नवरात्र पर मां दुर्गा की आराधना में अमरोहा के ढोलक और तबले की थाप सुनाई पड़ेगी। अमरोहा में बने ढोलक और तबलों की खेप विदेशों और देश के तमाम शहरों में पहुंच चुकी है। उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पटना, कोलकाता और राजस्थान से सबसे अधिक मांग है। रोजाना करीब दो हजार ढोलक, तबले, डमरू व अन्य म्यूजिक इंस्ट्रूमेट की सप्लाई हो रही है।
अमरोहा में बनने वाले ढोलक और तबले देश दुनिया में प्रसिद्ध हैं। सालों से चला आ रहा ये काम आज भी हो रहा है। यहां बने ढोलक सऊदी अरब, कनाडा, यूएस, ईरान सहित दूसरे देशों में भेजे जाते हैं, जो संगीत की दुनिया में अमरोहा की शान बढ़ाते हैं। यही ढोलक और तबले नवरात्र पर भी अमरोहा की पहचान बनते हैं। कोरोना महामारी ने ढोलक कारोबार को भी प्रभावित किया था, लेकिन अब फिर से चमक लौट आई है। 26 सितंबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्रों पर ढोलक, नाल, तबला और डमरू की सबसे अधिक मांग है। इसके अलावा पखावत की भी मांग बढ़ी है। कारोबारियों के मुताबिक शहर में 300 इकाइयां हैं। डिमांड के अनुसार रोजाना करीब दो हजार ढोलक-तबलों के अलावा लकड़ी के म्यूजिक इंस्ट्रूमेट सप्लाई की जा रही है। इसमें सबसे ज्यादा आर्डर नामचीन जागरण पार्टियों की तरफ से मिल रहे हैं।
वैसे तो देशभर में नवरात्र पर ढोलक-तबले की सप्लाई होती है लेकिन इस बार उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पटना, कोलकाता और राजस्थान से सबसे अधिक मांग आई है। यहां से रोजाना करीब पांच से छह लाख रुपये की कीमत के ढोलक तबले के अलावा लकड़ी के म्यूजिक इंस्ट्रूमेट डिमांड के अनुसार भेजे जा रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद एक बार फिर से कारोबार पर चमक आई है।-शक्ति कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष, लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन