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Amroha News: तीस साल से रियाजुद्दीन बना रहे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले
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गजरौला (अमरोहा)।
मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर कस्बा निवासी रियाजुद्दीन मोहल्ला बस्ती में चल रही रामलीला के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने में जुटे हैं। उनके साथ बेटा, भतीजा और पोता भी पुतले को अंतिम रूप देने में लगे हैं। वह 30 साल से पुतला बनाने का काम रहे हैं। पहले अपने पिता के साथ बनाते थे।
गजरौला के बस्ती मोहल्ले के अवंतिका पार्क में चल रही रामलीला में दशहरा के दिन रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतले दहन किए जाएंगे। रामलीला प्रबंध समिति ने तीनों के पुतले बनाने का जिम्मा रियाजुद्दीन को सौंपा है। वह बीते माह की 16 तारीख को मंडी समिति सामने अवंतिका धर्मशाला में पुतले बनाने के काम में लग गए। उनके साथ बेटा मोहम्मद सरताज, भतीजा नावेद और पोता आजम भी पुतले बनाने के काम में जुटा है। रावण का पुतला 35 फिट ऊंचा और नीचे का घाघरा आठ चौड़ा रहेगा। छह-छह फिट के पैर व हाथ बनाए जाएंगे।
धड़ की ऊंचाई 20 फिट रहेगी। कुंभकर्ण का पुतला 30 फिट और घाघरे की चौड़ाई पांच फिट रहेगी, जबकि मेघनाद का पुतला 25 फिट ऊंचा बनेगा। रियाजुद्दीन कहते हैं कि वह 30 साल से पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। पहले वह अपने पिता मोहम्मद शरीफ के साथ पुतले बनाते थे। उनसे ही काम सीखा। अब तीन दशक से अपना काम कर रहे हैं। सावन माह में हरिद्वार जाकर कांवड़ बनाने जाते हैं। अपने इस काम में उनको मानसिक रूप से संतुष्टि मिलती है। इससे जहां रोजगार मिल रहा है, वहीं आपसी भाईचारा भी बढ़ता है।
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मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर कस्बा निवासी रियाजुद्दीन मोहल्ला बस्ती में चल रही रामलीला के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने में जुटे हैं। उनके साथ बेटा, भतीजा और पोता भी पुतले को अंतिम रूप देने में लगे हैं। वह 30 साल से पुतला बनाने का काम रहे हैं। पहले अपने पिता के साथ बनाते थे।
गजरौला के बस्ती मोहल्ले के अवंतिका पार्क में चल रही रामलीला में दशहरा के दिन रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतले दहन किए जाएंगे। रामलीला प्रबंध समिति ने तीनों के पुतले बनाने का जिम्मा रियाजुद्दीन को सौंपा है। वह बीते माह की 16 तारीख को मंडी समिति सामने अवंतिका धर्मशाला में पुतले बनाने के काम में लग गए। उनके साथ बेटा मोहम्मद सरताज, भतीजा नावेद और पोता आजम भी पुतले बनाने के काम में जुटा है। रावण का पुतला 35 फिट ऊंचा और नीचे का घाघरा आठ चौड़ा रहेगा। छह-छह फिट के पैर व हाथ बनाए जाएंगे।
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धड़ की ऊंचाई 20 फिट रहेगी। कुंभकर्ण का पुतला 30 फिट और घाघरे की चौड़ाई पांच फिट रहेगी, जबकि मेघनाद का पुतला 25 फिट ऊंचा बनेगा। रियाजुद्दीन कहते हैं कि वह 30 साल से पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। पहले वह अपने पिता मोहम्मद शरीफ के साथ पुतले बनाते थे। उनसे ही काम सीखा। अब तीन दशक से अपना काम कर रहे हैं। सावन माह में हरिद्वार जाकर कांवड़ बनाने जाते हैं। अपने इस काम में उनको मानसिक रूप से संतुष्टि मिलती है। इससे जहां रोजगार मिल रहा है, वहीं आपसी भाईचारा भी बढ़ता है।
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