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परिजनों को सताने लगी यूक्रेन से लौट रहे छात्रों के भविष्य की चिंता
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यूक्रेन में फंसे अमरोहा के छात्र सुरक्षित वापस लौटने लगे हैं, लेकिन उनको अब भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनकी पढ़ाई का क्या होगा। यहां से बीस से अधिक छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गए थे। वहां के अलग-अलग यूनिवर्सिटी से यह मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। इसका खर्चा 20 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये है। कई बच्चों का एमबीबीएस की पढ़ाई में पहला साल है। तो कई छात्र पढ़ाई के तीन-चार, पांच साल पूरे कर डिग्री मिलने के करीब तक पहुंच गए हैं, लेकिन उन्हें यूक्रेन बिगड़ते हालातों के बीच पढ़ाई टूटती नजर आ रही है। अचानक यूक्रेनी नागरिकों और वहां की पुलिस द्वारा छात्रों के साथ की गई बदसलूकी से छात्र व उनके परिजन आहत है। छात्रों के परिजनों का कहना है कि यूक्रेन के नागरिक और वहां की सरकार को लग रहा है कि भारत रूस के समर्थन में खड़ा है। अपील करने के बाद भी भारत ने यूक्रेन का साथ नहीं दिया। वहां के लोग बेहद हताश हैं। जिस कारण वहां के लोग भारतीय छात्रों से नफरत करने लगे। उनका भारतीय छात्रों के प्रति रवैया बदल गया। हालात सुधरने के बाद क्या छात्रों का यूक्रेन जाना ठीक रहेगा या नहीं, उनकी पढ़ाई कैसे हो पाएगी, परिजनों को बस यही चिंता सता रही। उनका कहना है कि अब सब कुछ भारत और यूक्रेन सरकार के बीच अच्छे संबंधों के बीच निर्भर करेंगा।
नौगांवा सादात थानाक्षेत्र के गांव खेड़ा अपरोला निवासी यामीन के बेटे सलमान यूक्रेन में फंस गए थे, फिलहाल वह रोमानिया एयरपोर्ट के पास शेल्टर होम में रुके हुए हैं। यामीन के मुताबिक सलमान का एमबीबीएस के लिए पहला साल हैं। उनकी एक साल की फीस जमा हो चुकी है। यूक्रेन से हजारों बच्चे लौट रहे हैं, फिलहाल बिगड़ते हालातों में सलमान सकुशल घर लौट आएं, यहीं दुआ है। इसके बाद आगे क्या हालात रहेंगे और सलमान यूक्रेन जाएंगे या नहीं यह उनके ऊपर निर्भर करेगा।
अमरोहा के प्रीत विहार निवासी अंजलि 23 फरवरी को यूक्रेन से अमरोहा लौट आई थीं। अब उन्हें अपने भविष्य की चिंता है। अंजलि के मुताबिक बिगड़ते हालातों में यूक्रेन नागरिक और वहां की पुलिस द्वारा छात्रों के साथ गलत बर्ताव करने की बात सामने आई है। लेकिन वहां के लोग गलत नहीं है। अच्छे लोग हैं। उनका व्यवहार अच्छा है। यूक्रेन के नागरिकों को लग रहा है कि भारत सरकार उनका साथ नहीं दे रहा है। अभी वहां के लोग परेशान और गुस्से में है। हालात सुधरने के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा। एमबीबीएस में उनका दूसरा साल है, इसलिए पढ़ाई बीच में नहीं छोड़ी जा सकती। हालात सुधरने पर वह वापस जाएंगी।
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जोया के रहने वाले एडीओ अफसर अली का बेटा जावेद अनवर खान का एमबीबीएस में पहला साल है। जावेद अनवर खान को भी यूक्रेन में बिगड़ते हालातों से जूझना पड़ा है। उनके पिता अफसर अली को जावेद के भविष्य की चिंता सता रही है। उनका कहना है कि यूक्रेन के नागरिक और वहां की सरकार को लग रहा है कि भारत उनका समर्थन नहीं कर रहा है। जिस कारण वहां के लोग भारतीय छात्रों के प्रति उग्र हो गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे जावेद अनवर का पहला साल है, वह दोबारा नहीं जाएंगे तो कोई बात नहीं है, लेकिन जिन बच्चों के तीन से 4 साल की पढ़ाई पूरी हो गई है, उनका भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। अब इन हालातों में केवल भारत और यूक्रेन सरकार के बीच अच्छे संबंधों पर निर्भर करेगा।
