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Amroha News: अमरोहा सीट से बसपा को दो चुनाव में मिली है जीत
Fri, 08 Mar 2024 01:27 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 08 Mar 2024 01:27 AM IST
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अमरोहा। बसपा अमरोहा लोकसभा सीट से चार बार निर्णायक भूमिका में रही है। बसपा ने 1991 में जिले में पहला चुनाव लड़ा था। जिसमें महेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाकर मैदान में भेजा था, लेकिन उन्हें इस चुनाव में केवल 14,251 वोट मिले थे। जिसके बाद प्रत्येक चुनाव में बसपा का वोट बैंक बढ़ता गया। वर्ष 1996 में बसपा प्रत्याशी राशिद अल्वी 1,37,289 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। जबकि वर्ष 1998 में हुए चुनाव में बसपा प्रत्याशी आले हसन 2,30,088 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे।
जिसके बाद 1999 के चुनाव में बसपा ने राशिद अल्वी को फिर से प्रत्याशी बनाया। इस दौरान सिर्फ वोट प्रतिशत बढ़ा बल्कि उन्होंने 3,37,919 वोट प्राप्त करके चुनाव जीता। इस साल जिले में पहली बार बसपा का खाता खुला था। इसके बाद वर्ष 2004 के चुनाव में आले हसन चुनाव लड़े थे। इस बार उन्हें सिर्फ 1,68,696 वोट मिले थे। जिसके चलते पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी महमूद मदनी को केवल 1,70,396 वोट मिले और वह भी तीसरे स्थान पर रहे थे। वर्ष 2014 में फरहत हसन उर्फ हाजी शब्बन को 1,62,983 वोट मिले और वह भी तीसरे स्थान पर रहे थे। वर्ष 1999 में जीत का खाता खोलने के 20 साल बाद 2019 में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ तो जिले के जातीय समीकरण पूरी तरह बद गए। इस चुनाव में बसपा प्रत्याशी दानिश अली 6,01,082 वोट लेकर सांसद बनने में कामयाब रहे। इस चुनाव में पार्टी ने डासना नगर पंचायत (गाजियाबाद) के रहने वाले डॉ. मुजाहिद हुसैन उर्फ बाबू भाई को प्रत्याशी बनाया है, देखना होगा कि उन्हें जनता का कितना साथ मिलता है। इस चुनाव को जीतना बसपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं।
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जिसके बाद 1999 के चुनाव में बसपा ने राशिद अल्वी को फिर से प्रत्याशी बनाया। इस दौरान सिर्फ वोट प्रतिशत बढ़ा बल्कि उन्होंने 3,37,919 वोट प्राप्त करके चुनाव जीता। इस साल जिले में पहली बार बसपा का खाता खुला था। इसके बाद वर्ष 2004 के चुनाव में आले हसन चुनाव लड़े थे। इस बार उन्हें सिर्फ 1,68,696 वोट मिले थे। जिसके चलते पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी महमूद मदनी को केवल 1,70,396 वोट मिले और वह भी तीसरे स्थान पर रहे थे। वर्ष 2014 में फरहत हसन उर्फ हाजी शब्बन को 1,62,983 वोट मिले और वह भी तीसरे स्थान पर रहे थे। वर्ष 1999 में जीत का खाता खोलने के 20 साल बाद 2019 में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ तो जिले के जातीय समीकरण पूरी तरह बद गए। इस चुनाव में बसपा प्रत्याशी दानिश अली 6,01,082 वोट लेकर सांसद बनने में कामयाब रहे। इस चुनाव में पार्टी ने डासना नगर पंचायत (गाजियाबाद) के रहने वाले डॉ. मुजाहिद हुसैन उर्फ बाबू भाई को प्रत्याशी बनाया है, देखना होगा कि उन्हें जनता का कितना साथ मिलता है। इस चुनाव को जीतना बसपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं।
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