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Amroha News: किसान की पीटकर हत्या करने में दो सगे भाइयों समेत 4 को उम्रकैद
Thu, 13 Nov 2025 02:16 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 13 Nov 2025 02:16 AM IST
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अमरोहा। नौ साल पहले किसान अब्दुल रहीम की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या करने में कोर्ट ने दो सगे भाई समेत एक ही परिवार के चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही चारों दोषियों पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मुकदमे की सुनवाई के चलते एक आरोपी की मौत हो चुकी है।
यह घटना सैदनगली थानाक्षेत्र के गांव हरियाना में हुई थी। परिजनों के मुताबिक आठ सितंबर 2015 की शाम 5:30 बजे गांव निवासी अब्दुल गनी और उनके तहेरे भाई अब्दुल रहीम गांव की डेयरी पर दूध बेचकर लौट रहे थे। रास्ते में रंजिश को लेकर गांव के ही इसरार, फुरकान, मुख्तयार, आस मोहम्मद उर्फ नन्हे और दिलशाद ने रोककर लिया था और जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी थी और उनकी पिटाई भी की थी। सिर व पेट में गोली लगने से अब्दुल रहीम घायल हो गए थे।
शोर मचाने पर परिवार के लोग बचाने पहुंचे तो आरोपियों ने उन पर भी लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। पथराव भी किया गया था। बाद में आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। इसके बाद परिवार के लोगों ने गोली लगने से घायल अब्दुल रहीम को अस्पताल में भर्ती कराया था जहां डॉक्टरों ने अब्दुल रहीम को मृत घोषित कर दिया था। मामले में अब्दुल गनी ने इसरार, इसरार के बेटे फुरकान और मुख्तयार, आस मोहम्मद उर्फ नन्हे और दिलशाद के खिलाफ हत्या की कोशिश, मारपीट और हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लाठी-डंडों की पिटाई से मौत की पुष्टि हुई थी।
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पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल, पांचों जमानत पर जेल से बाहर थे। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंदर गर्ग पैरवी कर रहे थे। सुनवाई के दौरान इसरार की मौत हो चुकी है।
मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की और और साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर आरोपी फुरकान, मुख्तयार, आस मोहम्मद उर्फ नन्हे और दिलशाद को दोषी करार दिया। साथ ही चारों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
नौ साल में 120 तारीख और 67 पेज में फैसला
अमरोहा। अब्दुल रहीम हत्याकांड के मामले में कोर्ट में करीब नौ साल तक सुनवाई चली। इस दौरान करीब 120 तारीख पड़ीं। दोनों पक्षों के 14 लोगों ने अपनी गवाही कोर्ट के सामने पेश की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने 67 पेज में फैसला सुनाया है।
पीड़ित परिवार ने शुरुआती दौर में गोली मारकर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिटाई से मौत होने की पुष्टि हुई। दोषी पक्ष ने इस तर्क अपने बचाव में रखा लेकिन कोर्ट ने माना कि अब्दुल रहीम की हत्या तो हुई है भले ही गोली से नहीं लाठी-डंडों की पिटाई से हुई। परिवार की मजबूत पैरवी के चलते दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंदर गर्ग ने बताया कि दोषी फुरकान, मुख्तयार, आस मोहम्मद उर्फ नन्हे, दिलशाद का विवाद उनके के परिवार के यूनुस से था। दोषियों की यूनुस से जमीनी रंजिश चल रही थी। यूनुस की दोस्ती अब्दुल रहीम से थी जिसके चलते दोषियों का परिवार अब्दुल रहीम के परिवार से रंजिश रखता था। उन्होंने बताया कि मुकदमे में अब्दुल गनी ने घटना के समय अब्दुल रहीम को गोली मारने का दावा किया था, सिर और पेट में गोली लगने की वजह से मौत होने की बात कही।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। अब्दुल रहीम को दोषियों ने लाठी-डंडों से भी पीटा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अब्दुल रहीम की मौत की वजह लाठी-डंडों की पिटाई सामने आई। घटना के समय दोषियों ने अब्दुल रहीम के परिवार के शकील अहमद, साइना परवीन को भी बुरी तरह पीटा था। शुरुआत में हत्या की कोशिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन अब्दुल रहीम की मौत के बाद मुकदमें को हत्या की धाराओं में तरमीम किया गया था। सुनवाई के दौरान दोषियों के पक्ष में चार लोग गवाह बने जबकि अब्दुल रहीम के पक्ष में नौ लोगों ने गवाही दी थी।