जोया निवासी अंशिका के पिता डॉ.गौतम ने कहा कि अब यूक्रेन और भारत के बीच संबंध कितने अच्छे रहेंगे यह दोनों सरकारों के बीच निर्भर करेगा। वहां के बिगड़ते हालात को हमने देख लिया है। उन्होंने बताया कि अंशिका का एमबीबीएस के लिए तीसरा साल है। लेकिन अब उनके कैरियर की चिंता हो रही है। अगर हालात नहीं सुधरे या यूक्रेन और भारत के संबंधों में खटास रही, तो बच्चों के भविष्य बेकार हो जाएगा। उनके कॅरियर के तीन साल खराब हो जाएंगे। ऐसे हजारों बच्चे हैं, जिनका एमबीबीएस पूरा होने वाला था। अब भारत सरकार ही कुछ कर सकती है, हम इन हालातों में कोई रिक्स नहीं ले सकते हैं।
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नौगांवा सादात थानाक्षेत्र के गांव खेड़ा अपरोला निवासी यामीन के बेटे सलमान यूक्रेन में फंस गए थे, फिलहाल वह रोमानिया एयरपोर्ट के पास शेल्टर होम में रुके हुए हैं। यामीन के मुताबिक सलमान का एमबीबीएस के लिए पहला साल हैं। उनकी एक साल की फीस जमा हो चुकी है। यूक्रेन से हजारों बच्चे लौट रहे हैं, फिलहाल बिगड़ते हालातों में सलमान सकुशल घर लौट आएं, यहीं दुआ है। इसके बाद आगे क्या हालात रहेंगे और सलमान यूक्रेन जाएंगे या नहीं यह उनके ऊपर निर्भर करेगा।
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अमरोहा के प्रीत विहार निवासी अंजलि 23 फरवरी को यूक्रेन से अमरोहा लौट आई थीं। अब उन्हें अपने भविष्य की चिंता है। अंजलि के मुताबिक बिगड़ते हालातों में यूक्रेन नागरिक और वहां की पुलिस द्वारा छात्रों के साथ गलत बर्ताव करने की बात सामने आई है। लेकिन वहां के लोग गलत नहीं है। अच्छे लोग हैं। उनका व्यवहार अच्छा है। यूक्रेन के नागरिकों को लग रहा है कि भारत सरकार उनका साथ नहीं दे रहा है। अभी वहां के लोग परेशान और गुस्से में है। हालात सुधरने के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा। एमबीबीएस में उनका दूसरा साल है, इसलिए पढ़ाई बीच में नहीं छोड़ी जा सकती। हालात सुधरने पर वह वापस जाएंगी।
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जोया के रहने वाले एडीओ अफसर अली का बेटा जावेद अनवर खान का एमबीबीएस में पहला साल है। जावेद अनवर खान को भी यूक्रेन में बिगड़ते हालातों से जूझना पड़ा है। उनके पिता अफसर अली को जावेद के भविष्य की चिंता सता रही है। उनका कहना है कि यूक्रेन के नागरिक और वहां की सरकार को लग रहा है कि भारत उनका समर्थन नहीं कर रहा है। जिस कारण वहां के लोग भारतीय छात्रों के प्रति उग्र हो गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे जावेद अनवर का पहला साल है, वह दोबारा नहीं जाएंगे तो कोई बात नहीं है, लेकिन जिन बच्चों के तीन से 4 साल की पढ़ाई पूरी हो गई है, उनका भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। अब इन हालातों में केवल भारत और यूक्रेन सरकार के बीच अच्छे संबंधों पर निर्भर करेगा।
जोया निवासी अंशिका के पिता डॉ.गौतम ने कहा कि अब यूक्रेन और भारत के बीच संबंध कितने अच्छे रहेंगे यह दोनों सरकारों के बीच निर्भर करेगा। वहां के बिगड़ते हालात को हमने देख लिया है। उन्होंने बताया कि अंशिका का एमबीबीएस के लिए तीसरा साल है। लेकिन अब उनके कैरियर की चिंता हो रही है। अगर हालात नहीं सुधरे या यूक्रेन और भारत के संबंधों में खटास रही, तो बच्चों के भविष्य बेकार हो जाएगा। उनके कॅरियर के तीन साल खराब हो जाएंगे। ऐसे हजारों बच्चे हैं, जिनका एमबीबीएस पूरा होने वाला था। अब भारत सरकार ही कुछ कर सकती है, हम इन हालातों में कोई रिक्स नहीं ले सकते हैं।