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धरतीपुत्रों की सड़कों पर हुंकार, कृषि बिल नहीं है स्वीकार
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रजबपुर के झनकपुरी में किसान यूनियन असली के और किसान मजदूर संगठन के पदाधिकारियों ने हाईवें जाम कर
- फोटो : JPNAGAR
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रजबपुर(अमरोहा)। केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि विधेयकों के विरोध में शुक्रवार को किसान सड़कों पर उतर आए हैं। भाकियू और किसान संगठन के पदाधिकारियों ने नेशनल हाईवे पर तीन स्थानों पर धरना देकर जाम लगा दिया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वादाखिलाफी का आरोप लगाया। जमकर हंगामा किया। किसानों पर केंद्र सरकार आरोप लगाया कि ये अध्यादेश पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए पारित किया गया है। यह अध्यादेश किसान विरोधी हैं। हाईवे पर जाम लगने से दिल्ली और मुरादाबाद से आने-जाने वाहनों की लंबी कतार लग गई। भीषण गर्मी में राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि पुलिस ने जोया और जनकपुरी के इर्द-गिर्द वाहनों को डायवर्ट कर दिया गया। इससे राहगीरों का सहूलियत मिली है। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से विरोध प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस पीएसी तैनात है।
अमरोहा में किसानों संगठनों का चक्का जाम प्रस्तावित था। इसके तहत भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के जिला अध्यक्ष रामपाल सिंह के नेतृत्व में अतरासी में किसान स्मारक पर एकत्र हुए। यहां हाईवे पर जाम लगाया। इस इस दौरान युवा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी विजय पाल सिंह, उम्मेद सिंह, काले सिंह, ठाकुर महेश सिंह, मेवाराम सिंह, महेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं, भारतीय किसान यूनियन असली के जिलाध्यक्ष महावीर सिंह के नेतृत्व में तमाम किसान जलालपुर में जमा हुए। इनके साथ में किसान मजदूर के पदाधिकारी में शामिल थे। वहीं भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह के नेतृत्व में किसानों ने रजबपुर के पैठ बाजार में धरना दिया। इस दौरान सोरन सिंह, वीरेंद्र सिंह, गुरजिंदर कौर, सतपाल सिंह, कालीचरण, महिपाल सैनी, डॉक्टर योगेंद्र सिंह, महेश मटैना, नित्यानंद, सतवीर, आनंद स्वरूप, राकेश सैनी, अरुण कुमार मौजूद रहे। करीब एक बजे तमाम संगठन हाईवे पर उतर आए। किसान विरोधी तीनों अध्यादेश वापस लेने की मांग की। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश की। फसल का दाम उत्पादन लागत में पचास प्रतिशत लाभांश जोड़कर तय किया जाए। अन्यथा किसान विरोध प्रदर्शन के अन्य संवैधानिक तरीकों पर विचार करने को बाध्य होंगे।
यदि सरकार वास्तव में किसानों का भला करना चाहती है, तो एक कानून एमएसपी न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए भी बना दें। देश में यदि कोई भी व्यापारी या कंपनी एमएसपी से कम दाम पर कोई भी किसान की कोई भी फसल खरीद ती है तो उस पर वैधानिक कार्यवाही होकर जेल जाने का प्रावधान हो। तभी देश का अन्नदाता बच पाएगा। सरकर किसानों को गुमराह करके किसानों को बर्बाद करने का काम कर रही है। इसे किसी भी कीमत पर देश का अन्नदाता बर्दाश्त नहीं करेगा। यह आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक यह काले अध्यादेश वापस नहीं होगा।
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जनसंख्या पर लगाए सरकार
