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जिले में फिर खाली रह गई बसपा की झोली
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2012, 2017 के बाद 2022 में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में लगातार जनता ने बसपा को निराश किया। इस दौरान वर्ष 2012 और 2017 की भांति 2022 के चुनाव में जिले की एक भी सीट बसपा के खाते में नहीं गई। हालांकि इस बार के चुनाव में धनौरा सीट से मैदान में उतरे बसपा प्रत्याशी शुरू के दो चक्रों में आगे रहें। लेकिन उसके बाद चारों विधान सभाओं से मैदान में उतरे सभी प्रत्याशियों को तीसरे स्थान पर रहकर संतोष करना पड़ा।
वर्ष 2007 के विधान सभा चुनाव में जिले के हसनपुर विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज कराई थी। इसके बाद वर्ष 2012 में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में जिले की चारों विधान सभा सीटों से बसपा को हार का सामना करना पड़ा था, यही हाल 2017 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में रही। जनता ने बसपा को नकार दिया। इस बार के विधान सभा चुनाव में भी चारों सीटों से जनता ने बसपा का खाता नहीं खुला। चारों प्रत्याशियों को तीसरे नंबर से ही संतोष करना पड़ा। वर्ष 2007 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में हसनपुर सीट से बसपा प्रत्याशी फरहत हुसैन उर्फ हाजी शब्बन को जनता ने जनादेश देने का काम किया था।
धनौरा विधानसभा सीट से बसपा टिकट पर मैदान में उतरे प्रत्याशी हसपाल सिंह पहले दो चक्रों में अपने विरोधियों को टक्कर दिए। इसके बाद वो कुल 43973 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। हसनपुर सीट से बसपा बैनरतले मैदान में उतरे फिरेराम गुर्जर को 35994 वोट पाकर संतोष करना पड़ा। नौगांवा सादात सीट से शादाब खां उर्फ टाटा को 28523 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। जानकारों की मानें तो बीते वर्ष की तुलना में इस बार बसपा का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा। क्योंकि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में नौगांवा सीट से पार्टी के प्रत्याशी राहुल चौहान, हसनपुर सीट से गंगाशरण खड़गवंशी, धनौरा सीट से हेम सिंह आर्य चुनाव हारे थे।
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वर्ष 2007 के विधान सभा चुनाव में जिले के हसनपुर विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज कराई थी। इसके बाद वर्ष 2012 में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में जिले की चारों विधान सभा सीटों से बसपा को हार का सामना करना पड़ा था, यही हाल 2017 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में रही। जनता ने बसपा को नकार दिया। इस बार के विधान सभा चुनाव में भी चारों सीटों से जनता ने बसपा का खाता नहीं खुला। चारों प्रत्याशियों को तीसरे नंबर से ही संतोष करना पड़ा। वर्ष 2007 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में हसनपुर सीट से बसपा प्रत्याशी फरहत हुसैन उर्फ हाजी शब्बन को जनता ने जनादेश देने का काम किया था।
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धनौरा विधानसभा सीट से बसपा टिकट पर मैदान में उतरे प्रत्याशी हसपाल सिंह पहले दो चक्रों में अपने विरोधियों को टक्कर दिए। इसके बाद वो कुल 43973 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। हसनपुर सीट से बसपा बैनरतले मैदान में उतरे फिरेराम गुर्जर को 35994 वोट पाकर संतोष करना पड़ा। नौगांवा सादात सीट से शादाब खां उर्फ टाटा को 28523 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। जानकारों की मानें तो बीते वर्ष की तुलना में इस बार बसपा का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा। क्योंकि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में नौगांवा सीट से पार्टी के प्रत्याशी राहुल चौहान, हसनपुर सीट से गंगाशरण खड़गवंशी, धनौरा सीट से हेम सिंह आर्य चुनाव हारे थे।
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