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राजस्व अभिलेखागार में रखी साढ़े तीन करोड़ की भूमि के अभिलेखों से छेड़छाड़ का आरोप

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 28 Sep 2022 01:30 AM IST
सार

अमरोहा कलक्ट्रेट में स्थित राजस्व अभिलेखागार में रखी करीब साढ़े तीन करोड़ की भूमि से संबंधित खतौनी से छेड़छाड़ कर भूमि की खतौनी में जालसाजी से नाम दर्ज कराने का प्रयास करने का मामला सामने आया है।इसी बीच जांच अधिकारी का स्थानांतरण हो गया था।

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Accused of tampering with the records of land worth three and a half crores kept in the revenue archives

विस्तार

अमरोहा कलक्ट्रेट में स्थित राजस्व अभिलेखागार में रखी करीब साढ़े तीन करोड़ की भूमि से संबंधित खतौनी से छेड़छाड़ कर भूमि की खतौनी में जालसाजी से नाम दर्ज कराने का प्रयास करने का मामला सामने आया है। मामले की शिकायत जिलाधिकारी से किए जाने के बाद उसकी एक वर्ष से जांच चल रही है। कई जांच अधिकारी बदल दिए गए हैं। अधिकारी पूरे मामले पर पर्दा डालने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। पीड़ित ने जिलाधिकारी से फिर मामले की शिकायत की है।
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सैदनगली निवासी आलोक कुमार गर्ग ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर कहा कि हसनपुर में दस जनवरी 2020 को दिल्ली के पंचशील अपार्टमेंट द्वारिका निवासी तनुप्रिया अग्रवाल, यामिनी अग्रवाल और तपोवर्धन अग्रवाल से गाटा संख्या 386 में 3.800 हेक्टेयर करीब साठ बीघा भूमि खरीदी थी। जिसका दाखिला खारिज भी हो चुका है। भूमि पर पूर्ण कब्जा व दखल है।
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आरोप है कि 15 जनवरी 2020 को किसी जालसाज ने राजस्व लेखागार में रखे भूमि की खतौनी में छेड़छाड़ कराई। अपने नाम का कूट रचित अभिलकेख फाइल में लगा दिया और उसकी सर्टिफाइड कॉपी निकलवाकर हसनपुर तहसील में भूमि की खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने के लिए पहुंच गया। इसकी भनक लगने पर मौके पर पहुंचे तो आरोपी वहां से भाग गया। मामले की शिकायत 13 जुुलाई 2021 को जिलाधिकारी से की गई थी।
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डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच इंद्रनंदन तत्कालीन प्रभारी अधिकारी राजस्व अभिलेखागार को सौंपी थी। उन्होंने जांच के बाद रिपोर्ट डीएम को प्रेषित कर दी थी। आलोक कुमार गर्ग ने बताया कि जांच में कूट रचित दस्तावेजों की पुष्टि हुई थी। इसी बीच जांच अधिकारी का स्थानांतरण हो गया था।

इसके बाद भूमि स्वामी ने 25 अप्रैल 2022 को फिर डीएम से की। तो डीएम ने प्रकरण की जांच एडीएम भगवानसरण को सौंपी। शुरू भी नहीं हुई थी जांच को फिर प्रभारी अधिकारी राजस्व लेखागार अनिल कुमार को सौंप दिया गया था। उन्हें भी तमाम अभिलेख उपलब्ध कराए। इसके बाद जांच अधिकारी का फिर स्थानांतरण हो गया। करीब एक वर्ष से अधिक का समय बीत गया है। मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। जिससे जालसाजों के हौसले बुलंद हैं।
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