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Amroha News: सीआरपीएफ डीआईजी ने शहीद आनंद की प्रतिमा पर किए पुष्प अर्पित

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:31 AM IST
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CRPF DIG laid floral tributes at the statue of martyr Anand.
नौगांवा सादात क्षेत्र के गांव देहरा में शहीद आनंद की प्रतिमा पर सैल्यूट करते सीआरपीएफ डीआईजी पू
नौगांवा सादात(अमरोहा)। सीआरपीएफ डीआईजी पूरन सिंह ने बृहस्पतिवार को क्षेत्र के गांव देहरा पहुंचकर शहीद जवान आनंद कुमार की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। बलिदान को याद कर शहीद के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि शहीद आनंद कुमार की बलिदान को बुलाया नहीं जा सकता। करीब एक महीने पहले शहीद आनंद कुमार के मझले भाई अशोक कुमार के निधन पर भी शोक व्यक्त किया।
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मालूम रहे कि नौगांवा सादात थानाक्षेत्र के गांव देहरा निवासी आनंद कुमार अपने बड़े भाई जितेंद्र सिंह के नक्शे कदम पर चलते हुए 25 अप्रैल 2001 को सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। छह साल आठ महीने की सर्विस में आनंद कुमार असम, जम्मू कश्मीर, मणिपुर आदि प्रदेशों में ड्यूटी की थी। बाद में गांव से करीब 70 किमी दूर सीआरपीएफ सेंटर रामपुर में तैनाती हो गई। एक जनवरी 2008 को आनंद के परिवार के लिए दुख की रात साबित हुई।
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21 दिसंबर साल 2008 रात करीब ढाई बजे आतंकवादियों ने सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर रामपुर पर हमला कर दिया था। स्वचालित हथियारों और ग्रेनेड से लैस आतंकवादियों ने पहले गेट नंबर एक पर तैनात संतरियों पर फायरिंग की और ग्रेनेड फेंके। गेट पर तैनात जवानों ने इस हमले का जवाब दिया। आतंकियों के इस हमले में आनंद कुमार शहीद हो गए थे।
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हर साल एक जनवरी की तरह शहीद का मान, देश का सम्मान का संदेश लेकर बृहस्पतिवार को सीआरपीएफ रामपुर ग्रुप सेंटर के डीआईजी पूरन सिंह दोपहर में 12 बजे गांव देहरा पहुंचे। यहां पहले उन्होंने गांव में स्थापित शहीद आनंद कुमार की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। बलिदान को याद करते हुए डीआईजी पूरन सिंह ने जवानों को शहीद आनंद कुमार से प्रेरणा लेने की सीख दी।
इस दौरान डीआईजी की मौजूदगी में शहीद आनंद कुमार के बड़े भाई जितेंद्र सिंह का दर्द भी छलका पड़ा। वह खुद सीआरपीएफ में एएसआई हैं और इन दिनों उनकी तैनाती असम में है। उन्होंने बताया कि जब आतंकी हमला हुआ तब वह खुद भी रामपुर सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में तैनात थे। छोटे भाई आनंद की ड्यूटी उस वक्त कंट्रोल रूम में थी। आतंकियों ने कंट्रोल रूम में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें आनंद कुमार शहीद हो गए।

दो जनवरी को मैं भाई का शव लेकर गांव पहुंचा था, मैंने और ग्रामीणों ने मिलकर अपने खर्चे से गांव में शहीद स्मारक बनवाया। तब से अब तक केंद्र या प्रदेश सरकार ने किसी तरह की कोई मदद नहीं की। तत्कालीन डीएम ने अंतिम संस्कार के समय 25 बेड का हॉस्पिटल, कन्या इंटर कॉलेज और शहीद स्मारक बनवाने की घोषणा की थी जो आज तक पूरी नहीं हुईं। इस दौरान नौगांवा सादात इंस्पेक्टर सुनील कुमार मौजूद रहे।
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