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घटा जलस्तर, लेकिन भरा है फसलों में बाढ़ का पानी
Updated Tue, 18 Jul 2017 02:31 AM IST
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छठे दिन भी ओसीता जग्देपुर के खेतों में बाढ़ का पानी बरकरार
सोमवार को भी डैम से छोड़ा गया करीब 85 हजार क्यूसेक पानी
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा के जलस्तर में पिछले तीन दिन कमी दर्ज की जा रही है, बावजूद इसके लगातार छठे दिन भी क्षेत्र के गांव ओसीता जग्देपुर के खेतों में भरा हुआ है। इससे किसानों की बैचेनी नहीं थम रही है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। सोमवार को भी हरिद्वार और बिजनौर बैराज से करीब 85 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिसका असर मंगलवार को दिखाई दे सकता है। अभी भी जलस्तर 200 गेज मीटर के ऊपर बना हुआ है। खादर क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है।
चार दिन पहले गंगा का जलस्तर 201 गेज मीटर से कुछ ही नीचे रह गया था। इसके बाद धीरे-धीरे जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि जलस्तर घटने से खादर क्षेत्र के किसानों को थोड़ी सी राहत जरूर महसूस कर रहे हैं, लेकिन इससे बाढ़ की आशंका को लेकर बनी परेशानी कम नहीं हो रही है। गांव ओसीता जग्देपुर के जंगल में बाढ़ का पानी छठे दिन भी भरा हुआ है। धान व गन्ने की लहलहा रही फसलों पर नष्ट होने का संकट मंडरा रहा है। इससे खेतों से चारा लाने में काफी परेशानी हो रही है। हालांकि रास्तों से पानी थोड़ा कम हो गया है। उधर, सोमवार को भी हरिद्वार व बिजनौर बैराज से करीब 85 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जिसका असर मैदानी इलाकों में सोमवार तड़के तक दिखाई दे सकता है। बाढ़ अफसरों की मानें तो अभी तो बस शुरूआत हुई, पहाड़ी इलाकों में मानसून लगातार बना हुआ है। वहां तेज बरसात हुई तो गंगा का जलस्तर फिर बढ़ेगा। रविवार को ब्रजघाट में 199.90 व तिगरी में 200.20 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो सोमवार तड़के थोड़ा नीचे जरूर खिसका लेकिन दोपहर तक फिर वहीं पहुंच गया। अभी गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। जलस्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र के किसानों में बैचेनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि प्रशासन बाढ़ की स्थिति से निपटने को तैयार है।
गंगा के जलस्तर में कोई गिरावट दर्ज नहीं हुई, डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। जलस्तर बढ़ने की आशंका लगातार बनी हुई है। बाढ़ की स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
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- प्रदीप कुमार, जेई, बाढ़ खंड तिगरी।
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सोमवार को भी डैम से छोड़ा गया करीब 85 हजार क्यूसेक पानी
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा के जलस्तर में पिछले तीन दिन कमी दर्ज की जा रही है, बावजूद इसके लगातार छठे दिन भी क्षेत्र के गांव ओसीता जग्देपुर के खेतों में भरा हुआ है। इससे किसानों की बैचेनी नहीं थम रही है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। सोमवार को भी हरिद्वार और बिजनौर बैराज से करीब 85 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिसका असर मंगलवार को दिखाई दे सकता है। अभी भी जलस्तर 200 गेज मीटर के ऊपर बना हुआ है। खादर क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है।
चार दिन पहले गंगा का जलस्तर 201 गेज मीटर से कुछ ही नीचे रह गया था। इसके बाद धीरे-धीरे जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि जलस्तर घटने से खादर क्षेत्र के किसानों को थोड़ी सी राहत जरूर महसूस कर रहे हैं, लेकिन इससे बाढ़ की आशंका को लेकर बनी परेशानी कम नहीं हो रही है। गांव ओसीता जग्देपुर के जंगल में बाढ़ का पानी छठे दिन भी भरा हुआ है। धान व गन्ने की लहलहा रही फसलों पर नष्ट होने का संकट मंडरा रहा है। इससे खेतों से चारा लाने में काफी परेशानी हो रही है। हालांकि रास्तों से पानी थोड़ा कम हो गया है। उधर, सोमवार को भी हरिद्वार व बिजनौर बैराज से करीब 85 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जिसका असर मैदानी इलाकों में सोमवार तड़के तक दिखाई दे सकता है। बाढ़ अफसरों की मानें तो अभी तो बस शुरूआत हुई, पहाड़ी इलाकों में मानसून लगातार बना हुआ है। वहां तेज बरसात हुई तो गंगा का जलस्तर फिर बढ़ेगा। रविवार को ब्रजघाट में 199.90 व तिगरी में 200.20 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो सोमवार तड़के थोड़ा नीचे जरूर खिसका लेकिन दोपहर तक फिर वहीं पहुंच गया। अभी गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। जलस्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र के किसानों में बैचेनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि प्रशासन बाढ़ की स्थिति से निपटने को तैयार है।
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गंगा के जलस्तर में कोई गिरावट दर्ज नहीं हुई, डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। जलस्तर बढ़ने की आशंका लगातार बनी हुई है। बाढ़ की स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
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- प्रदीप कुमार, जेई, बाढ़ खंड तिगरी।