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Amroha News: धनौरा के गांव नाववाला में गंगा नदी का पानी घुसा
Fri, 11 Jul 2025 02:09 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 11 Jul 2025 02:09 AM IST
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मंडी धनौरा (अमरोहा)।
खादर क्षेत्र के गांव मुकारमपुर के मजरा नाववाला में गंगा का जलस्तर बढ़ने से दुश्वारियां होने लगी हैं। गंगा नदी का पानी गांव के भीतर घुस गया है। ग्रामीणों का कहना है कि चार दिन बाद भी प्रशासन के किसी भी अधिकारी व कर्मचारी ने उनकी सुध नहीं ली है। लोगों ने पशुओं के चारा लाने के लिए नाव की व्यवस्था कराने की मांग की है।
पहाड़ों पर हो रही बारिश से लगातार गंगा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। खादर क्षेत्र के गांवों से सटकर बह रही गंगा नदी का पानी खेतों में घुस गया है। हजारों बीघा भूमि जलमग्न हो गई है। मुकारमपुर निवासी ग्रामीण मुकेश ने बताया कि गांव से नाव वाला को जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले नाले में करीब 12 फीट से अधिक पानी है। ग्रामीण पानी की गहराई व तेज बहाव की वजह से पशुओं के लिए चारा भी लेने नहीं जा रहे हैं।
ग्राम प्रधान पति राजपाल सिंह ने बताया कि नाववाला में कलंदरों के डेरे में पानी में डूब गए हैं। हजारों बीघा भूमि जलमग्न हो गई है। लोग अपने पशुओं के लिए चारा लेने भी नहीं जा रहे हैं। उनका कहना है कि लेखपाल को स्थिति की सारी जानकारी है। लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। ग्रामीणों ने नाव की व्यवस्था की मांग की है। इस संबंध में एसडीएम विभा श्रीवास्तव का कहना है कि मौके पर राजस्वकर्मियों को भेजकर स्थिति का अवलोकन किया जाएगा। उसके अनुसार ही उचित व्यवस्था की जाएगी।
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बिजनौर बैराज से गंगा में छोड़ा गया 50 हजार क्यूसेक पानी
गजरौला। बिजनौर बैराज से गंगा में 50,085 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि, बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर स्तिर रहा। तिगरी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 202 मीटर से 2.10 मीटर दूर है। हालांकि, खेतों व रास्तों में भरे पानी के कारण ओसीता जगदेवपुर के लोग जान जोखिम में डालकर खेतों पर जाने को मजबूर हैं। उधर, टापू में बसे ग्रामीण आने जाने के लिए नाव पर निर्भर हो गए हैं।
बाढ़ खंड विभाग के जेई सुभाष चंद गहलौत ने बताया कि बृहस्पतिवार को बिजनौर बैराज से गंगा में 50,085 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि, बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर 199.90 मीटर दर्ज किया गया। एक दिन पहले भी गंगा का जलस्तर 199.90 मीटर ही था। जेई ने बताया कि खतरे के निशान 202 मीटर से 2.10 मीटर दूर है। हालांकि, टापू व खादर के गांवों के लोग बाढ़ के खतरे को लेकर चिंतित है। संवाद
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खादर क्षेत्र के गांव मुकारमपुर के मजरा नाववाला में गंगा का जलस्तर बढ़ने से दुश्वारियां होने लगी हैं। गंगा नदी का पानी गांव के भीतर घुस गया है। ग्रामीणों का कहना है कि चार दिन बाद भी प्रशासन के किसी भी अधिकारी व कर्मचारी ने उनकी सुध नहीं ली है। लोगों ने पशुओं के चारा लाने के लिए नाव की व्यवस्था कराने की मांग की है।
पहाड़ों पर हो रही बारिश से लगातार गंगा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। खादर क्षेत्र के गांवों से सटकर बह रही गंगा नदी का पानी खेतों में घुस गया है। हजारों बीघा भूमि जलमग्न हो गई है। मुकारमपुर निवासी ग्रामीण मुकेश ने बताया कि गांव से नाव वाला को जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले नाले में करीब 12 फीट से अधिक पानी है। ग्रामीण पानी की गहराई व तेज बहाव की वजह से पशुओं के लिए चारा भी लेने नहीं जा रहे हैं।
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ग्राम प्रधान पति राजपाल सिंह ने बताया कि नाववाला में कलंदरों के डेरे में पानी में डूब गए हैं। हजारों बीघा भूमि जलमग्न हो गई है। लोग अपने पशुओं के लिए चारा लेने भी नहीं जा रहे हैं। उनका कहना है कि लेखपाल को स्थिति की सारी जानकारी है। लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। ग्रामीणों ने नाव की व्यवस्था की मांग की है। इस संबंध में एसडीएम विभा श्रीवास्तव का कहना है कि मौके पर राजस्वकर्मियों को भेजकर स्थिति का अवलोकन किया जाएगा। उसके अनुसार ही उचित व्यवस्था की जाएगी।
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बिजनौर बैराज से गंगा में छोड़ा गया 50 हजार क्यूसेक पानी
गजरौला। बिजनौर बैराज से गंगा में 50,085 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि, बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर स्तिर रहा। तिगरी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 202 मीटर से 2.10 मीटर दूर है। हालांकि, खेतों व रास्तों में भरे पानी के कारण ओसीता जगदेवपुर के लोग जान जोखिम में डालकर खेतों पर जाने को मजबूर हैं। उधर, टापू में बसे ग्रामीण आने जाने के लिए नाव पर निर्भर हो गए हैं।
बाढ़ खंड विभाग के जेई सुभाष चंद गहलौत ने बताया कि बृहस्पतिवार को बिजनौर बैराज से गंगा में 50,085 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि, बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर 199.90 मीटर दर्ज किया गया। एक दिन पहले भी गंगा का जलस्तर 199.90 मीटर ही था। जेई ने बताया कि खतरे के निशान 202 मीटर से 2.10 मीटर दूर है। हालांकि, टापू व खादर के गांवों के लोग बाढ़ के खतरे को लेकर चिंतित है। संवाद