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आरोग्य मेला : व्यवस्था ही बीमार तो कैसे मिले उपचार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jul 2024 05:16 AM IST
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If the system is sick then how can we get treatment
अमरोहा। ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र के मरीजों को बेहतर उपचार दिलाने के लिए सरकार की ओर से शुरू हुआ आरोग्य मेलों में सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था ही बीमार है, ऐसे में मरीजों को उपचार कैसे मिलेगा, यह बड़ा सवाल है। रविवार को जिले भर में लगे स्वास्थ्य मेलों का यही हाल था। किसी पीएचसी पर ताला लटका मिला तो कहीं खून की जांच नहीं हुई। कई जगह स्टाफ की कमी होने के चलते चिकित्सक खानापूर्ति करते दिखे। जिले में 26 पीएचसी संचालित हैं, लेकिन इसमें नौ जगह फार्मासिस्ट व दो जगह चिकित्सक की तैनाती नहीं है। आरोग्य मेले के दौरान समुचित सुविधाएं न मिलने से मरीज किनारा करने लगे हैं। जिले भर में कई जगह पीएचसी पर की गई पड़ताल में व्यवस्था बेपटरी नजर आई।
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पीएचसी मटीपुरा पर लटका रहा ताला

आदमपुर/रहरा। गंगेश्वरी ब्लॉक के गांव मटीपुरा में भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। दोपहर बारह बजे पीएचसी पर ताला लटक रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि रविवार के दिन यहां कोई आरोग्य मेला नहीं लगाया जाता। जबकि अन्य दिनों में भी चिकित्सक नहीं पहुंचते। वार्ड बॉय के सहारे ही अस्पताल का संचालन होता है। जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को यहां से वापस लौटना पड़ा।
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फार्मासिस्ट की कमी से जूझ रहा हसनपुर का पीएचसी

हसनपुर। नगर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे अस्पताल में आयोजित आरोग्य मेले में पीएचसी प्रभारी डॉ. अक्षय नागर मरीजों को देखते मिले। यहां फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। पीएचसी प्रभारी फार्मासिस्ट की कमी है। कई बार विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा जा चुका है।
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उझारी पीएचसी पर नहीं लगा आरोग्य मेला

उझारी। नगर पंचायत उझारी की पीएचसी पर आरोग्य मेला नहीं लगाया जाता है। पीएचसी पर पर तैनात महिला डॉ. सबीहा सुल्तान का कहना है कि अस्पताल पर कोई भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद नहीं है। जिसकी वजह से यहां पर मरीज आते नहीं है। अगर स्टाफ की बात की जाए तो डॉ. सबीहा सुल्तान के अलावा एक फार्मासिस्ट, एक एलटी समेत तीन लोगों का स्टॉफ है। इनके भरोसे ही यहां अस्पताल चलता है। संवाद
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अस्पताल परिसर शाम होते ही बन जाता है मयखाना

मंडी धनौरा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चुचैला कलां पर रविवार को दोपहर सवा बजे तक 29 रोगियों का उपचार किया गया। अधिकांश रोगी नजला जुकाम, बुखार व पेट दर्द के थे। यहां फार्मासिस्ट नहीं होने के कारण चिकित्सक डॉक्टर निकिता कौशल ही दवाई दे रहीं थीं। खून की जांच के नाम पर ब्लड शुगर व कार्ड से होने वाली जांच की जा रही थी। अस्पताल परिसर के बाहर शराब और बीयर की खाली बोलतें पड़ी मिलीं। लोगों का कहना है कि शाम होते ही यहां शराबी अपना अड्डा बना लेते हैं। संवाद
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बिना बिजली परेशान रहे मरीज व चिकित्सक
अमरोहा। नगर में चार पीएचसी हैं। रविवार को मोहल्ला मोहम्मदी सराय में सुबह दस बजे से ही बिजली नहीं थी। इनवर्टर भी जवाब दे गया। ऐसे में दोपहर दो बजे तक यहां बिजली गुल रही। जिसके चलते मरीज खासे परेशान रहे। उधर, यहां पर फार्मासिस्ट की तैनाती भी नहीं है। उधर, कटकुई व कुरैशी पीएचसी में फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। संवाद
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दोपहर 12 बजे तक नहीं आया कोई मरीज
गजरौला। नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन तिगरी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। यहां पर चिकित्सक, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय की तैनाती है। तिगरी गांव गंगा किनारे होने के कारण खादर के ग्रामीण इसी में दवाई लेने आते हैं। रविवार दोपहर 12 बजे तक कोई मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाई लेने नहीं आया था। संवाद
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कई जगह नहीं होती मिल खून की जांच
पीएचसी पर लगने वाले आरोग्य मेले में गर्भवती महिलाओं के लिए एचबी, एचसीवी, वीडीआरएल, एचआईवी, प्रेगनेंसी, टाइफाइड के लिए खून की जांच होती है। वहीं यूरिन टेस्ट की सुविधा होती है। लेकिन, कई जगह खून की जांच होती नहीं मिली। संवाद

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जिले में 26 पीएचसी पर हर रविवार को आरोग्य मेलों का आयोजन होता है। गंगेश्वरी मटीपुरा पीएचसी पर चिकित्सक की तैनाती न होने से ताला लगा रहा होगा। वहीं, नौ जगह फार्मासिस्ट की जगह खाली है। ऐसे में परेशानी हो रही है। जहां-जहां अव्यवस्थाएं हैं, उन्हें ठीक कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। विभागीय स्तर पर आरोग्य मेलों को लेकर सजगता बरती जा रही है।
-डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ
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