों की कुर्बानी देना पसंद किया लेकिन यजीद के जुल्म के आगे सिर नहीं झुकाया। मजलिस में बाकर रजा नकवी, मोहम्मद अली, जावेद हैदर, नइम रजा, खलील मुस्तफा आदि मौजूद रहे।
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वहीं नौगांवा सादात में 28 रजब को इमामबाड़ा पक्का बंगला में एक मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में मर्सिया ख्वानी अली हुसैन ने की। इसके बाद मौलाना गजनफर हुसैन ने मजलिस को खिताब किया। जिसमें इमाम हुसैन के मदीने से कर्बला के सफर तक रोशनी डाली। मजलिस के बाद सफर ए इमाम हुसैन की याद में जुलूस निकाला। यह जुलूस मोहल्ला बंगला से होता हुआ बस्ती के तयशुदा रास्तों से गुजरा। जुलूस में अली अंसर, नूर अब्बास उर्फ राणा, अथर अब्बास, अली हैदर, हुसैन अब्बास आदि मौजूद रहे।
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