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गोशाला में भूखे बंधे गोवंश, दो दिन से नहीं मिला भूसा
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गजरौला। ब्लाक क्षेत्र के गांव मझोला में बनी गोशाला में गोवंशीय पशु दो दिनों से भूखे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान से शिकायत के बाद भी भूसे की कोई व्यवस्था नहीं हुई। अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है।
गांव मझोला में गजरौला ब्लाक की गोशाला बनी हुई है। इस गोशाला में छह फरवरी को पशुपालन विभाग की ओर से 22 गोवंशीय पशु छोड़े गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि छह फरवरी को ग्राम प्रधान की ओर से करीब दो क्विंटल भूसे का प्रबंध किया गया था। इस भूसे को पशुओं ने रविवार को समाप्त कर दिया था। रविवार से गोशाला में वह भूखे बंधे है। पशुओं की देखभाल को तैनात कर्मचारी भी खाली बैठा है। ग्रामीण अनुज कुमार, पवन सिंह, बबीता कुमार, संजीव सिंह, ऋषिपाल सिंह, शूरवीर सिंह, गौतम कुमार, नवनीत सिंह आदि का आरोप है कि रविवार को ही ग्राम प्रधान को भी भूसा समाप्त होने के बारें में बता दिया था। इसके बाद भी कोई प्रबंध नहीं हुआ है।
ठंड से बचाव को नहीं कोई व्यवस्था
ग्रामीणों का आरोप है कि गोवंशीय पशुओं को बांधने के लिए टीनशेड का हॉल बनाया गया था। इसमें खुले में ही गोवंशीय पशु बंधे रहते हैं। आरोप है कि सामने की खुली हवा लगती है। ठंड से बचाव के लिए हॉल के आगे तिरपाल नहीं है और नीचे बैठने के लिए सूखी पत्ती भी नहीं है।
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जंगल में घूम रहे अन्य गोशाला के गोवंशीय पशु
ग्रामीणों ने बताया कि पशुपालन विभाग जिन पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ते हैं, उनके कान में उनके पंजीकरण संख्या का बिल्ला लगा देते हैं। गांव में करीब आधा दर्जन से अधिक आवारा गोवंशीय पशु घूम रहे हैं। अन्य किसी गोशाला से निकल आए और फसल को तबाह कर रहे हैं। उन्होंने खुले में घूम रहे गोवंशीय पशुओं को पकड़वाने की मांग की है।
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गांव मझोला में गजरौला ब्लाक की गोशाला बनी हुई है। इस गोशाला में छह फरवरी को पशुपालन विभाग की ओर से 22 गोवंशीय पशु छोड़े गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि छह फरवरी को ग्राम प्रधान की ओर से करीब दो क्विंटल भूसे का प्रबंध किया गया था। इस भूसे को पशुओं ने रविवार को समाप्त कर दिया था। रविवार से गोशाला में वह भूखे बंधे है। पशुओं की देखभाल को तैनात कर्मचारी भी खाली बैठा है। ग्रामीण अनुज कुमार, पवन सिंह, बबीता कुमार, संजीव सिंह, ऋषिपाल सिंह, शूरवीर सिंह, गौतम कुमार, नवनीत सिंह आदि का आरोप है कि रविवार को ही ग्राम प्रधान को भी भूसा समाप्त होने के बारें में बता दिया था। इसके बाद भी कोई प्रबंध नहीं हुआ है।
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ठंड से बचाव को नहीं कोई व्यवस्था
ग्रामीणों का आरोप है कि गोवंशीय पशुओं को बांधने के लिए टीनशेड का हॉल बनाया गया था। इसमें खुले में ही गोवंशीय पशु बंधे रहते हैं। आरोप है कि सामने की खुली हवा लगती है। ठंड से बचाव के लिए हॉल के आगे तिरपाल नहीं है और नीचे बैठने के लिए सूखी पत्ती भी नहीं है।
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जंगल में घूम रहे अन्य गोशाला के गोवंशीय पशु
ग्रामीणों ने बताया कि पशुपालन विभाग जिन पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ते हैं, उनके कान में उनके पंजीकरण संख्या का बिल्ला लगा देते हैं। गांव में करीब आधा दर्जन से अधिक आवारा गोवंशीय पशु घूम रहे हैं। अन्य किसी गोशाला से निकल आए और फसल को तबाह कर रहे हैं। उन्होंने खुले में घूम रहे गोवंशीय पशुओं को पकड़वाने की मांग की है।