{"_id":"5e16249d8ebc3e879b77fe9c","slug":"farmer-protest-gajraula-news-mbd335646195","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं दी दूध कीआपूर्ति, सूने पड़े रहे गन्ना क्रय केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं दी दूध कीआपूर्ति, सूने पड़े रहे गन्ना क्रय केंद्र
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गजरौला(अमरोहा)। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के आह्वान पर ग्रामीण भारत बंद का असर ग्रामीण क्षेत्रों अधिक रहा। ग्रामीणों ने दूध की आपूर्ति नहीं दी। गन्ना क्रय केंद्र भी सूने पड़े रहे। किसान सब्जी और अनाज आदि बेचने मंडी भी नहीं गए। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पश्चिमी उप्र के अध्यक्ष चौधरी उपेंद्र सिंह पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ गांव-गांव घूमे और किसानों को सरकार की नीतियों से अवगत कराया। गांव खादगूजर में सरकार विरोधी नारे भी लगाएं।
बुधवार की सुबह से ही राकिमसं से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने गांवों में घूमकर बंद को सफल बनाने की अपीलें शुरू कर दी थीं। यही वजह रही कि गांव शहबाजपुर माफी, खादगूजर, होशंगपुर गूजर, शाहपुर नगलिया, बलदाना हीरा सिंह, ढ़किया भूड़, ककराला, सरकड़ा, पूठी, सदरपुर, सलारपुर, खेड़की भूड़, खेड़की खादर, भारापुर, मेहम्दी, मडैया लखमियां, आदि गांवों में किसानों ने दूध की आपूर्ति नहीं की। इन गांवों में बने दूध सेंटर पर स्टाफ हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। गजरौला में स्थित डेयरियों की गाड़ियां भी खाली लौट आईं। गन्ना क्रय केंद्रों पर भी किसान नहीं पहुंचे। गन्ना आपूर्ति न होने के कारण चीनी मिल धनौरा ने मिल क्लीनिंग की घोषणा कर दी। बाद में संगठन से जुड़े किसानों ने केएसएम लॉ कालेज खादगूजर के सामने प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों की आलोचना की। चौधरी उपेंद्र सिहं ने बंद में सहयोग करने वाले किसानों की सराहना की। मूलचंद सिंह, जगजीत सिंह, सरदार जोरावर सिंह, विरेन्द्र सिंह, नरेन्द्र सिंह, चमन सिंह, मेहंदी हसन, रामकिशन सिंह, रणवीर सिंह, सन्तवीर सिहं, डालचन्द, तेजवीर अलूना आदि रहे।
बैंकों पर बंदी का असर, बाजारों में रही बहार
गजरौला। भारत बंद का असर केवल बैंकों की बंदी तक ही सीमित रहा। दुकानें और बाजार रोजाना की तरह खुले रहे। हालांकि बैंकों के बंद होने से ग्राहकों परेशानी झेलनी पड़ी। लोग रुपयों की निकासी के लिए एटीएम पर डटे नजर आए।
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बुधवार को भारत बंद का आह्वान जनपद में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पश्चिमी उप्र अध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने किया था। इसके लिए जिलाध्यक्ष जोरावर सिंह समेत संगठन के तमाम पदाधिकारी और कार्यकर्ता गांवों में कई दिनों से बैठकें कर जनसंपर्क करने में लगे हुए थे। किसानों से भी आठ जनवरी को अपनी फसलें और दूध आदि नहीं बेचने की अपील की गई थी। इसका आंशिक असर यहां देखने को मिला। हड़ताल में ट्रेड यूनियनों के भी शामिल होने के कारण बैंकों पर इसका असर पड़ा। इलाहाबाद बैंक, पंजाब नेशनल बैंक समेत कई बैंकों में ताले लगे रहे।
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बुधवार की सुबह से ही राकिमसं से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने गांवों में घूमकर बंद को सफल बनाने की अपीलें शुरू कर दी थीं। यही वजह रही कि गांव शहबाजपुर माफी, खादगूजर, होशंगपुर गूजर, शाहपुर नगलिया, बलदाना हीरा सिंह, ढ़किया भूड़, ककराला, सरकड़ा, पूठी, सदरपुर, सलारपुर, खेड़की भूड़, खेड़की खादर, भारापुर, मेहम्दी, मडैया लखमियां, आदि गांवों में किसानों ने दूध की आपूर्ति नहीं की। इन गांवों में बने दूध सेंटर पर स्टाफ हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। गजरौला में स्थित डेयरियों की गाड़ियां भी खाली लौट आईं। गन्ना क्रय केंद्रों पर भी किसान नहीं पहुंचे। गन्ना आपूर्ति न होने के कारण चीनी मिल धनौरा ने मिल क्लीनिंग की घोषणा कर दी। बाद में संगठन से जुड़े किसानों ने केएसएम लॉ कालेज खादगूजर के सामने प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों की आलोचना की। चौधरी उपेंद्र सिहं ने बंद में सहयोग करने वाले किसानों की सराहना की। मूलचंद सिंह, जगजीत सिंह, सरदार जोरावर सिंह, विरेन्द्र सिंह, नरेन्द्र सिंह, चमन सिंह, मेहंदी हसन, रामकिशन सिंह, रणवीर सिंह, सन्तवीर सिहं, डालचन्द, तेजवीर अलूना आदि रहे।
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बैंकों पर बंदी का असर, बाजारों में रही बहार
गजरौला। भारत बंद का असर केवल बैंकों की बंदी तक ही सीमित रहा। दुकानें और बाजार रोजाना की तरह खुले रहे। हालांकि बैंकों के बंद होने से ग्राहकों परेशानी झेलनी पड़ी। लोग रुपयों की निकासी के लिए एटीएम पर डटे नजर आए।
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बुधवार को भारत बंद का आह्वान जनपद में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पश्चिमी उप्र अध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने किया था। इसके लिए जिलाध्यक्ष जोरावर सिंह समेत संगठन के तमाम पदाधिकारी और कार्यकर्ता गांवों में कई दिनों से बैठकें कर जनसंपर्क करने में लगे हुए थे। किसानों से भी आठ जनवरी को अपनी फसलें और दूध आदि नहीं बेचने की अपील की गई थी। इसका आंशिक असर यहां देखने को मिला। हड़ताल में ट्रेड यूनियनों के भी शामिल होने के कारण बैंकों पर इसका असर पड़ा। इलाहाबाद बैंक, पंजाब नेशनल बैंक समेत कई बैंकों में ताले लगे रहे।