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Amroha News: बढ़ रहा गंगा का जलस्तर, बाढ़ चाैकियाें पर ताले
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अमरोहा। हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के 25 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। गंगा में जलस्तर बढ़ने के साथ ही इन गांवों में रहने वाले लोगों की धड़कनें भी बढ़ने लगी हैं। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ रहा है। गंगा कटान करने लगी है। बाढ़ की आहट के बाद भी प्रशासन गंभीर नहीं है। अभी तक बाढ़ चौकियों पर ताले लटके हुए हैं।
बीते वर्षों में बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंचने पर कई गांवों के ग्रामीणों के पलायन करने की नौबत आ गई थी। हर साल बाढ़ के दौरान इन गांवों में बीमारियां पनपने लगती हैं। बाढ़ की आशंका को देखते हुए लोगों के लिए आश्रय स्थलों की व्यवस्था तो दूर, अभी तक राहत और बचाव की कोई तैयारी भी नहीं की गई है। बिजनौर बैराज से छोड़े जाने के बाद गंगा उफान पर है। रामगंगा पोषक नहर का पानी काफी बढ़ा हुआ है। गंगा भी तेजी से कटान कर रही है। बाढ़ का पानी गंगा से सटे गांवों शीशोवाली, जाटोवाली, टीकोवाली, दारानगर, गंगानगर में खेतों की तरफ बढ़ने लगा है। पानी थोड़ा और बढ़ते ही ग्रामीणों की फसलें डूबने लगेंगी।
ग्रामीण बाढ़ को लेकर डरने लगे हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं इस बार भी बाढ़ उन पर कहर न बरपा दे। खास बात यह है कि पिछले साल बाढ़ का पानी इन गांवों में भर जाने के बाद दहशतजदा ग्रामीणों ने अपने पालतू पशुओं के संग पलायन करना शुरू कर दिया था। इस पर चेते प्रशासन ने आनन-फानन में गांव चकनवाला और पतेईएमन के स्कूलों में इनके लिए बाढ़ विस्थापित केंद्र (अस्थाई आश्रय स्थल) बनवाए थे। गांव वालों का कहना है कि यदि पहले ही प्रशासन उनके लिए कोई ठोस इंतजाम कर दे तो इस बार गांवों से पलायन रोका जा सकता है।
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बीते वर्षों में बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंचने पर कई गांवों के ग्रामीणों के पलायन करने की नौबत आ गई थी। हर साल बाढ़ के दौरान इन गांवों में बीमारियां पनपने लगती हैं। बाढ़ की आशंका को देखते हुए लोगों के लिए आश्रय स्थलों की व्यवस्था तो दूर, अभी तक राहत और बचाव की कोई तैयारी भी नहीं की गई है। बिजनौर बैराज से छोड़े जाने के बाद गंगा उफान पर है। रामगंगा पोषक नहर का पानी काफी बढ़ा हुआ है। गंगा भी तेजी से कटान कर रही है। बाढ़ का पानी गंगा से सटे गांवों शीशोवाली, जाटोवाली, टीकोवाली, दारानगर, गंगानगर में खेतों की तरफ बढ़ने लगा है। पानी थोड़ा और बढ़ते ही ग्रामीणों की फसलें डूबने लगेंगी।
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ग्रामीण बाढ़ को लेकर डरने लगे हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं इस बार भी बाढ़ उन पर कहर न बरपा दे। खास बात यह है कि पिछले साल बाढ़ का पानी इन गांवों में भर जाने के बाद दहशतजदा ग्रामीणों ने अपने पालतू पशुओं के संग पलायन करना शुरू कर दिया था। इस पर चेते प्रशासन ने आनन-फानन में गांव चकनवाला और पतेईएमन के स्कूलों में इनके लिए बाढ़ विस्थापित केंद्र (अस्थाई आश्रय स्थल) बनवाए थे। गांव वालों का कहना है कि यदि पहले ही प्रशासन उनके लिए कोई ठोस इंतजाम कर दे तो इस बार गांवों से पलायन रोका जा सकता है।
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