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Amroha News: खुद की जिंदगी संवार अब दूसरों को ब्यूटीशियन बना रहीं रेनू
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हसनपुर। तहसील क्षेत्र के ताहरपुर गांव की एमए पास रीनू देवी ने आर्थिक तंगी के बीच ऋण लेकर बुटीक शुरू किया और मेहनत के दम पर लखपति दीदी बनीं। खुद की जिंदगी संवार कर अब वह दूसरों महिलाओं के लिए भी रोजगार का जरिया बनी हैं।
वर्ष 2021 में पढ़ाई पूरी करने के बाद रीनू ने गांव में बुटीक शुरू किया, लेकिन शुरुआती दिनों में खास मुनाफा नहीं हुआ। सितंबर 2021 में स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिलने पर उन्होंने 10 महिलाओं को जोड़कर कान्हा स्वयं सहायता समूह बनाया और 50 हजार रुपये का ऋण लिया। समूह की मदद से बुटीक का कारोबार रफ्तार पकड़ने लगा।
इसके बाद रीनू ने बावनखेड़ी ग्राम पंचायत में अपनी जमीन पर कान्हा नर्सरी शुरू की। यहां फूल, सजावटी पौधों के साथ आम की पौध भी उपलब्ध है।
सालाना चार से पांच लाख रुपये की कमाई
-आज रीनू बुटीक और नर्सरी दोनों के माध्यम से सालाना चार से पांच लाख रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। नर्सरी से ही उन्हें हर महीने 10 से 15 हजार रुपये की शुद्ध बचत होती है। अपने इस छोटे से व्यवसाय के दम पर रीनू ने पांच लोगों को रोजगार से जोड़ा है, जिसमें नर्सरी देखभाल के लिए दो मजदूर भी शामिल हैं। स्वावलंबन और लगन की मिसाल बनी रीनू देवी की यह कहानी आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।
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समूह से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरकार की योजनाओं से उनको जोड़ा जा रहा है। अपनी मेहनत से कई हजार महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर लखपति बन चुकी हैं। प्रशासन के द्वारा ऐसी महिलाओं का सहयोग किया जा रहा है।
-अश्वनी कुमार मिश्र, सीडीओ, अमरोहा
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वर्ष 2021 में पढ़ाई पूरी करने के बाद रीनू ने गांव में बुटीक शुरू किया, लेकिन शुरुआती दिनों में खास मुनाफा नहीं हुआ। सितंबर 2021 में स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिलने पर उन्होंने 10 महिलाओं को जोड़कर कान्हा स्वयं सहायता समूह बनाया और 50 हजार रुपये का ऋण लिया। समूह की मदद से बुटीक का कारोबार रफ्तार पकड़ने लगा।
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इसके बाद रीनू ने बावनखेड़ी ग्राम पंचायत में अपनी जमीन पर कान्हा नर्सरी शुरू की। यहां फूल, सजावटी पौधों के साथ आम की पौध भी उपलब्ध है।
सालाना चार से पांच लाख रुपये की कमाई
-आज रीनू बुटीक और नर्सरी दोनों के माध्यम से सालाना चार से पांच लाख रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। नर्सरी से ही उन्हें हर महीने 10 से 15 हजार रुपये की शुद्ध बचत होती है। अपने इस छोटे से व्यवसाय के दम पर रीनू ने पांच लोगों को रोजगार से जोड़ा है, जिसमें नर्सरी देखभाल के लिए दो मजदूर भी शामिल हैं। स्वावलंबन और लगन की मिसाल बनी रीनू देवी की यह कहानी आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।
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समूह से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरकार की योजनाओं से उनको जोड़ा जा रहा है। अपनी मेहनत से कई हजार महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर लखपति बन चुकी हैं। प्रशासन के द्वारा ऐसी महिलाओं का सहयोग किया जा रहा है।
-अश्वनी कुमार मिश्र, सीडीओ, अमरोहा