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Amroha News: कुत्तों के साथ बंदरों के हमले बढ़े, रोज 250 को लग रहे टीके
Sat, 12 Jul 2025 01:46 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 12 Jul 2025 01:46 AM IST
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अमरोहा। जिले में कुत्तों के साथ बंदरों का भी आतंक लगातार बढ़ रहा है। बंदरों के भी काटे जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं जिससे लोगों में दहशत है।
यह समस्या विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में बढ़ रही है जहां बंदरों की संख्या बढ़ गई है। यह आए दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में रोजाना 250 से ज्यादा लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे है। इनमें करीब आधी संख्या बंदरों के काटने वालों की होती है।
जिले में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए लोगों में दहशत का माहौल है। जिम्मेदारों की ओर से कुत्ते और बंदरों को पकड़ने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। सरकारी आंकड़ें इस बात की गवाही दे रहे हैं, रोजाना करीब ढाई सौ व्यक्तियों को हमला करके उन्हें जख्मी कर रहे हैं। जिनको सरकारी अस्पतालों में रैबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। आवारा कुत्ते-बंदरों से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने भी कोई ठोस इंतजाम नहीं किया है। अमरोहा नगर में भी कुत्ते और बंदर काफी संख्या में हैं। जिन्होंने नगर में आतंक बरपा रखा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में 180 लोगों ने एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाई, इनमें 100 मरीज बंदर के कटाने से घायल थे।
धनौरा में रोज 40 से ज्यादा लगवा रहे इंजेक्शन
मंडी धनौरा। क्षेत्र में कुत्तों से अधिक बंदरों का आतंक है। नगर व ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी अस्पताल में पिछले करीब एक माह से कुत्तों से अधिक बंदर काटने के रोगी आ रहे हैं। किसान संगठन भी कई बार प्रशासन से बंदरों को पकड़े जाने की मांग कर चुके हैं। सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या रोजाना करीब 45-50 है। सरकारी अस्पताल में मरीज को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाने वाले मोहित का कहना है कि इस समय करीब 60 प्रतिशत रोगी बंदरों के काटे आ रहे हैं जबकि 40 प्रतिशत मरीज कुत्ते काटे के हैं। 20 दिन पहले ग्राम चुचैला कलां में आफरीन नामक महिला के घर में घुस कर बंदरों ने उसे व उसके दो बच्चों को काट लिया था। किसान संगठन कई बार बंदरों को पकड़ने की मांग कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दूसरी ओर कुत्ते भी खूंखार हो रहे हैं। करीब तीन माह पहले पालिका प्रशासन द्वारा गली में घूमने वाले कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया गया था। पूर्व डिप्टी सीएमओ राम जी वर्मा का कहना है कि को लोगों को बंदरों को खाने के लिए कुछ भी नहीं देना चाहिए।
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हसनपुर में भी बढ़े बंदर के काटने के मामले
हसनपुर। सीएचसी में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने वाले मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। सीएचसी प्रभारी डॉ. ध्रुवेंद्र सिंह ने बताया कि रोजाना 60 से 70 मरीज इंजेक्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत मरीज बंदर के काटने के कारण आते हैं। शुक्रवार को भी सीएचसी हसनपुर में 65 मरीजों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। यह समस्या केवल हसनपुर तक ही सीमित नहीं है। सीएचसी ढबारसी व रहरा में भी प्रतिदिन 25 से 30 मरीज एंटी-रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं।
गजरौला सीएचसी में एंटी रैबीज की 400 डोज उपलब्ध
सीएचसी में कुत्ते और बंदर काटे लोगों का इलाज करने के लिए पुख्ता इंतजाम हैं। यहां पर प्रतिदिन 40 से 70 लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। इनमें कई लोग गीदड़ के काटे हुए भी होते हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि इस समय सीएचसी में 400 डोज उपलब्ध हैं। हसनपुर व रहरा तक के लोग भी इंजेक्शन लगवाने आते हैं।
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यह समस्या विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में बढ़ रही है जहां बंदरों की संख्या बढ़ गई है। यह आए दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में रोजाना 250 से ज्यादा लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे है। इनमें करीब आधी संख्या बंदरों के काटने वालों की होती है।
जिले में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए लोगों में दहशत का माहौल है। जिम्मेदारों की ओर से कुत्ते और बंदरों को पकड़ने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। सरकारी आंकड़ें इस बात की गवाही दे रहे हैं, रोजाना करीब ढाई सौ व्यक्तियों को हमला करके उन्हें जख्मी कर रहे हैं। जिनको सरकारी अस्पतालों में रैबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। आवारा कुत्ते-बंदरों से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने भी कोई ठोस इंतजाम नहीं किया है। अमरोहा नगर में भी कुत्ते और बंदर काफी संख्या में हैं। जिन्होंने नगर में आतंक बरपा रखा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में 180 लोगों ने एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाई, इनमें 100 मरीज बंदर के कटाने से घायल थे।
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धनौरा में रोज 40 से ज्यादा लगवा रहे इंजेक्शन
मंडी धनौरा। क्षेत्र में कुत्तों से अधिक बंदरों का आतंक है। नगर व ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी अस्पताल में पिछले करीब एक माह से कुत्तों से अधिक बंदर काटने के रोगी आ रहे हैं। किसान संगठन भी कई बार प्रशासन से बंदरों को पकड़े जाने की मांग कर चुके हैं। सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या रोजाना करीब 45-50 है। सरकारी अस्पताल में मरीज को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाने वाले मोहित का कहना है कि इस समय करीब 60 प्रतिशत रोगी बंदरों के काटे आ रहे हैं जबकि 40 प्रतिशत मरीज कुत्ते काटे के हैं। 20 दिन पहले ग्राम चुचैला कलां में आफरीन नामक महिला के घर में घुस कर बंदरों ने उसे व उसके दो बच्चों को काट लिया था। किसान संगठन कई बार बंदरों को पकड़ने की मांग कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दूसरी ओर कुत्ते भी खूंखार हो रहे हैं। करीब तीन माह पहले पालिका प्रशासन द्वारा गली में घूमने वाले कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया गया था। पूर्व डिप्टी सीएमओ राम जी वर्मा का कहना है कि को लोगों को बंदरों को खाने के लिए कुछ भी नहीं देना चाहिए।
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हसनपुर में भी बढ़े बंदर के काटने के मामले
हसनपुर। सीएचसी में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने वाले मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। सीएचसी प्रभारी डॉ. ध्रुवेंद्र सिंह ने बताया कि रोजाना 60 से 70 मरीज इंजेक्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत मरीज बंदर के काटने के कारण आते हैं। शुक्रवार को भी सीएचसी हसनपुर में 65 मरीजों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। यह समस्या केवल हसनपुर तक ही सीमित नहीं है। सीएचसी ढबारसी व रहरा में भी प्रतिदिन 25 से 30 मरीज एंटी-रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं।
गजरौला सीएचसी में एंटी रैबीज की 400 डोज उपलब्ध
सीएचसी में कुत्ते और बंदर काटे लोगों का इलाज करने के लिए पुख्ता इंतजाम हैं। यहां पर प्रतिदिन 40 से 70 लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। इनमें कई लोग गीदड़ के काटे हुए भी होते हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि इस समय सीएचसी में 400 डोज उपलब्ध हैं। हसनपुर व रहरा तक के लोग भी इंजेक्शन लगवाने आते हैं।