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कोरोना की जंग में घर-परिवार भूले डाक्टर, बच्चों से बना ली दूरी
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अमरोहा। लॉकडाउन और अनलॉक के करीब 95 दिन बीत चुके हैं। लेकिन जिले में चार डॉक्टर दंपति इस मुश्किल की घड़ी में मरीजों की सेवा में जुटा है। इस लड़ाई में वह घर परिवार भूल गए हैं। एक दूसरे का भी ख्याल नहीं रख पाते हैं। बीमारी के डर से अधिकतर समय परिवार से दूर बिता रहे हैं।
आज विश्व डॉक्टर्स दिवस है। हर साल इस दिन डॉक्टरों का सम्मान होता है। इस साल कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को खतरे में डाल दिया है। कोरोना को हराने के लिए हमारे डॉक्टर अपने घर-परिवार तक को भूले हुए हैं। छोटे-छोटे बच्चों से नहीं मिल पा रहे हैं। बारह से चौदह घंटे की ड्यूटी खुशी-खुशी कर रहे हैं। डॉक्टर घर से निकलते हैं, फिर कोई ठिकाना नहीं घर कब लौटेंगे। मरीजों को देखने, व्यवस्थाओं को लेकर पूरा दिन लग जाता है। देर सवेरे घर पहुंचते हैं। उनके जरिए घर में कोई संक्रमित न हो, इसलिए कई चिकित्सकों ने अपना अलग कमरा बना लिया है।
पति रात में देेखते थे आइसोलेशन वार्ड, खुद दिन में पैथोलाजी
अमरोहा। कोरोना काल में जिला अस्पताल की पैथोलॉजिस्ट डा. प्रतिभा दिन में पैथोलाजी संभालती है। जबकि उनके पति रेडियोलॉजिस्ट डा. कुलदीप रात में आइसोलेशन वार्ड देखते थे। कोरोना ड्यूटी के दौरान काफी दिन तक दोनों घर पर नहीं मिल सके। डा. प्रतिभा बताती हैं कि डा. कुलदीप की बीच में डिस्क प्राब्लम हो गई थी। लेकिन ड्यूटी के चलते उनकी देखरेख नहीं कर पाई। लॉकडाउन में आया बेटा ही उनकी देखभाल करता रहा।
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ड्यूटी के दौरान बच्चों बना ली दूरी
अमरोहा। डॉ. प्रांजल मिश्रा जिला अस्पताल में एनसीडी इंचार्ज हैं। जबकि उनकी पत्नी डॉ अंकिता चर्तुवेदी प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ है। डॉ प्रांजल कोविड में ड्यूटी करने के बाद फिलहॉल ओपीडी देख रहे हैं। जबकि उनके पत्नी पर ऑपरेशन की बड़ी जिम्मेदारी है। दंपत्ति डॉक्टर बच्चों से दूर रहकर लोगों की जीवन दे रहे हैं। देर में घर पहुंचते है, कोरोना से बचाव और खुद की सहूलियत के पूरे प्रयास करते हैं। डर की वजह से अधिकतर समय बच्चों से दूर बिताना पड़ता है।
चौबीस घंटे संभाल रहे अपनी जिम्मेदारी
अमरोहा। डॉ रामनिवास सिंह जिला अस्पताल में सीएमएस हैं। उनकी पत्नी डॉ पुष्पलता शमी जिला अस्पताल के महिला अस्पताल की इंचार्ज हैं। दोनों पति-पत्नी के ऊपर स्वास्थ की बड़ी जिम्मेदारियां हैं। कोविड महामारी की इस मुश्किल घड़ी में मरीजों की सेवा में जुटे हैं। वर्तमान हालात और डॉक्टरों की कमी के चलते दोनों पति-पत्नी चौबीसों घंटे अस्पताल में रहते हैं। उन्हें घर जाने तक का समय नहीं मिल पाता है।
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आज विश्व डॉक्टर्स दिवस है। हर साल इस दिन डॉक्टरों का सम्मान होता है। इस साल कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को खतरे में डाल दिया है। कोरोना को हराने के लिए हमारे डॉक्टर अपने घर-परिवार तक को भूले हुए हैं। छोटे-छोटे बच्चों से नहीं मिल पा रहे हैं। बारह से चौदह घंटे की ड्यूटी खुशी-खुशी कर रहे हैं। डॉक्टर घर से निकलते हैं, फिर कोई ठिकाना नहीं घर कब लौटेंगे। मरीजों को देखने, व्यवस्थाओं को लेकर पूरा दिन लग जाता है। देर सवेरे घर पहुंचते हैं। उनके जरिए घर में कोई संक्रमित न हो, इसलिए कई चिकित्सकों ने अपना अलग कमरा बना लिया है।
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पति रात में देेखते थे आइसोलेशन वार्ड, खुद दिन में पैथोलाजी
अमरोहा। कोरोना काल में जिला अस्पताल की पैथोलॉजिस्ट डा. प्रतिभा दिन में पैथोलाजी संभालती है। जबकि उनके पति रेडियोलॉजिस्ट डा. कुलदीप रात में आइसोलेशन वार्ड देखते थे। कोरोना ड्यूटी के दौरान काफी दिन तक दोनों घर पर नहीं मिल सके। डा. प्रतिभा बताती हैं कि डा. कुलदीप की बीच में डिस्क प्राब्लम हो गई थी। लेकिन ड्यूटी के चलते उनकी देखरेख नहीं कर पाई। लॉकडाउन में आया बेटा ही उनकी देखभाल करता रहा।
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ड्यूटी के दौरान बच्चों बना ली दूरी
अमरोहा। डॉ. प्रांजल मिश्रा जिला अस्पताल में एनसीडी इंचार्ज हैं। जबकि उनकी पत्नी डॉ अंकिता चर्तुवेदी प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ है। डॉ प्रांजल कोविड में ड्यूटी करने के बाद फिलहॉल ओपीडी देख रहे हैं। जबकि उनके पत्नी पर ऑपरेशन की बड़ी जिम्मेदारी है। दंपत्ति डॉक्टर बच्चों से दूर रहकर लोगों की जीवन दे रहे हैं। देर में घर पहुंचते है, कोरोना से बचाव और खुद की सहूलियत के पूरे प्रयास करते हैं। डर की वजह से अधिकतर समय बच्चों से दूर बिताना पड़ता है।
चौबीस घंटे संभाल रहे अपनी जिम्मेदारी
अमरोहा। डॉ रामनिवास सिंह जिला अस्पताल में सीएमएस हैं। उनकी पत्नी डॉ पुष्पलता शमी जिला अस्पताल के महिला अस्पताल की इंचार्ज हैं। दोनों पति-पत्नी के ऊपर स्वास्थ की बड़ी जिम्मेदारियां हैं। कोविड महामारी की इस मुश्किल घड़ी में मरीजों की सेवा में जुटे हैं। वर्तमान हालात और डॉक्टरों की कमी के चलते दोनों पति-पत्नी चौबीसों घंटे अस्पताल में रहते हैं। उन्हें घर जाने तक का समय नहीं मिल पाता है।