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यह घटना सैदनगली थानाक्षेत्र के गांव हरियाना में हुई थी। परिजनों के मुताबिक आठ सितंबर 2015 की शाम 5:30 बजे गांव निवासी अब्दुल गनी और उनके तहेरे भाई अब्दुल रहीम गांव की डेयरी पर दूध बेचकर लौट रहे थे। रास्ते में रंजिश को लेकर गांव के ही इसरार, फुरकान, मुख्तयार, आस मोहम्मद उर्फ नन्हे और दिलशाद ने रोककर लिया था और जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी थी और उनकी पिटाई भी की थी। सिर व पेट में गोली लगने से अब्दुल रहीम घायल हो गए थे।
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शोर मचाने पर परिवार के लोग बचाने पहुंचे तो आरोपियों ने उन पर भी लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। पथराव भी किया गया था। बाद में आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। इसके बाद परिवार के लोगों ने गोली लगने से घायल अब्दुल रहीम को अस्पताल में भर्ती कराया था जहां डॉक्टरों ने अब्दुल रहीम को मृत घोषित कर दिया था। मामले में अब्दुल गनी ने इसरार, इसरार के बेटे फुरकान और मुख्तयार, आस मोहम्मद उर्फ नन्हे और दिलशाद के खिलाफ हत्या की कोशिश, मारपीट और हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लाठी-डंडों की पिटाई से मौत की पुष्टि हुई थी।
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पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल, पांचों जमानत पर जेल से बाहर थे। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंदर गर्ग पैरवी कर रहे थे। सुनवाई के दौरान इसरार की मौत हो चुकी है।
मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की और और साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर आरोपी फुरकान, मुख्तयार, आस मोहम्मद उर्फ नन्हे और दिलशाद को दोषी करार दिया। साथ ही चारों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
नौ साल में 120 तारीख और 67 पेज में फैसला
अमरोहा। अब्दुल रहीम हत्याकांड के मामले में कोर्ट में करीब नौ साल तक सुनवाई चली। इस दौरान करीब 120 तारीख पड़ीं। दोनों पक्षों के 14 लोगों ने अपनी गवाही कोर्ट के सामने पेश की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने 67 पेज में फैसला सुनाया है।
पीड़ित परिवार ने शुरुआती दौर में गोली मारकर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिटाई से मौत होने की पुष्टि हुई। दोषी पक्ष ने इस तर्क अपने बचाव में रखा लेकिन कोर्ट ने माना कि अब्दुल रहीम की हत्या तो हुई है भले ही गोली से नहीं लाठी-डंडों की पिटाई से हुई। परिवार की मजबूत पैरवी के चलते दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंदर गर्ग ने बताया कि दोषी फुरकान, मुख्तयार, आस मोहम्मद उर्फ नन्हे, दिलशाद का विवाद उनके के परिवार के यूनुस से था। दोषियों की यूनुस से जमीनी रंजिश चल रही थी। यूनुस की दोस्ती अब्दुल रहीम से थी जिसके चलते दोषियों का परिवार अब्दुल रहीम के परिवार से रंजिश रखता था। उन्होंने बताया कि मुकदमे में अब्दुल गनी ने घटना के समय अब्दुल रहीम को गोली मारने का दावा किया था, सिर और पेट में गोली लगने की वजह से मौत होने की बात कही।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। अब्दुल रहीम को दोषियों ने लाठी-डंडों से भी पीटा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अब्दुल रहीम की मौत की वजह लाठी-डंडों की पिटाई सामने आई। घटना के समय दोषियों ने अब्दुल रहीम के परिवार के शकील अहमद, साइना परवीन को भी बुरी तरह पीटा था। शुरुआत में हत्या की कोशिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन अब्दुल रहीम की मौत के बाद मुकदमें को हत्या की धाराओं में तरमीम किया गया था। सुनवाई के दौरान दोषियों के पक्ष में चार लोग गवाह बने जबकि अब्दुल रहीम के पक्ष में नौ लोगों ने गवाही दी थी।