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Amroha News: हेपेटाइटिस के मरीजों को इलाज के नाम पर एक माह का इंतजार
Tue, 03 Jun 2025 02:01 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 03 Jun 2025 02:01 AM IST
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अमरोहा।
जिले के हेपेटाइटिस के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सैंपल लेने के एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। दिल्ली और मेरठ से रिपोर्ट आने में कम से कम चार हफ्ते से ज्यादा का समय लग रहा है। 50 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें अपनी रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही उनका सही ढंग से इलाज शुरू हो सकेगा।
जिले में हेपेटाइटिस के दस हजार से ज्यादा मरीज हैं। जबकि, लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीमारी से संबंधित लक्षण वाले करीब दस से 12 मरीज रोजाना जांच कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं होने के कारण सैंपल मेरठ या दिल्ली लैब भेजने पड़ रहे हैं। हालात यह है कि यहां से रिपोर्ट मिलने में करीब 45 से 50 दिन का समय लग रहा है। इस कारण मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
ब्लड बैंक प्रभारी प्रमोद कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस-सी लीवर से संबंधित एक वायरल इंफेक्शन है। इससे कई बार लीवर को बहुत ही गंभीर नुकसान पहुंचता है। चिकित्सकों के मुताबिक अनदेखी पर लीवर फेलियर या कैंसर तक की नौबत आ जाती है, फिर मरीज की जान पर बन आती है। यह बीमारी इसलिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। क्योंकि आधे से ज्यादा संक्रमित लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें इसके लक्षण या तो दिखाई नहीं देते हैं या फिर सामने आने में ही दस साल तक लग जाते हैं। इसलिए चिकित्सक समय-समय पर रक्त की जांच कराने का सुझाव देते हैं।
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ऐसे फैलता है संक्रमण
हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण तब फैलता है जब वायरस खून को संक्रमित कर फैलना शुरू कर देता है। इस वायरस के सात रूप हैं और सातों के 67 प्रकार हैं। मरीज को कौन सी दवा देनी है या इलाज का तरीका क्या होगा। यह वायरस के रूप पर निर्भर करता है। जिला अस्पताल में अब दवाएं मौजूद हैं। यहां इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है। केवल जांच रिपोर्ट आने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। इसकी वजह ये है कि मेरठ लैब में लोड अधिक हैं।
ऐसे बरतें एहतियात
सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि यदि किसी परिवार का सदस्य हेपेटाइटिस बी या सी से संक्रमित है, तो उन्हें बहुत ज्यादा एहतियात बरतने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति के सामान का इस्तेमाल करने से परहेज करें। साथ ही उसका झूठा खाना भी नहीं खाना चाहिए। चिकित्सक के मुताबिक उसके कपड़े, टूथ ब्रुश, बर्तन को अलग कर देना चाहिए।
जल्द शुरू हो सकती है हेपेटाइटिस बी व सी की जांच
g जिला अस्पताल में बहुत जल्द हेपेटाइटिस बी और सी की जांच की सुविधा मिलने लगेगी। आसपास में अभी तक यह जांच सिर्फ मेरठ मेडिकल कॉलेज में होती है। हेपेटाइटिस बी और सी की जांच जिले में ही हो सके, इसके लिए शासन से मांग की गई थी। लखनऊ की टीम ने जिला अस्पताल आकर मुआयना कर लिया है। इसके बाद जिले में ही हेपेटाइटिस बी व सी की जांच शुरू हो जाएगी ऐसी उम्मीद जगी है।
- जिले के हेपेटाइटिस के मरीजों की सैंपल की जांच दिल्ली और मेरठ में होती है। यहां से रिपोर्ट मिलने में चार सप्ताह से ज्यादा का समय लगता है। ऐसे में मरीजों को परेशानी होती है। मरीजों को लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। हेपेटाइटिस बी और सी की जांच जिले में ही हो सके, इसके लिए हमारे स्तर से शासन से मांग की गई थी। लखनऊ की टीम ने जिला अस्पताल आकर मुआयना कर लिया है। आने वाले दिनों में हेपेटाइटिस बी व सी की जांच शुरू होने की उम्मीद है। - डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी ब्लड बैंक
