फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amroha News ›   Bomb blasts were happening every minute in Kyiv, the spirit was trembling

कीव में हर मिनट हो रहे थे बम धमाके, कांप उठी थी रूह

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 01:46 AM IST
विज्ञापन
Bomb blasts were happening every minute in Kyiv, the spirit was trembling
खौफनाक मंजर के बारह दिन और हजारों किलोमीटर का सफर तय करके सकुशल घर पहुंचे जोया निवासी नूरुल हसन, उनकी बहन कमर जहां व उमर जहां को देख कर परिजन भावुक हो गए। देखते ही माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू झलक गए, परिजनों ने बच्चों को गले लगा लिया, साथ ही मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया। इस दौरान छात्र नूरुल हसन ने यूक्रेन की दास्तां बयां की। उन्होंने बताया कि 27 फरवरी को कीव में हर मिनट में बम ब्लास्ट होते रहे। वहां फंसे छात्र खाने-पीने का सामान लेकर बंकरों की तरफ दौड़ते थे। हम तीन सगे भाई बहन थे, अगर कुछ हो जाता तो परिवार को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता।
विज्ञापन

जोया के रहने वाले उमर के दो बेटे और दो बेटी यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। बड़ा बेटा कमल हसन युद्ध शुरू होने से 15 दिन पहले ही घर वापस आया था। लेकिन बेटा नूरुल हसन, बेटी कमर जहां और उमर जहां वहीं फंस गए थे। युद्ध शुरू होने की आशंकाओं के बीच उन्होंने फ्लाइट बुक कर दी थी। चौबीस फरवरी को उनकी फ्लाइट थी। इसके लिए तीनों भाई-बहन 23 की रात एयरपोर्ट के लिए निकल गए थे। लेकिन एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही रूस द्वारा हमला करने की सूचना मिल गई थी। एयरपोर्ट के आसपास क्षेत्र में बम और गोलीबारी की आवाज सुनकर एयरपोर्ट पर अफरातफरी का माहौल बन गया था। हालात बिगड़ते देख नूरुल हसन अपनी दोनों बहनों व अन्य छात्रों के साथ भारतीय दूतावास पहुंच गए। इसके बाद उन्हें पास के एक स्कूल की बिल्डिंग में ठहराया गया। चार दिन तक तीनों भाई बहन अन्य करीब 500 छात्रों के साथ स्कूल की बिल्डिंग में फंसे रहे। किसी तरह से छात्रों ने वहां से निकलने का फैसला किया। खौफनाक मंजर के बीच किसी तरह से छात्र वहां से निकलकर कीव के स्टेशन पर पहुंचे। यहां से तीनों भाई बहनों ने अन्य छात्रों के साथ 1200 किलोमीटर का सफर तय कर स्लोवाकिया में एंट्री किया। इस तरह से तीनों भाई बहनों का वह 12 दिन दहशत भरा रहा। स्लोवाकिया एयरपोर्ट से शनिवार की शाम को उन्होंने उड़ान भरी। नूरुल हसन ने बताया कि रविवार की सुबह करीब 4:30 बजे दिल्ली वे एयरपोर्ट पहुंच गए थे। यहां सरकार की तरफ से उनका स्वागत किया गया। यूपी सरकार की तरफ से घर छोड़ने के प्रबंध किए गए थे। लेकिन एयरपोर्ट पर हमारे परिजन मौजूद थे, उनके साथ हम तीनों भाई-बहन घर लौटे। नूरुल हसन ने बताया कि किसी भी परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच युद्ध बंद होना चाहिए। क्योंकि हालात बहुत खराब है, आम नागरिकों की जान जा रही है। उनकी संपत्तियों को नुकसान पहुंच रहा। दोनों देश युद्ध बंद कर खुशी से रहें। नूरुल हसन और उसके परिवार ने भारत सरकार का धन्यवाद किया। इस दौरान पिता कुमार और माता शबनम ने तीनों बच्चों का मिठाई खिला कर स्वागत किया। छात्रों के घर पहुंचते ही लोगों की भीड़ थी। सभी यूक्रेन के हालात जानने को उत्साहित दिखे।
विज्ञापन

