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गंगा का जलस्तर 20 सेंटीमीटर घटा लेकिन नहीं घटीं दुश्वारियां
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गजरौला के ओसीता जगदेवपुर गांव के खेतों में भरा बाढ़ का पानी।
- फोटो : JPNAGAR
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गजरौला। तिगरी में गंगा का जलस्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन खादर के इलाकों में खेतों और गांवों में पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों के सामने दुश्वारियों के पहाड़ खड़े हैं। पशुओं के लिए चारा आदि लाने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दहशत में जी रहे ग्रामीण रात जाग कर काट रहे हैं।
पहाड़ों के साथ ही मैदानी इलाकों में कई दिन से हो रही बारिश व बिजनौर बैराज से रोजाना गंगा में जल छोड़े के कारण गंगा उफान पर चल रही थी। बाढ़ का पानी गंगा के इस तरफ बसे गांवों के खेतों में भी भर गया था। फसलें जलमग्न हो गई थीं। लेकिन मंगलवार को गंगा का जल स्तर 200.40 से घटकर 200.20 मीटर हो गया। पर अभी बाढ़ का खतरा कम नहीं हुआ है। टापू में बसे गांवों के ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई है। उनके खेतों में अभी कई-कई फीट पानी खड़ा है। गांवों के खेतों को जाने वाले रास्ते भी पानी के आगोश में हैं। जिसके चलते पशुओं को चारा आदि लाने के लिए खेतों को जाने में दिक्कत सामने आ रही है। बाढ़ भले ही कुछ कम हो गई है, लेकिन ग्रामीणों की दिक्कत कम नहीं हुई है। बाढ़ के कारण दहशत में जी रहे ग्रामीण जागकर रात गुजार रहे हैं।
पानी में तैरते दिख रहे सांप
गजरौला। राम गंगा पोषक नहर व गंगा के टापू में बसे दारानगर, शीशों वाली, भुड्डी वाली गांव के ग्रामीणों को बाढ़ के कारण सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव निवासी मंगत सिंह, सचिन कुमार, संदीप आदि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण सांप, बिच्छू आदि जहरीले कीड़े बहकर आ गए हैं। खेतों पर जाते समय पेड़ों और चारे की फसलों पर सांप झूलते मिल रहे हैं। पानी भरे खेतों से चारा लाने में डसने का डर बना रहता है। संवाद
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तिगरी में मंगलवार को गंगा का जल स्तर 20 सेंटीमीटर कम हो गया। जिससे बाढ़ से प्रभावित लोगों ने कुछ राहत महसूस की है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता है कि गंगा में बाढ़ का पानी और भी कम होगा। बिजनौर बैराज से पानी छोड़ा गया तो और भी बढ़ सकता है।
-अनवार बहादुर खान जेई बाढ़ खंड तिगरी।
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पहाड़ों के साथ ही मैदानी इलाकों में कई दिन से हो रही बारिश व बिजनौर बैराज से रोजाना गंगा में जल छोड़े के कारण गंगा उफान पर चल रही थी। बाढ़ का पानी गंगा के इस तरफ बसे गांवों के खेतों में भी भर गया था। फसलें जलमग्न हो गई थीं। लेकिन मंगलवार को गंगा का जल स्तर 200.40 से घटकर 200.20 मीटर हो गया। पर अभी बाढ़ का खतरा कम नहीं हुआ है। टापू में बसे गांवों के ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई है। उनके खेतों में अभी कई-कई फीट पानी खड़ा है। गांवों के खेतों को जाने वाले रास्ते भी पानी के आगोश में हैं। जिसके चलते पशुओं को चारा आदि लाने के लिए खेतों को जाने में दिक्कत सामने आ रही है। बाढ़ भले ही कुछ कम हो गई है, लेकिन ग्रामीणों की दिक्कत कम नहीं हुई है। बाढ़ के कारण दहशत में जी रहे ग्रामीण जागकर रात गुजार रहे हैं।
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पानी में तैरते दिख रहे सांप
गजरौला। राम गंगा पोषक नहर व गंगा के टापू में बसे दारानगर, शीशों वाली, भुड्डी वाली गांव के ग्रामीणों को बाढ़ के कारण सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव निवासी मंगत सिंह, सचिन कुमार, संदीप आदि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण सांप, बिच्छू आदि जहरीले कीड़े बहकर आ गए हैं। खेतों पर जाते समय पेड़ों और चारे की फसलों पर सांप झूलते मिल रहे हैं। पानी भरे खेतों से चारा लाने में डसने का डर बना रहता है। संवाद
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तिगरी में मंगलवार को गंगा का जल स्तर 20 सेंटीमीटर कम हो गया। जिससे बाढ़ से प्रभावित लोगों ने कुछ राहत महसूस की है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता है कि गंगा में बाढ़ का पानी और भी कम होगा। बिजनौर बैराज से पानी छोड़ा गया तो और भी बढ़ सकता है।
-अनवार बहादुर खान जेई बाढ़ खंड तिगरी।