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Amroha News: स्टे के बाद भी अपहरण के आरोपी को गिरफ्तार करने में फंसे दरोगा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jul 2024 04:04 AM IST
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Even after the stay, the policeman caught in arresting the kidnapping accused
अमरोहा। अपहरण, धमकी व गाली-गलौज के मुकदमे में हाईकोर्ट से स्टे होने के बाद भी आरोपी को गिरफ्तार करने में विवेचक फंस गए हैं। इतना ही नहीं विवेचक ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने की धाराओं की बढ़ोतरी करके न्यायालय से रिमांड भी स्वीकृत करा लिया। हकीकत सामने आने पर न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर उपेक्षा करने के मामले में विवेचक के खिलाफ कार्रवाई करके एसपी से एक महीने के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
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ये मामला डिडौली कोतवाली से जुड़ा है। एक किसान ने मोहम्मद आलम पर अपनी 19 वर्षीय बेटी को शादी के करने के उद्देश्य से बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। मुरादाबाद के किसी दफ्तर में हस्ताक्षर करवाने और युवती से गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी का भी आरोप था। आरोपी मोहम्मद आलम मुकदमे में गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से स्टे ले आया था। जिसकी एक प्रतिलिपि विवेचक को भी दी गई थी। लेकिन, विवेचक अशोक कुमार ने मोहम्मद आलम को थाने बुलाया और गिरफ्तार कर लिया।
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मोहम्मद आलम ने गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से स्टे होने की बात बताई, लेकिन विवेचक ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। इतना ही नहीं विवेचक ने हाईकोर्ट के आदेश को छिपाते हुए मुकदमे में धोखाधड़ी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं की बढ़ोतरी की और 27 जून 2014 को आरोपी मोहम्मद आलम को मुख्य मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश कर 10 जुलाई तक रिमांड स्वीकृत करा लिया। लेकिन 4 जुलाई 2024 को आरोपी मोहम्मद आलम की ओर से न्यायालय में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया। जिसके आधार न्यायालय ने रिमांड को निरस्त कर दिया। साथ ही आरोपी मोहम्मद आलम को अवैध हिरासत से मुक्त कराने व रिमांड होने की वजह से उसे 20-20 हजार रुपये के प्रतिभूति व सामान धनराशि का बंधनपत्र दाखिल करने पर रिहा कर दिया।
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स्पष्टीकरण का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका विवेचक
मामले में न्यायालय ने विवेचक से पूरे मामले में स्पष्टीकरण तलब किया, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। प्रकरण को गंभीरता से लेकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमपाल सिंह ने विवेचक अशोक कुमार को हाईकोर्ट के आदेश की जान बूझकर उपेक्षा करते हुए आरोपी मोहम्मद आलम को गिरफ्तार कर अवैध हिरासत में रखने का दोषी पाया। इतना ही नहीं न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए विवेचक पर मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने एवं न्यायालय के साथ छल करके आरोपी को हानि पहुंचाने के लिए रिमांड स्वीकृत कराने की बात कही। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि विवेचक अशोक कुमार का कृत्य सद्भाविक प्रतीत नहीं होता है। इसलिए न्यायालय ने एसपी को विवेचक अशोक कुमार के खिलाफ जांच कराकर एक महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

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ऐसे स्टे रोज देखता हूं.. आज तुम्हें जेल भेज कर रहूंगा
आरोपी मोहम्मद आलम ने अपने शपथपत्र में कहा उसने अपने मुकदमे में 20 मई 2024 को स्टे लिया था। जिसकी एक कॉपी विवेचक अशोक कुमार को दी गई थी। लेकिन 27 जून को विवेचक ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान मोहम्मद आलम ने हाईकोर्ट के स्टे का हवाला दिया तो विवेचक अशोक कुमार ने कहा कि ऐसे स्टेट रोज देखता हूं..आज तुम्हें जेल भेजकर रखूंगा। इसके बाद विवेचक ने आरोपी मोहम्मद आलम को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया।
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