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Amroha News: डेंगू-बुखार बन रहा काल, बेपटरी हैं जिले की स्वास्थ्य सेवाएं
Thu, 28 Sep 2023 01:33 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 28 Sep 2023 01:33 AM IST
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अमरोहा। बुखार के साथ डेंगू ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हर दिन डेंगू आशंकित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन जिले की सीएचसी में संसाधनों का अभाव व उपचार की कमी आड़े आ रही है। मरीजों को डेंगू है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए जांच भी नहीं हो पा रही है। कहीं मशीनें हैं तो कहीं डॉक्टर नहीं हैं। उधर, खास बात यह है कि जिले की सीएचसी में डेंगू वार्ड तो बना दिए गए हैं, लेकिन वहां ताले लटके हुए हैं। वजह, सीएचसी आने वाले डेंगू आशंकित मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पताल में इलाज कराने की बात कहकर भेज दिया जा रहा है। यह तब है, जब इन दिनों डेंगू चरम पर है और लोगों की जान भी जा रही हैं। मंगलवार को भी जिले में नौ डेंगू के मरीज मिले थे। जिले की हसनपुर, गजरौला, ढबारसी आदि सीएचसी में बुधवार को पड़ताल की गई तो स्थिति बदहाल मिली।
दोपहर साढ़े बारह बजे
हसनपुर सीएचसी में डेंगू वार्ड पर लटका ताला
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसनपुर में यूं तो डेंगू वार्ड बना हुआ है, लेकिन अक्सर इस वार्ड में ताला लगा रहता है। रोजाना अस्पताल में करीब 270 से 300 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें चालीस प्रतिशत मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, मलेरिया, टाइफाइड जैसे रोगों के मिल रहे हैं। डेंगू की भी जांच की जाती है। लेकिन जो जांच में पॉजीटिव मिलते हैं, उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर ध्रुवेंद्र सिंह का कहना है अस्पताल में डेंगू वार्ड बना है, लेकिन कोई मरीज भर्ती नहीं है।
दोपहर बारह बजे
नहीं बना डेंगू वार्ड, न हो रही जांच
ढबारसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाली नजर आई है। यहां लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। जिसके चलते यहां मरीजाें की जांच नहीं हुई। बुधवार को दोपहर बाद तक मरीज बिना जांच कराए घर लौटे। यहां डेंगू वार्ड तो बना है, लेकिन वहां किसी तरह कोई मरीज भर्ती नहीं था। वजह, जांच व अन्य सुविधाएं न होने के चलते मरीज मजबूरन जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। चिकित्सा प्रभारी डॉ. दीपशिखा ने बताया कि पिछले कई महीने से लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। उधर, रहरा सीएचसी में डेंगू वार्ड ही नहीं बना है। वहीं, यहां मरीजाें के खून की जांच भी नहीं हुई। वजह, यहां जांच के लिए मशीनें तो हैं, लेकिन चिकित्सक तैनात नहीं हैं।
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दोपहर डेढ़ बजे
खाली रहा गजरौला सीएचसी का डेंगू वार्ड
गजरौला के सीएचसी में डेंगू के इलाज के लिए बीते महीने दो बेड का वार्ड बनाया गया। जो बुधवार को दोपहर एक बजे तक खाली नजर आया। पता करने पर जानकारी हुई कि यहां गंभीर मरीजों को इलाज नहीं किया जाता है। आशंकित को मात्र ड्रिप या प्राथमिक उपचार कर वापस भेज दिया जाता है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि अस्पताल में एनएस-1 की जांच की सुविधा उपलब्ध है। जिसे जरूरत पड़ती है, उसी मरीज को ड्रिप दी जाती है।
दोपहर डेढ़ बजे
गंभीर रोगियों को भेजा जा रहा जिला अस्पताल
मंडी धनौरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डेढ़ बजे तक डेंगू आशंकित दो रोगी भर्ती थे। यहां डेंगू मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। उन्हें रेफर किया जाता है। अधीक्षक डॉक्टर मनदीप कुमार ने बताया कि स्थानीय अस्पताल में एन एस-1 जांच की सुविधा है। आशंकित होने पर रोगियों को ड्रिप लगाकर इलाज शुरू किया गया है। गंभीर रोगियों को ही जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
