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Amroha News: सील के बाद भी खुल रहे अवैध अस्पताल-क्लीनिक, नहीं लग रही झोलाछापों पर लगाम
Thu, 10 Sep 2026 01:00 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 10 Sep 2026 01:00 AM IST
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अमरोहा। जिले में अपंजीकृत अस्पताल, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब पर कार्रवाई के बावजूद इनका संचालन थम नहीं रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सील किए गए अस्पताल-क्लीनिक में चोरी-छिपे दूसरे रास्तों से मरीजों को देखा जा रहा है। कार्रवाई के बाद भी संचालन जारी रहने से विभाग की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 120 अस्पताल ही पंजीकृत हैं, जबकि पांच हजार से अधिक अपंजीकृत अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहा है। गांवों से लेकर कस्बों और शहर के मोहल्लों तक झोलाछाप मरीजों का उपचार कर रहे हैं। किसान नेता चौधरी दिवाकर सिंह ने बताया कि बिना पर्याप्त योग्यता या संसाधनों के इलाज किए जाने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ने के मामले भी सामने आते रहे हैं। गलत उपचार के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजातों की मौत के मामले भी विभाग के सामने आ चुके हैं। तीन दिन पहले जोया और अमरोहा क्षेत्र में दो महिलाओं की मौत के मामले ने भी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर सवाल खड़े किए थे। झोलाछापों पर अंकुश लगाने के लिए सीएमओ ने ब्लॉक स्तर की सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी थे। इसके बावजूद अवैध क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब के संचालन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। किया था।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 120 अस्पताल ही पंजीकृत हैं, जबकि पांच हजार से अधिक अपंजीकृत अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहा है। गांवों से लेकर कस्बों और शहर के मोहल्लों तक झोलाछाप मरीजों का उपचार कर रहे हैं। किसान नेता चौधरी दिवाकर सिंह ने बताया कि बिना पर्याप्त योग्यता या संसाधनों के इलाज किए जाने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ने के मामले भी सामने आते रहे हैं। गलत उपचार के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजातों की मौत के मामले भी विभाग के सामने आ चुके हैं। तीन दिन पहले जोया और अमरोहा क्षेत्र में दो महिलाओं की मौत के मामले ने भी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर सवाल खड़े किए थे। झोलाछापों पर अंकुश लगाने के लिए सीएमओ ने ब्लॉक स्तर की सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी थे। इसके बावजूद अवैध क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब के संचालन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। किया था।
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