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गंगा के गिरते जलस्तर से फिर शुरु हुआ कटान
Updated Mon, 10 Sep 2018 01:20 AM IST
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गजरौला (अमरोहा)। गंगा उफनती है तो आफत लेकर आती है और उफान में गिरावट भी तमाम दुश्वारियां देता है। ऐसा ही कुछ खादर में हो रहा है। अब गिरता जलस्तर खेतों का कटान कर रहा है। वहीं पपसरा रिंग तटबंध की ठोकर नंबर पांच पर फिर से कटान होने लगा है। बाढ़ खंड ने भी कटान निरोधी कार्य बंद कर दिए है।
रविवार को बिजनौर बैराज से 69297 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जिसके चलते तिगरी में गंगा का जलस्तर दस सेमी की कमी के साथ 199.70 मीटर पर जा ठहरा। हालांकि जलस्तर का यह आंकड़ा भी चिंता जनक है। इसके अलावा गंगा ने एक बार फिर से कटान करना शुरू कर दिया है। खादर में खेतों का गंगा जमकर कटान कर रही है। धीरे धीरे खेत गंगा में समा रहे हैं। किसानों ने कटान की आशंका को देखते हुए अपनी फसल पहले ही उजाड़ ली थी। जितना कटान आगे बढ़ता है किसान भी उतना ही खेत खाली कर देते हैं। उधर पपसरा रिंग तटबंध की ठोकर नंबर पांच और उसके आस पास कटान तेजी से हो है। पिछले दिनों बाढ़ नियंत्रण ने यहां पर कटान निरोधी कार्य किया था लेकिन, अब यह बंद पड़ा है। कटान सुचारु रुप से चालू है। पपसरा खादर के निवासियों को ठोकर के कटने का डर बना हुआ है। क्योंकि तटबंध से गंगा की धार केवल पचास मीटर दूर ही बह रही है। इसके साथ ही खादर के आठ गांव के जंगल में पानी जस का तस बना हुआ है। कुछ सेमी मीटर की कमी से खादर की बाढ़ में कोई खास फर्क नहीं आया है। खादर के निवासी अभी भी बाढ़ से जूझ रहे हैं।
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रविवार को बिजनौर बैराज से 69297 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जिसके चलते तिगरी में गंगा का जलस्तर दस सेमी की कमी के साथ 199.70 मीटर पर जा ठहरा। हालांकि जलस्तर का यह आंकड़ा भी चिंता जनक है। इसके अलावा गंगा ने एक बार फिर से कटान करना शुरू कर दिया है। खादर में खेतों का गंगा जमकर कटान कर रही है। धीरे धीरे खेत गंगा में समा रहे हैं। किसानों ने कटान की आशंका को देखते हुए अपनी फसल पहले ही उजाड़ ली थी। जितना कटान आगे बढ़ता है किसान भी उतना ही खेत खाली कर देते हैं। उधर पपसरा रिंग तटबंध की ठोकर नंबर पांच और उसके आस पास कटान तेजी से हो है। पिछले दिनों बाढ़ नियंत्रण ने यहां पर कटान निरोधी कार्य किया था लेकिन, अब यह बंद पड़ा है। कटान सुचारु रुप से चालू है। पपसरा खादर के निवासियों को ठोकर के कटने का डर बना हुआ है। क्योंकि तटबंध से गंगा की धार केवल पचास मीटर दूर ही बह रही है। इसके साथ ही खादर के आठ गांव के जंगल में पानी जस का तस बना हुआ है। कुछ सेमी मीटर की कमी से खादर की बाढ़ में कोई खास फर्क नहीं आया है। खादर के निवासी अभी भी बाढ़ से जूझ रहे हैं।
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