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बीमार भाई को लेेकर दर-दर भटका, नहीं पसीजे डाक्टर
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 25 Nov 2016 12:13 AM IST
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कैलसा में कांठ थाने के पैगंबरपुर गांव निवासी मजदूर ओमप्रकाश की बीमारी पर नोटबंदी कहर बन कर टूटी। एक ओर नोट नहीं बदले जाने से परिवार तंगहाली में जीवन काट रहा था, वहीं धरती के भगवान कहे जाने वाले डाक्टरों ने भी मुसीबत में मुंह मोड़ लिया।
रात भर भाई उसको लेकर दर-दर भटका, मगर पुराने नोट की वजह से किसी ने गेट नहीं खोला। इसी दौरान मौत हो गई तो लाश का क्रियाकर्म करना मुश्किल हो गया। चंदा कर रुपये उपलब्ध कराए गए, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार हो सका।
अमरोहा शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित पैगंबरपुर गांव निवासी ओमप्रकाश (40) पुत्र परम सिंह की शादी नहीं हुई थी। भाई सत्यप्रकाश के साथ रहता था। मेहनत मजदूरी कर खर्च चलाता था। करीब महीना भर पहले वह बुखार की चपेट में आ गया।
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इसके बाद तबियत ठीक नहीं हो पाई। इलाज भी चलता रहा, किन्तु सुधार नहीं हो पाया। 500 व 1000 के नोट बंद होने से परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। अच्छे चिकित्सक से परिजन नोट नहीं बदले जाने की वजह से इलाज नहीं करा पा रहे थे। बैंक में रुपये नहीं आ रहे थे। रोज लाइन में लगकर घर लौट रहे थे।
बुधवार रात उसकी हालत बिगड़ गई। तड़पते देखकर भाई का दिल दुखने लगा। बचाने के लिए वह बीमार भाई को लेकर अमरोहा नगर के प्राइवेट चिकित्सकों की ओर दौड़ पड़ा। प्रत्येक का गेट पीटा, लेकिन स्टाफ ने 500 व 1000 के पुराने नोट नहीं लेने की बात कही।
एडमिट करने से ही इंकार कर दिया। डाक्टरों का ये रवैया देख भाई रोने बिलखने लगा। हाथों में भाई का दम निकला, लाश से लिपट-लिपटकर रोया और फिर शव को घर ले गया। सुबह गांव की प्रथमा बैंक पर रुपये निकालने के लिए गया तो वहां पर करेंसी नहीं थी। पूरी स्थिति से वाकिफ स्टाफ ने हमदर्दी दिखाई। बैंक प्रबंधक ने एक हजार रुपये दिए, जिसके बाद ग्रामीणों ने भी सहयोग किया। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बाबू खां ने भी आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार को मुहैया कराई। तब जाकर अंतिम संस्कार हो सका।
पुराने नोट नर्सिंग होम में नहीं लिए जा रहे है, सिर्फ मेडिकल स्टोर पर चला सकते हैं, अगर ऐसा कोई मामला है तो मानवीय दृष्टि के हिसाब से डाक्टर को मरीज एडमिट कर लेना चाहिए, डाक्टर ने मरीज को भर्ती क्यों नहीं किया, इसके बारे में वही बता सकता है।
डा. शकील, अध्यक्ष, आईएमए।
इस तरह का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है, यदि कोई बीमार है, बैंक से पैसे नहीं निकल रहे हैं, इलाज नहीं मिल रहा है, तो वह मुझसे संपर्क कर सकते हैं, ऐसे लोगों की हर संभव मदद की जाएगी।
वेदप्रकाश, जिलाधिकारी।
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रात भर भाई उसको लेकर दर-दर भटका, मगर पुराने नोट की वजह से किसी ने गेट नहीं खोला। इसी दौरान मौत हो गई तो लाश का क्रियाकर्म करना मुश्किल हो गया। चंदा कर रुपये उपलब्ध कराए गए, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार हो सका।
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अमरोहा शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित पैगंबरपुर गांव निवासी ओमप्रकाश (40) पुत्र परम सिंह की शादी नहीं हुई थी। भाई सत्यप्रकाश के साथ रहता था। मेहनत मजदूरी कर खर्च चलाता था। करीब महीना भर पहले वह बुखार की चपेट में आ गया।
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इसके बाद तबियत ठीक नहीं हो पाई। इलाज भी चलता रहा, किन्तु सुधार नहीं हो पाया। 500 व 1000 के नोट बंद होने से परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। अच्छे चिकित्सक से परिजन नोट नहीं बदले जाने की वजह से इलाज नहीं करा पा रहे थे। बैंक में रुपये नहीं आ रहे थे। रोज लाइन में लगकर घर लौट रहे थे।
बुधवार रात उसकी हालत बिगड़ गई। तड़पते देखकर भाई का दिल दुखने लगा। बचाने के लिए वह बीमार भाई को लेकर अमरोहा नगर के प्राइवेट चिकित्सकों की ओर दौड़ पड़ा। प्रत्येक का गेट पीटा, लेकिन स्टाफ ने 500 व 1000 के पुराने नोट नहीं लेने की बात कही।
एडमिट करने से ही इंकार कर दिया। डाक्टरों का ये रवैया देख भाई रोने बिलखने लगा। हाथों में भाई का दम निकला, लाश से लिपट-लिपटकर रोया और फिर शव को घर ले गया। सुबह गांव की प्रथमा बैंक पर रुपये निकालने के लिए गया तो वहां पर करेंसी नहीं थी। पूरी स्थिति से वाकिफ स्टाफ ने हमदर्दी दिखाई। बैंक प्रबंधक ने एक हजार रुपये दिए, जिसके बाद ग्रामीणों ने भी सहयोग किया। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बाबू खां ने भी आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार को मुहैया कराई। तब जाकर अंतिम संस्कार हो सका।
पुराने नोट नर्सिंग होम में नहीं लिए जा रहे है, सिर्फ मेडिकल स्टोर पर चला सकते हैं, अगर ऐसा कोई मामला है तो मानवीय दृष्टि के हिसाब से डाक्टर को मरीज एडमिट कर लेना चाहिए, डाक्टर ने मरीज को भर्ती क्यों नहीं किया, इसके बारे में वही बता सकता है।
डा. शकील, अध्यक्ष, आईएमए।
इस तरह का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है, यदि कोई बीमार है, बैंक से पैसे नहीं निकल रहे हैं, इलाज नहीं मिल रहा है, तो वह मुझसे संपर्क कर सकते हैं, ऐसे लोगों की हर संभव मदद की जाएगी।
वेदप्रकाश, जिलाधिकारी।