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Amroha News: परिजन बोले- बेचे नहीं थे, मुफलिसी में काम के लिए भेजे थे बच्चे

Tue, 09 Sep 2025 02:46 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Tue, 09 Sep 2025 02:46 AM IST
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Family said- they did not sell it, they sent the children to work in poverty
अमरोहा। देहात थानाक्षेत्र के गांव चक कालीलेट गांव में मिले चार बाल श्रमिकों के परिजन सोमवार को अमरोहा पहुंचे। बच्चों के पिता ने उनको बेचने से इनकार किया है। परिजनों का कहना है कि वह मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। मुफलिसी के चलते ही बच्चों को काम के लिए भेजा दिया था। इसके बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बाल कल्याण समिति ने बच्चों को उनके पिता के सुपुर्द कर दिया।
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बृहस्पतिवार को बाल कल्याण समिति ने एक एनजीओ की सूचना पर चार बच्चों को चक कालीलेट गांव से बरामद किया था। इनमें दो बच्चे लखीमपुर खीरी व दो बहराइच के रहने वाले हैं। चारों बच्चों को बाल गृह मुरादाबाद भेजा गया था। शुरू में बच्चों को बेचे जाने की बात सामने आई थी लेकिन बच्चों ने खुद ही इस बात का खंडन किया था। चारों बच्चों की उम्र 14 से 16 साल के बीच की है। बेटे को लेने के लिए पहुंचे लखीमपुर खीरी निवासी व्यक्ति ने कहा कि उनका यह इकलौता बेटा है।
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घर के हालात बेहद ठीक नहीं हैं। खेती की बीसा भर भी जमीन नहीं है। मजदूरी ही परिवार के पालन पोषण का एक सहारा है। परिवार चलाने में कुछ हाथ बटाने के लिए ही मजबूरी में बेटे को यहां काम के लिए भेजा था। बेचे जाने की बात सही नहीं है। जिस व्यक्ति मुकेश के सहारे बच्चों को यहां भेजा था, वह उनकी पत्नी का मौसेरा भाई है। इसी गांव के परिवार के दूसरे व्यक्ति ने भी इसी बात को दोहराया। उन्होंने कहा कि दो बेटे हैं, परिवार की गुजर-बसर ठीक से हो, इसीलिए बड़े बेटे को काम के लिए भेज दिया था।
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बच्चों को लेकर आने वाले को रिश्तेदार बताया
बहराइच के एक गांव निवासी व्यक्ति ने बताया कि मुकेश उनका मुमेरा भाई है। उसी के द्वारा बच्चों को काम के लिए भेजा था। इसी गांव निवासी दूसरे व्यक्ति ने बताया कि परिवार में एक बेटी व तीन बेटे हैं। मजदूरी के अलावा कमाई का कोई दूसरा साधन नहीं है। घर के खर्च में कुछ हाथ बट सके, इसीलिए 15 वर्षीय बेटे को काम के लिए भेज दिया था। चार माह पहले यही लड़का शुरू में यहां काम लिए पहुंचा था जिसने अपने परिवार को दस हजार रुपये भी भेजे थे। दो माह की रकम अभी भी बकाया बताई जा रही है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अतुलेश भारद्वाज ने बताया कि जरूरी कार्रवाई पूरी करने के बाद बच्चों को उनके पिता की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
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