भयावह मंजर से निकलकर रविवार को घर पहुंचे नूरुल हसन ने कहा कि मैं अपनी दो बहनों के संग यूक्रेन पढ़ाई करने के लिए गया था, लेकिन अचानक हालात युद्ध के होने और जंग छिड़ने से हम सभी अवाक थे। हालात बिगड़ने पर हम लोगों को कुछ नहीं समझ नहीं आ रहा था। खुद को बचाए या फिर बहनों की सुरक्षा करें। कहां जाए, कहां बैठे ताकि सुरक्षित रह सकें। भय था कि हम तीनों एकट्ठे हैं, यदि कुछ हो गया, तो परिवार को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचेगा। जिसकी भरपाई करना संभव नहीं था। क्योंकि हालात ऐसे थे, कि चाहकर भी हम सभी एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते थे। बोले उपर वाले का करम है कि सभी सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

महफूज सिद्दीकी ने तबाही शुरू होने से पांच घंटे पहले छाड़ा था खारकीव शहर
महफूज सिद्दीकी ने तबाही शुरू होने से पांच घंटे पहले छाड़ा था खारकीव शहर
यूक्रेन में फंसे अतरासी निवासी महफूज सिद्दीकी भी सकुशल अपने घर पहुंच गए हैं। उन्होंने यूक्रेन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि खारकीव की तबाही शुरू होने से केवल पांच घंटे पहले वह वहां से निकले थे। उन्होंने बमबारी गोलीबारी के बीच ध्वस्त होकर गिरती इमारतों का मंजर अपनी आंखों से देखा। लेकिन छात्रों ने डर पर अपने हौसले को कायम रखा। सैंकड़ों छात्र आठ किलोमीटर पैदल चलकर कीव के रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। इसके बाद स्लोवाकिया पहुंचने के लिए एक लाख रुपये में किराए की बस से 400 किलोमीटर का सफर तय किया और स्लोवाकिया में एंट्रीी ली। महफूज के घर पहुंचने पर परिवार की खुशी का ठिकाना ना रहा।

अतरासी निवासी रियाजुद्दीन के बेटे महफूज सिद्दीकी का खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई का चौथा साल है। भारतीय दूतावास के अलर्ट जारी करते ही उन्होंने स्वदेश लौटने का फैसला कर लिया था। 24 फरवरी को उनकी फ्लाइट थी। लेकिन खारकीव से निकलने के पांच घंटे बाद ही रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। उन्होंने बताया कि रूस की तरफ से की गई बमबारी से खारकीव शहर की इमारतों को ध्वस्त होते हुए उन्होंने अपनी आंखों से देखा है। हमला होते ही एयरपोर्ट बंद कर दिया गया था। इसके बाद वह अन्य छात्रों के साथ वह कीव स्थित भारतीय दूतावास पहुंचे। चार दिन तक वहीं फंसे रहे। लेकिन दूतावास के अधिकारियों द्वारा कोई सहूलियत नहीं मिलने पर छात्रों ने खुद ही निकलने का फैसला कर लिया। हौसला दिखाते हुए छात्र आठ किलोमीटर पैदल चलकर कीव के रेलवे स्टेशन पहुंचे। इस दौरान छात्रों के पास खाने-पीने के लिए कुछ नहीं था। लेकिन यूक्रेनी नागरिकों ने छात्रों को खाना दिया। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशन से वह पश्चिमी दिशा के एक अन्य स्टेशन तक पहुंचे। यहां हंगरी, रोमानिया, पोलैंड और स्लोवाकिया बॉर्डर के हालातों के बारे में जानकारी ली और इसके बाद स्लोवाकिया जाने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि एक लाख रुपये में किराए की बस से 400 किलोमीटर का सफर तय करके स्लोवाकिया पहुंचे थे। इस दौरान कई जगह चेकिंग की गई। छात्रों के पासपोर्ट चेेक किए गए कि छात्र इंडियन है या नहीं। तस्सली के बाद सैनिकों ने उन्हें आगे जाने दिया गया। महफूज सिद्दीकी ने बताया कि स्लोवाकिया भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने छात्रों का बेहतर ढंग से ख्याल रखा। छात्रों को खाने-पीने से लेकर सभी सहूलियत दी गई। सरकार की अच्छी पहल के चलते छात्र सकुशल घर पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि खारकीव में अभी 2000 से अधिक छात्र फंसे हुए हैं। उन्हें ट्रांसपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास के अधिकारी छात्रों को पूरी तरह सपोर्ट नहीं कर पा रहे हैं। खारकीव में फंसे छात्र भूखे तड़प रहे हैं। इसके अलावा हसनपुर निवासी सलमान और रायपुर खुर्द निवासी तारिक भी घर पहुंच गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed