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Amroha News: पहले कंपनी ने नहीं दिया क्लेम, अब चुकाने होंगे दो लाख
Thu, 30 Oct 2025 01:41 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 30 Oct 2025 01:41 AM IST
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अमरोहा। बीमा पॉलिसी लेने के छह महीने बाद मजदूर की सीने में दर्द उठने के बाद मौत हो गई। मृतक की पत्नी ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो उन्होंने निरस्त कर दिया। उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को क्लेम के दो लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक व मानसिक पीड़ा और वाद व्यय में के रूप में 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पूरी धनराशि एक माह में अदा करनी होगी।
जोया के मोहल्ला चौधरियान निवासी आसिफ मजदूरी करता था। परिजनों के मुताबिक आसिफ ने 18 जून 2022 को 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम का भुगतान करके पॉलिसी ली थी जिसकी बीमा धनराशि दो लाख रुपये थी। यह पॉलिसी 17 जून 2023 तक मान्य थी लेकिन सात सितंबर 2022 को आसिफ की घर पर ही सीने में दर्द उठने के कारण मौत हो गई। इसके बाद 20 मार्च 2023 को मृतक आसिफ की पत्नी भूरी ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा लेकिन 24 मई 2023 को कंपनी ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि आवेदन में शामिल मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी है जबकि भूरी के द्वारा सभी दस्तावेज असली प्रस्तुत किए गए थे।
इस पर भूरी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। प्रकरण को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को गलत पाया। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने बीमा कंपनी को क्लेम के दो लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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जोया के मोहल्ला चौधरियान निवासी आसिफ मजदूरी करता था। परिजनों के मुताबिक आसिफ ने 18 जून 2022 को 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम का भुगतान करके पॉलिसी ली थी जिसकी बीमा धनराशि दो लाख रुपये थी। यह पॉलिसी 17 जून 2023 तक मान्य थी लेकिन सात सितंबर 2022 को आसिफ की घर पर ही सीने में दर्द उठने के कारण मौत हो गई। इसके बाद 20 मार्च 2023 को मृतक आसिफ की पत्नी भूरी ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा लेकिन 24 मई 2023 को कंपनी ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि आवेदन में शामिल मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी है जबकि भूरी के द्वारा सभी दस्तावेज असली प्रस्तुत किए गए थे।
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इस पर भूरी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। प्रकरण को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को गलत पाया। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने बीमा कंपनी को क्लेम के दो लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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