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जिले के हेपेटाइटिस के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सैंपल लेने के एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। दिल्ली और मेरठ से रिपोर्ट आने में कम से कम चार हफ्ते से ज्यादा का समय लग रहा है। 50 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें अपनी रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही उनका सही ढंग से इलाज शुरू हो सकेगा।
जिले में हेपेटाइटिस के दस हजार से ज्यादा मरीज हैं। जबकि, लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीमारी से संबंधित लक्षण वाले करीब दस से 12 मरीज रोजाना जांच कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं होने के कारण सैंपल मेरठ या दिल्ली लैब भेजने पड़ रहे हैं। हालात यह है कि यहां से रिपोर्ट मिलने में करीब 45 से 50 दिन का समय लग रहा है। इस कारण मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
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ब्लड बैंक प्रभारी प्रमोद कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस-सी लीवर से संबंधित एक वायरल इंफेक्शन है। इससे कई बार लीवर को बहुत ही गंभीर नुकसान पहुंचता है। चिकित्सकों के मुताबिक अनदेखी पर लीवर फेलियर या कैंसर तक की नौबत आ जाती है, फिर मरीज की जान पर बन आती है। यह बीमारी इसलिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। क्योंकि आधे से ज्यादा संक्रमित लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें इसके लक्षण या तो दिखाई नहीं देते हैं या फिर सामने आने में ही दस साल तक लग जाते हैं। इसलिए चिकित्सक समय-समय पर रक्त की जांच कराने का सुझाव देते हैं।
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ऐसे फैलता है संक्रमण
हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण तब फैलता है जब वायरस खून को संक्रमित कर फैलना शुरू कर देता है। इस वायरस के सात रूप हैं और सातों के 67 प्रकार हैं। मरीज को कौन सी दवा देनी है या इलाज का तरीका क्या होगा। यह वायरस के रूप पर निर्भर करता है। जिला अस्पताल में अब दवाएं मौजूद हैं। यहां इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है। केवल जांच रिपोर्ट आने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। इसकी वजह ये है कि मेरठ लैब में लोड अधिक हैं।
ऐसे बरतें एहतियात
सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि यदि किसी परिवार का सदस्य हेपेटाइटिस बी या सी से संक्रमित है, तो उन्हें बहुत ज्यादा एहतियात बरतने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति के सामान का इस्तेमाल करने से परहेज करें। साथ ही उसका झूठा खाना भी नहीं खाना चाहिए। चिकित्सक के मुताबिक उसके कपड़े, टूथ ब्रुश, बर्तन को अलग कर देना चाहिए।
जल्द शुरू हो सकती है हेपेटाइटिस बी व सी की जांच
g जिला अस्पताल में बहुत जल्द हेपेटाइटिस बी और सी की जांच की सुविधा मिलने लगेगी। आसपास में अभी तक यह जांच सिर्फ मेरठ मेडिकल कॉलेज में होती है। हेपेटाइटिस बी और सी की जांच जिले में ही हो सके, इसके लिए शासन से मांग की गई थी। लखनऊ की टीम ने जिला अस्पताल आकर मुआयना कर लिया है। इसके बाद जिले में ही हेपेटाइटिस बी व सी की जांच शुरू हो जाएगी ऐसी उम्मीद जगी है।
- जिले के हेपेटाइटिस के मरीजों की सैंपल की जांच दिल्ली और मेरठ में होती है। यहां से रिपोर्ट मिलने में चार सप्ताह से ज्यादा का समय लगता है। ऐसे में मरीजों को परेशानी होती है। मरीजों को लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। हेपेटाइटिस बी और सी की जांच जिले में ही हो सके, इसके लिए हमारे स्तर से शासन से मांग की गई थी। लखनऊ की टीम ने जिला अस्पताल आकर मुआयना कर लिया है। आने वाले दिनों में हेपेटाइटिस बी व सी की जांच शुरू होने की उम्मीद है। - डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी ब्लड बैंक