कहा कि भारत का क्षेत्रफल पूरी दुनिया के क्षेत्रफल का मात्र दो प्रतिशत है, जबकि भारत में पूरी दुनिया के बीस प्रतिशत लोग रहते हैं। संसाधन सीमित हैं और जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। परिणाम स्वरूप बेरोजगारी, कुपोषण, अव्यवस्था जैसी भयंकर समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। जब हम चेतेंगे जब समस्या लाइलाज हो जाएगी। बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर हवा-पानी अगर हमें चाहिए तो जनसंख्या पर लगाम लगाना अपरिहार्य है।
इसलिए नाराज है किसान
कोरोना काल में विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार ने विपक्षियों के विरोध के बाद भी कृषि विधेयकों का पास करा लिया है। केंद्र सरकार इसे किसानों की खुशहाली का जरिया बता रही है। जबकि देश का अन्नदाता इसके विरोध में सड़क पर उतर आया है। किसान सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। किसानों का कहना है कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बिल लाए गए हैं।
चार घंटे हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल
रजबपुर। कृषि विधेयकों के विरोध में किसान संगठनों के चक्का जाम को लेकर हाईवे पर चार घंटे तक अफरा-फतरी का माहौल बना रहा। भाकियू और किसान मजदूर संगठन के पदाधिकारी एक-के बाद एक हाईवे पर उतर आए। जिसके बाद जिला प्रशासन के पसीने छूट गए। किसानों के चक्का जाम के दौरान अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लेते रहे डीएम-एसपी
रजबपुर। किसानों के चक्का जाम को लेकर डीएम उमेश मिश्रा और एसपी डॉ विपिन ताडा भ्रमण करते रहे। साथ विरोध-प्रदर्शन स्थल पर तैनात मजिस्ट्रेट और पुलिस अफसरों से पल-पल की अपडेट लेते रहे। शाम चार बजे जाम खुलने के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली।
इन स्थानों पर लगाया जाम
. भाकियू अराजनैतिक ने एक बजे नेशनल हाईवे अतरासी चौराहे पर जाम लगाया और दो बजे एसडीएम सदर शशांक चौधरी को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन समाप्त किया।
. भाकियू असली और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने डेढ़ बजे हाईवे पर जाम लगाने पहुंचे और 2.30 बजे एसडीएम धनौरा विवेक यादव को ज्ञापन सौंपकर जाम खोला।
. भाकियू भानू के पदाधिकारी एक बजे हाईवे पर पहुंचे और 1.15 बजे विरोध प्रदर्शन के बाद जाम खोल दिया। बाद में दो बजे तक पैठ बाजार बैठक की।
. रसूलपुर माफी धनौरा में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने साढ़े ग्यारह बजे से गजरौला चांदपुर मार्ग जाम कर दिया। इसके बाद 1.40 पर एसडीएम धनौरा विवेक यादव को ज्ञापन सौंपकर जाम खोल दिया।
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अमरोहा में किसानों संगठनों का चक्का जाम प्रस्तावित था। इसके तहत भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के जिला अध्यक्ष रामपाल सिंह के नेतृत्व में अतरासी में किसान स्मारक पर एकत्र हुए। यहां हाईवे पर जाम लगाया। इस इस दौरान युवा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी विजय पाल सिंह, उम्मेद सिंह, काले सिंह, ठाकुर महेश सिंह, मेवाराम सिंह, महेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं, भारतीय किसान यूनियन असली के जिलाध्यक्ष महावीर सिंह के नेतृत्व में तमाम किसान जलालपुर में जमा हुए। इनके साथ में किसान मजदूर के पदाधिकारी में शामिल थे। वहीं भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह के नेतृत्व में किसानों ने रजबपुर के पैठ बाजार में धरना दिया। इस दौरान सोरन सिंह, वीरेंद्र सिंह, गुरजिंदर कौर, सतपाल सिंह, कालीचरण, महिपाल सैनी, डॉक्टर योगेंद्र सिंह, महेश मटैना, नित्यानंद, सतवीर, आनंद स्वरूप, राकेश सैनी, अरुण कुमार मौजूद रहे। करीब एक बजे तमाम संगठन हाईवे पर उतर आए। किसान विरोधी तीनों अध्यादेश वापस लेने की मांग की। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश की। फसल का दाम उत्पादन लागत में पचास प्रतिशत लाभांश जोड़कर तय किया जाए। अन्यथा किसान विरोध प्रदर्शन के अन्य संवैधानिक तरीकों पर विचार करने को बाध्य होंगे।
