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बड़ा फैसला : बिना ड्राइविंग लाइसेंस के भी मिलेगा पीएम सुरक्षा बीमा
Tue, 28 Apr 2026 12:20 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 28 Apr 2026 12:20 AM IST
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अमरोहा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा क्लेम पाने के लिए मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य नहीं है। आयोग ने बीमा कंपनी के केवल लाइसेंस नहीं होने के आधार पर क्लेम खारिज करने को गलत ठहराते हुए इसे सेवा में कमी का दोषी माना है। साथ ही बीमा कंपनी को बीमा क्लेम के दो लाख नौ प्रतिशत ब्याज समेत चुकाने के निर्देश दिए हैं और आर्थिक और मानसिक पीड़ा व वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह मामला अमरोहा के गांव खाता निवासी माया देवी से जुड़ा है। उनके पति धर्म सिंह ने बैंक के माध्यम से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जुड़े हुए थे। 11 मई 2019 को एक सड़क हादसे में धर्मसिंह की मौत हो गई थी। घटना के बाद माया देवी ने योजना के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की बीमा राशि के लिए आवेदन किया। लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि हादसे के समय धर्म सिंह के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, जो बीमा शर्तों का उल्लंघन है। इसके बाद माया देवी ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को नोटिस जारी कर तलब कर लिया। मामले की सुनवाई के दौरान माया देवी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना में मौत होने पर परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। यह कोई सामान्य मोटर बीमा पॉलिसी नहीं है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस जैसी शर्तें लागू हों।
दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने अपने निर्णय में कहा कि बीमा कंपनी द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव में क्लेम निरस्त करना विधिसम्मत नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जब यह साबित हो चुका है कि मृतक योजना में पंजीकृत था और उसकी मौत हादसे में हुई है, तो बीमा राशि का भुगतान नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
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आयोग ने बीमा कंपनी को एक माह के भीतर माया देवी को दो लाख रुपये की बीमा राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए। साथ ही वाद दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा है। आयोग ने मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 15 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया है।
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यह मामला अमरोहा के गांव खाता निवासी माया देवी से जुड़ा है। उनके पति धर्म सिंह ने बैंक के माध्यम से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जुड़े हुए थे। 11 मई 2019 को एक सड़क हादसे में धर्मसिंह की मौत हो गई थी। घटना के बाद माया देवी ने योजना के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की बीमा राशि के लिए आवेदन किया। लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि हादसे के समय धर्म सिंह के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, जो बीमा शर्तों का उल्लंघन है। इसके बाद माया देवी ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को नोटिस जारी कर तलब कर लिया। मामले की सुनवाई के दौरान माया देवी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना में मौत होने पर परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। यह कोई सामान्य मोटर बीमा पॉलिसी नहीं है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस जैसी शर्तें लागू हों।
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दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने अपने निर्णय में कहा कि बीमा कंपनी द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव में क्लेम निरस्त करना विधिसम्मत नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जब यह साबित हो चुका है कि मृतक योजना में पंजीकृत था और उसकी मौत हादसे में हुई है, तो बीमा राशि का भुगतान नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
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आयोग ने बीमा कंपनी को एक माह के भीतर माया देवी को दो लाख रुपये की बीमा राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए। साथ ही वाद दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा है। आयोग ने मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 15 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया है।