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Amroha: आरिफ मोहम्मद बोले- मातृ शक्ति भारतीय संस्कृति की धरोहर बन जाए तो आने वाली नस्लें खुद सुधर जाएंगी
Sat, 13 Jul 2024 11:08 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, रजबपुर (अमरोहा)
अमर उजाला ब्यूरो, रजबपुर (अमरोहा)
Published by: अनुज कुमार
Updated Sat, 13 Jul 2024 11:08 PM IST
सार
अमरोहा में गुरुकुल चोटीपुरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि मातृ शक्ति भारतीय संस्कृति की धरोहर बन जाए तो आने वाली नस्लें खुद सुधर जाएंगी।
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आरिफ मोहम्मद
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारतीय संस्कृति को ज्ञान की संस्कृति कहा जाता है। भारतीय संस्कृति ऐसी है कि काले, गोरे, भाषा, उपसना, श्रद्धा को समेटे हुए है। ऐसे में दुनिया भारत को विश्व गुरु नहीं कहेगी तो क्या कहेगी। कहा कि यदि मातृ शक्ति इस संस्कृति की धरोहर बन जाए आने वाली नस्लें खुद ही सुधर जाएंगी। उन्होंने ये विचार शनिवार को गुरुकुल चोटीपुरा में आयोजित हुए कार्यक्रम रखे।
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श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल विद्यालय में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर राष्ट्रीय वसुधैव कुटुम्बकम संगोष्ठी में में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि बहुत महत्वपूर्ण विषय है वसुधैव कुटुम्बकम। जो जी-20 का धैय वाक्य भी था। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने छात्राओं से कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार क्या है, इंसान अकेले नहीं रह सकता है। उसे समाज के साथ-साथ आधार भी चाहिए। सत्ता और धन से प्राप्त साधन, मनुष्य द्वारा पैदा की गई चीज ज्यादा शक्तिशाली नहीं हो सकते हैं।
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वैदिक संस्कृति पर उन्होंने कि आदी शंकराचार्य ने पूरे देश में चार मठ स्थापित किए। जिसके आधार पर आध्यात्मिक संस्कृति का सूत्र पैदा किया। कहा कि ऐसे लोगों के व्यवहार पर शर्म आती है। जहां बेटी को दहेज के नाम पर जला दिया जाता है। लेकिन, भारतीय संस्कृति में आज भी बेटी पैदा होने पर कहते हैं लक्ष्मी पैदा हुई है। बेटियों में सरस्वती देखते हैं। लेकिन, उनका अनादर करना सही व्यवहार नहीं है। सांस्कृतिक और सभ्यता मूल्य अलग हैं। आदर्श के रूप में सिद्धांतों को नकार नहीं सकते हैं।
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भारतीय संस्कृति ऐसी है कि काले, गोरे, भाषा, उपसना, श्रद्धा समेटे हुए है। आत्मा के बंधन से सभी बंधे हुए है। दुनिया भूखी है, इसके लिए। हमारी संस्कृति में महिला और पुरुष ही नहीं, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों में आत्मा को देखा है। कहा कि यहां केवल एक जन्म नहीं है। कोई जन्म ऐसा भी हो सकता है, पत्थर में ठोकर मार रहे हो, उसमें अहिल्या हो सकती है।
इससे पूर्व गुरुकुल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर व मुंबई से आए साहित्यकार भी सम्मानित हुए। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई व श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस अवसर पर गुरुकुल की प्राचार्या डॉ. आचार्या सुमेधा, डॉ. राजीव त्यागी, डॉ. यतींद्र कटारिया, एडीएम सुरेंद्र सिंह, एएसपी राजीव कुमार व राहुल अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।