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Amroha News: कैंसर की बीमारी छिपाना पड़ा भारी, दावा खारिज
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अमरोहा। बीमा पॉलिसी लेने से पहले कैंसर की बीमारी की जानकारी छिपाना महिला को भारी पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने 1.60 लाख रुपये का दावा खारिज खारिज कर दिया।
मामला कैलसा बॉर्डर निवासी यशोदा से जुड़ा है। उनके पति विजेंद्र ने एक बैंक के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा कराया था। चार हजार रुपये प्रीमियम वाली पॉलिसी 29 फरवरी 2020 से 24 फरवरी 2022 तक वैध थी और इसमें 1.60 लाख रुपये का बीमा कवर था। विजेंद्र की 25 मार्च 2021 को अचानक सीने में दर्द के बाद मौत हो गई।
यशोदा ने नामिनी के रूप में बीमा राशि का दावा किया, जिसे कंपनी ने जांच के बाद खारिज कर दिया। लिहाजा यशोदा ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। बीमा कंपनी ने आयोग में पक्ष रखते हुए बताया कि विजेंद्र वर्ष 2017 से कैंसर का इलाज करा रहे थे।
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हिमालयन अस्पताल जॉलीग्रांट देहरादून के मेडिकल दस्तावेजों और बायोप्सी रिपोर्ट में गर्दन के कैंसर की पुष्टि हुई। कंपनी का आरोप था कि पॉलिसी लेते समय प्रस्तावपत्र में बीमारी से संबंधित जानकारी नहीं दी गई। आयोग ने मेडिकल दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि विजेंद्र को पॉलिसी लेने से पहले ही कैंसर था और उन्हें अपनी बीमारी की जानकारी थी। इसके बावजूद प्रस्ताव पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया गया।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के संबंधित एक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा अनुबंध में प्रस्तावक को ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा करना आवश्यक है, जो बीमा कंपनी के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। बीमारी छिपाने को सद्भावना के दायित्व का उल्लंघन मानते हुए आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से दावा खारिज करने की कार्रवाई को सही ठहराया।
आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने यशोदा की ओर से मांगी गई बीमा राशि, ब्याज, मानसिक-शारीरिक क्षति, आर्थिक नुकसान और वाद खर्च की मांग भी खारिज कर दी। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने का आदेश दिया गया है।
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मामला कैलसा बॉर्डर निवासी यशोदा से जुड़ा है। उनके पति विजेंद्र ने एक बैंक के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा कराया था। चार हजार रुपये प्रीमियम वाली पॉलिसी 29 फरवरी 2020 से 24 फरवरी 2022 तक वैध थी और इसमें 1.60 लाख रुपये का बीमा कवर था। विजेंद्र की 25 मार्च 2021 को अचानक सीने में दर्द के बाद मौत हो गई।
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यशोदा ने नामिनी के रूप में बीमा राशि का दावा किया, जिसे कंपनी ने जांच के बाद खारिज कर दिया। लिहाजा यशोदा ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। बीमा कंपनी ने आयोग में पक्ष रखते हुए बताया कि विजेंद्र वर्ष 2017 से कैंसर का इलाज करा रहे थे।
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हिमालयन अस्पताल जॉलीग्रांट देहरादून के मेडिकल दस्तावेजों और बायोप्सी रिपोर्ट में गर्दन के कैंसर की पुष्टि हुई। कंपनी का आरोप था कि पॉलिसी लेते समय प्रस्तावपत्र में बीमारी से संबंधित जानकारी नहीं दी गई। आयोग ने मेडिकल दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि विजेंद्र को पॉलिसी लेने से पहले ही कैंसर था और उन्हें अपनी बीमारी की जानकारी थी। इसके बावजूद प्रस्ताव पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया गया।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के संबंधित एक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा अनुबंध में प्रस्तावक को ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा करना आवश्यक है, जो बीमा कंपनी के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। बीमारी छिपाने को सद्भावना के दायित्व का उल्लंघन मानते हुए आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से दावा खारिज करने की कार्रवाई को सही ठहराया।
आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने यशोदा की ओर से मांगी गई बीमा राशि, ब्याज, मानसिक-शारीरिक क्षति, आर्थिक नुकसान और वाद खर्च की मांग भी खारिज कर दी। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने का आदेश दिया गया है।