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36 घंटे दहशत में रहा परिवार, हिंदू दोस्त की मदद से पहुंचे घर
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अमरोहा। एयर कंडीश्नर कंपनी में काम करने वाले नौगांवा सादात के मोहल्ला फकरपुरा निवासी मोहम्मद कायम परिवार के साथ दिल्ली से घर लौट आए हैं। अब भी परिवार दहशत में गुजरे करीब 36 घंटों को याद कर सिहर जाता है। माहौल सही होने पर ही अब उनका परिवार दिल्ली जाएगा। फिलहाल तब तक उनका परिवार नौगांवा में ही रहेगा।
मोहम्मद कायम बीवी और चार बच्चों के साथ दिल्ली के मुस्तफाबाद में भागीरथी बिहार गली नंबर-13 में रहते हैं। यहां वह करीब 25 साल से रहते हैं। उनका अपना मकान है। बताते हैं कि सोमवार को वह कनाट प्लेस में अपने ऑफिस गए थे। इस बीच दंगा भड़क गया। मुस्तफाबाद में भी आगजनी, फायरिंग और पत्थरबाजी होने लगी। जानकारी होने पर वह अपने घर पहुंचना चाहते थे, लेकिन हालात को देखते हुए बीवी और बच्चों ने मना कर दिया। वह कनाट प्लेस में ही फंस गए। बीवी बच्चों के दंगों में फंसे होने से उन पर पल-पल पर भारी पड़ रहा था। जैसे-तैसे उन्होंने रात काटी। दूसरे दिन माहौल और बिगड़ने लगा। बीवी बच्चे गोलीबारी आगजनी से दहशत में थे। दंगाई उनकी गली से दो सौ मीटर दूर तक पहुंच गए थे। ऐसे में बीवी बच्चों के पास जाने से नहीं रोक पाए। दोस्त जौहरीपुर निवासी ललित के परिवार के सहारे वह किसी तरह मंगलवार की शाम अपने घर पहुंचे।
दोस्त के परिवार ने पार कराया हिंदू इलाका
मोहम्मद कायम ने बताया कि मुस्तफाबाद में लगातार आगजनी फायरिंग और पत्थरबाजी हो रही थी। वह घबराए थे। कनाट प्लेस से मुस्तफाबाद पहुंचने के लिए उन्हें हिंदू इलाका पार करना था। ऐसे में उन्होंने अपने दोस्त ललित का सहारा लिया। फोन कर माहौल जाना। फिर उसके घर पहुंचे। ललित के परिवार ने उन्हें मुस्तफाबाद के बाहरी इलाके तक छोड़ा। जहां वह मुस्तफाबाद के दोस्तों के साथ अपने घर तक पहुंचे। मोहम्मद कायम का बेटा अकबर मेंहदी कक्षा आठ में पढ़ता है। वह मुस्तफाबाद में ही अरुण मॉडल पब्लिक स्कूल में पढ़ता है। दंगाइयों ने बेटे के स्कूल को जला दिया। दंगे में बुलंदशहर के रहने वाले अशफाक की जान चली गई। वह भाई जैसा था। मेरे बगल में रहता था। उसका बड़ा भाई मुदस्सिर मेरे साथ काम करता है।
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मोहम्मद कायम बीवी और चार बच्चों के साथ दिल्ली के मुस्तफाबाद में भागीरथी बिहार गली नंबर-13 में रहते हैं। यहां वह करीब 25 साल से रहते हैं। उनका अपना मकान है। बताते हैं कि सोमवार को वह कनाट प्लेस में अपने ऑफिस गए थे। इस बीच दंगा भड़क गया। मुस्तफाबाद में भी आगजनी, फायरिंग और पत्थरबाजी होने लगी। जानकारी होने पर वह अपने घर पहुंचना चाहते थे, लेकिन हालात को देखते हुए बीवी और बच्चों ने मना कर दिया। वह कनाट प्लेस में ही फंस गए। बीवी बच्चों के दंगों में फंसे होने से उन पर पल-पल पर भारी पड़ रहा था। जैसे-तैसे उन्होंने रात काटी। दूसरे दिन माहौल और बिगड़ने लगा। बीवी बच्चे गोलीबारी आगजनी से दहशत में थे। दंगाई उनकी गली से दो सौ मीटर दूर तक पहुंच गए थे। ऐसे में बीवी बच्चों के पास जाने से नहीं रोक पाए। दोस्त जौहरीपुर निवासी ललित के परिवार के सहारे वह किसी तरह मंगलवार की शाम अपने घर पहुंचे।
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दोस्त के परिवार ने पार कराया हिंदू इलाका
मोहम्मद कायम ने बताया कि मुस्तफाबाद में लगातार आगजनी फायरिंग और पत्थरबाजी हो रही थी। वह घबराए थे। कनाट प्लेस से मुस्तफाबाद पहुंचने के लिए उन्हें हिंदू इलाका पार करना था। ऐसे में उन्होंने अपने दोस्त ललित का सहारा लिया। फोन कर माहौल जाना। फिर उसके घर पहुंचे। ललित के परिवार ने उन्हें मुस्तफाबाद के बाहरी इलाके तक छोड़ा। जहां वह मुस्तफाबाद के दोस्तों के साथ अपने घर तक पहुंचे। मोहम्मद कायम का बेटा अकबर मेंहदी कक्षा आठ में पढ़ता है। वह मुस्तफाबाद में ही अरुण मॉडल पब्लिक स्कूल में पढ़ता है। दंगाइयों ने बेटे के स्कूल को जला दिया। दंगे में बुलंदशहर के रहने वाले अशफाक की जान चली गई। वह भाई जैसा था। मेरे बगल में रहता था। उसका बड़ा भाई मुदस्सिर मेरे साथ काम करता है।
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