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ओसीता जग्देपुर के खेतों में घुसा बाढ़ का पानी, बढ़ी परेशानी
Updated Fri, 14 Jul 2017 02:10 AM IST
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गन्ना व धान की हजारों बीघा फसल पर बाढ़ के पानी का कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से पिछले कई दिनों से खादर क्षेत्र में मंडरा रहे बाढ़ के खतरा अब असर दिखाने लगा है। गुरुवार को गंगा का पानी ओसीता जग्देपुर के जंगल में घुस गया। गन्ने व धान की फसलों में ढाई फीट तक पानी पहुंच गया है। इससे किसानों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। यदि आठ दस दिन तक पानी यूं ही खेतों रुका रहा है, तो फसलें तबाह हो जाएंगीं। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे गांवों की ओर रुख करने लगा है।
तिगरी से कांकाठेर के बीच पड़ने वाले गांव ओसीता जग्देपुर के जंगल में हर साल बाढ़ का पानी सबसे पहले घुस जाता है। अभी तिगरी गंगा का जलस्तर दो सौ गेज मीटर के पार ही हुआ था, कि बाढ़ का पानी ओसीता जग्देपुर के जंगल में घुस गया। गंगा किनारे बोई गईं किसानों की हजारों बीघा भूमि पर खड़ी गन्ने व धान की फसलों में करीब ढाई फीट तक पानी घुस गया है। यदि पानी यूं ही बढ़ता रहा तो फसलों पर संकट और बढ़ जाएगा। किसानों को खेत से चारा लाने में परेशानी हो रही है। नीचे रास्ते पर तीन से चार फीट तक पानी जमा हो गया है। रास्ते से पैदल गुजरना तो बहुत मुश्किल हो गया है। भैंसा बुग्गी से ही चारा लाना आसान नहीं रह गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से पिछले कई दिनों से खादर क्षेत्र में मंडरा रहे बाढ़ के खतरा अब असर दिखाने लगा है। गुरुवार को गंगा का पानी ओसीता जग्देपुर के जंगल में घुस गया। गन्ने व धान की फसलों में ढाई फीट तक पानी पहुंच गया है। इससे किसानों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। यदि आठ दस दिन तक पानी यूं ही खेतों रुका रहा है, तो फसलें तबाह हो जाएंगीं। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे गांवों की ओर रुख करने लगा है।
तिगरी से कांकाठेर के बीच पड़ने वाले गांव ओसीता जग्देपुर के जंगल में हर साल बाढ़ का पानी सबसे पहले घुस जाता है। अभी तिगरी गंगा का जलस्तर दो सौ गेज मीटर के पार ही हुआ था, कि बाढ़ का पानी ओसीता जग्देपुर के जंगल में घुस गया। गंगा किनारे बोई गईं किसानों की हजारों बीघा भूमि पर खड़ी गन्ने व धान की फसलों में करीब ढाई फीट तक पानी घुस गया है। यदि पानी यूं ही बढ़ता रहा तो फसलों पर संकट और बढ़ जाएगा। किसानों को खेत से चारा लाने में परेशानी हो रही है। नीचे रास्ते पर तीन से चार फीट तक पानी जमा हो गया है। रास्ते से पैदल गुजरना तो बहुत मुश्किल हो गया है। भैंसा बुग्गी से ही चारा लाना आसान नहीं रह गया है।
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