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यदि सरकार वास्तव में किसानों का भला करना चाहती है, तो एक कानून एमएसपी न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए भी बना दें। देश में यदि कोई भी व्यापारी या कंपनी एमएसपी से कम दाम पर कोई भी किसान की कोई भी फसल खरीद ती है तो उस पर वैधानिक कार्यवाही होकर जेल जाने का प्रावधान हो। तभी देश का अन्नदाता बच पाएगा। सरकर किसानों को गुमराह करके किसानों को बर्बाद करने का काम कर रही है। इसे किसी भी कीमत पर देश का अन्नदाता बर्दाश्त नहीं करेगा। यह आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक यह काले अध्यादेश वापस नहीं होगा।
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जनसंख्या पर लगाए सरकार
कहा कि भारत का क्षेत्रफल पूरी दुनिया के क्षेत्रफल का मात्र दो प्रतिशत है, जबकि भारत में पूरी दुनिया के बीस प्रतिशत लोग रहते हैं। संसाधन सीमित हैं और जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। परिणाम स्वरूप बेरोजगारी, कुपोषण, अव्यवस्था जैसी भयंकर समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। जब हम चेतेंगे जब समस्या लाइलाज हो जाएगी। बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर हवा-पानी अगर हमें चाहिए तो जनसंख्या पर लगाम लगाना अपरिहार्य है।
इसलिए नाराज है किसान
कोरोना काल में विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार ने विपक्षियों के विरोध के बाद भी कृषि विधेयकों का पास करा लिया है। केंद्र सरकार इसे किसानों की खुशहाली का जरिया बता रही है। जबकि देश का अन्नदाता इसके विरोध में सड़क पर उतर आया है। किसान सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। किसानों का कहना है कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बिल लाए गए हैं।
चार घंटे हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल
रजबपुर। कृषि विधेयकों के विरोध में किसान संगठनों के चक्का जाम को लेकर हाईवे पर चार घंटे तक अफरा-फतरी का माहौल बना रहा। भाकियू और किसान मजदूर संगठन के पदाधिकारी एक-के बाद एक हाईवे पर उतर आए। जिसके बाद जिला प्रशासन के पसीने छूट गए। किसानों के चक्का जाम के दौरान अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लेते रहे डीएम-एसपी
रजबपुर। किसानों के चक्का जाम को लेकर डीएम उमेश मिश्रा और एसपी डॉ विपिन ताडा भ्रमण करते रहे। साथ विरोध-प्रदर्शन स्थल पर तैनात मजिस्ट्रेट और पुलिस अफसरों से पल-पल की अपडेट लेते रहे। शाम चार बजे जाम खुलने के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली।
इन स्थानों पर लगाया जाम
. भाकियू अराजनैतिक ने एक बजे नेशनल हाईवे अतरासी चौराहे पर जाम लगाया और दो बजे एसडीएम सदर शशांक चौधरी को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन समाप्त किया।
. भाकियू असली और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने डेढ़ बजे हाईवे पर जाम लगाने पहुंचे और 2.30 बजे एसडीएम धनौरा विवेक यादव को ज्ञापन सौंपकर जाम खोला।
. भाकियू भानू के पदाधिकारी एक बजे हाईवे पर पहुंचे और 1.15 बजे विरोध प्रदर्शन के बाद जाम खोल दिया। बाद में दो बजे तक पैठ बाजार बैठक की।
. रसूलपुर माफी धनौरा में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने साढ़े ग्यारह बजे से गजरौला चांदपुर मार्ग जाम कर दिया। इसके बाद 1.40 पर एसडीएम धनौरा विवेक यादव को ज्ञापन सौंपकर जाम खोल दिया।