सीएचसी पर रेपिड जांच की सुविधा है। सीएचसी में भी डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। फिलहाल डेंगू आशंकित मरीजों को ही सीएचसी में भर्ती कराया जा रहा है। डेंगू का एलाइजा टेस्ट जिला मुख्यालय पर ही होता है। एलाइजा जांच में निकले डेंगू पॉजीटिव को जिला अस्पताल में भर्ती किया जाता है। वहीं, जहां-जहां डेंगू वार्ड में ताले लगे हैं, वहां टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। डेंगू बुखार को लेकर विभाग अलर्ट है। डॉ. सीपी सिंह, सीएमओ
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दोपहर साढ़े बारह बजे
हसनपुर सीएचसी में डेंगू वार्ड पर लटका ताला
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसनपुर में यूं तो डेंगू वार्ड बना हुआ है, लेकिन अक्सर इस वार्ड में ताला लगा रहता है। रोजाना अस्पताल में करीब 270 से 300 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें चालीस प्रतिशत मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, मलेरिया, टाइफाइड जैसे रोगों के मिल रहे हैं। डेंगू की भी जांच की जाती है। लेकिन जो जांच में पॉजीटिव मिलते हैं, उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर ध्रुवेंद्र सिंह का कहना है अस्पताल में डेंगू वार्ड बना है, लेकिन कोई मरीज भर्ती नहीं है।
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दोपहर बारह बजे
नहीं बना डेंगू वार्ड, न हो रही जांच
ढबारसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाली नजर आई है। यहां लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। जिसके चलते यहां मरीजाें की जांच नहीं हुई। बुधवार को दोपहर बाद तक मरीज बिना जांच कराए घर लौटे। यहां डेंगू वार्ड तो बना है, लेकिन वहां किसी तरह कोई मरीज भर्ती नहीं था। वजह, जांच व अन्य सुविधाएं न होने के चलते मरीज मजबूरन जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। चिकित्सा प्रभारी डॉ. दीपशिखा ने बताया कि पिछले कई महीने से लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। उधर, रहरा सीएचसी में डेंगू वार्ड ही नहीं बना है। वहीं, यहां मरीजाें के खून की जांच भी नहीं हुई। वजह, यहां जांच के लिए मशीनें तो हैं, लेकिन चिकित्सक तैनात नहीं हैं।
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दोपहर डेढ़ बजे
खाली रहा गजरौला सीएचसी का डेंगू वार्ड
गजरौला के सीएचसी में डेंगू के इलाज के लिए बीते महीने दो बेड का वार्ड बनाया गया। जो बुधवार को दोपहर एक बजे तक खाली नजर आया। पता करने पर जानकारी हुई कि यहां गंभीर मरीजों को इलाज नहीं किया जाता है। आशंकित को मात्र ड्रिप या प्राथमिक उपचार कर वापस भेज दिया जाता है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि अस्पताल में एनएस-1 की जांच की सुविधा उपलब्ध है। जिसे जरूरत पड़ती है, उसी मरीज को ड्रिप दी जाती है।
दोपहर डेढ़ बजे
गंभीर रोगियों को भेजा जा रहा जिला अस्पताल
मंडी धनौरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डेढ़ बजे तक डेंगू आशंकित दो रोगी भर्ती थे। यहां डेंगू मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। उन्हें रेफर किया जाता है। अधीक्षक डॉक्टर मनदीप कुमार ने बताया कि स्थानीय अस्पताल में एन एस-1 जांच की सुविधा है। आशंकित होने पर रोगियों को ड्रिप लगाकर इलाज शुरू किया गया है। गंभीर रोगियों को ही जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
सीएचसी पर रेपिड जांच की सुविधा है। सीएचसी में भी डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। फिलहाल डेंगू आशंकित मरीजों को ही सीएचसी में भर्ती कराया जा रहा है। डेंगू का एलाइजा टेस्ट जिला मुख्यालय पर ही होता है। एलाइजा जांच में निकले डेंगू पॉजीटिव को जिला अस्पताल में भर्ती किया जाता है। वहीं, जहां-जहां डेंगू वार्ड में ताले लगे हैं, वहां टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। डेंगू बुखार को लेकर विभाग अलर्ट है। डॉ. सीपी सिंह, सीएमओ