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नगर पालिका की 300 दुकानें शक के दायरे, किराएदारों ने बैठाए किराएदार
Updated Tue, 13 Jun 2017 02:23 AM IST
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300 दुकानें शक के दायरे में, किराएदारों ने किराए पर दी दुकान
खुद के काम करने की बजाय दूसरों को किराए पर उठाईं पालिका की दुकानें
फर्जीवाड़ा खुलने के बाद विभाग ने खामोशी से शुरू कराई जांच पड़ताल
हर माह किराएदार की बजाय कब्जेदारों से किराया वसूलकर ला रहे कर्मी
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
नगर पालिका परिषद की दुकान का फर्जीवाड़ा कर बैनामा कराने के बाद अफसरों के चेहरों की रंगत उड़ी है। करीब 300 दुकानें शक के दायरे में आ गई हैं। किराएदारों ने अपने स्तर से ही किराए पर दुकानें उठा दी हैं। खुद के काम करने की बजाय दूसरों को कब्जेदार बना दिया है। हैरानी की बात ये है कि पालिका कर्मचारियों ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। जानने के बाद भी दुकानें खाली कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। कब्जेदारों से ही किराया वसूल रहे हैं, लेकिन अब अफसरों ने जांच कर ऐसे किराएदारों को बेदखल करने की प्रक्रिया छेड़ दी है।
शहर में नगर पालिका परिषद की तकरीबन 700 दुकानें हैं, जिन्हें उसने किराए पर उठा रखा है। 99 साल के लिए अलाट कर रखी हैं। ज्यों-ज्यों पालिका का दायरा बढ़ रहा है त्यों-त्यों दुकानों की कीमत महंगी होती जा रही है, लेकिन पालिका उनसे अभी तक 12 से लेकर 50 रुपये तक ही माह में किराया वसूल रही है। यहां बता दें कि पालिका की कुछ दिन पहले अर्जुन टाकिज मार्केट में स्थित दुकान का कुछ लोगों ने फर्जी बैनामा करा लिया था, जिसका खुलासा होने के बाद पालिका अधिकारियों ने रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
फर्जीवाड़े के इस खेल के खुलने पर अधिकारी सतर्क हो गए हैं। उन्होंने अन्य दुकानों की सच्चाई जानने की कोशिश की तो नया ही माजरा सामने आ गया। लगभग 300 दुकानें ऐसी बताई जा रही हैं, जिनके किराएदार और हैं, जबकि मौके पर किसी और का कब्जा है। सूत्रों पर भरोसा करें तो दुकानों को किराएदारों ने ही किराए पर उठा रखा है। किराया देने का कार्य कब्जेदार कर रहे हैं। यह पूरा खेल पालिका कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते हो रहा है। उनकी शह पर ही कब्जेदार दुकानों पर जमे हैं। किराए का भुगतान कर्मी कब्जेदारों से लेकर आ रहे हैं, किन्तु सच्चाई सामने आने के बाद ऐसी दुकानों को कब्जामुक्त कराने की प्रक्रिया चल रही है। एक-एक दुकान को चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही ऐसे किराएदारों से दुकानें छीनी जाएंगी।
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बयान.....
- दुकान बेचने की जांच तो अभी चल रही है। जिन दुकानों पर किराएदार की बजाय दूसरे लोग काबिज हैं, उनको चिह्नित कराया जा रहा है। सूचीबद्ध करने के बाद उनके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई होगी।
- महेंद्र कुमार, कर निर्धारण अधिकारी।
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खुद के काम करने की बजाय दूसरों को किराए पर उठाईं पालिका की दुकानें
फर्जीवाड़ा खुलने के बाद विभाग ने खामोशी से शुरू कराई जांच पड़ताल
हर माह किराएदार की बजाय कब्जेदारों से किराया वसूलकर ला रहे कर्मी
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
नगर पालिका परिषद की दुकान का फर्जीवाड़ा कर बैनामा कराने के बाद अफसरों के चेहरों की रंगत उड़ी है। करीब 300 दुकानें शक के दायरे में आ गई हैं। किराएदारों ने अपने स्तर से ही किराए पर दुकानें उठा दी हैं। खुद के काम करने की बजाय दूसरों को कब्जेदार बना दिया है। हैरानी की बात ये है कि पालिका कर्मचारियों ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। जानने के बाद भी दुकानें खाली कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। कब्जेदारों से ही किराया वसूल रहे हैं, लेकिन अब अफसरों ने जांच कर ऐसे किराएदारों को बेदखल करने की प्रक्रिया छेड़ दी है।
शहर में नगर पालिका परिषद की तकरीबन 700 दुकानें हैं, जिन्हें उसने किराए पर उठा रखा है। 99 साल के लिए अलाट कर रखी हैं। ज्यों-ज्यों पालिका का दायरा बढ़ रहा है त्यों-त्यों दुकानों की कीमत महंगी होती जा रही है, लेकिन पालिका उनसे अभी तक 12 से लेकर 50 रुपये तक ही माह में किराया वसूल रही है। यहां बता दें कि पालिका की कुछ दिन पहले अर्जुन टाकिज मार्केट में स्थित दुकान का कुछ लोगों ने फर्जी बैनामा करा लिया था, जिसका खुलासा होने के बाद पालिका अधिकारियों ने रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
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फर्जीवाड़े के इस खेल के खुलने पर अधिकारी सतर्क हो गए हैं। उन्होंने अन्य दुकानों की सच्चाई जानने की कोशिश की तो नया ही माजरा सामने आ गया। लगभग 300 दुकानें ऐसी बताई जा रही हैं, जिनके किराएदार और हैं, जबकि मौके पर किसी और का कब्जा है। सूत्रों पर भरोसा करें तो दुकानों को किराएदारों ने ही किराए पर उठा रखा है। किराया देने का कार्य कब्जेदार कर रहे हैं। यह पूरा खेल पालिका कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते हो रहा है। उनकी शह पर ही कब्जेदार दुकानों पर जमे हैं। किराए का भुगतान कर्मी कब्जेदारों से लेकर आ रहे हैं, किन्तु सच्चाई सामने आने के बाद ऐसी दुकानों को कब्जामुक्त कराने की प्रक्रिया चल रही है। एक-एक दुकान को चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही ऐसे किराएदारों से दुकानें छीनी जाएंगी।
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- दुकान बेचने की जांच तो अभी चल रही है। जिन दुकानों पर किराएदार की बजाय दूसरे लोग काबिज हैं, उनको चिह्नित कराया जा रहा है। सूचीबद्ध करने के बाद उनके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई होगी।
- महेंद्र कुमार, कर निर्धारण अधिकारी।