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रसोई से बाहर हुआ उज्ज्वला का चूल्हा
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संग्रामपुर (अमेठी)। केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना के लाभार्थी निराश हुए हैं। उनके परिवार की महिलाओं को एक बार फिर से भोजन पकाने के लिए लकड़ी का चूल्हा फूंकना पड़ रहा है। लाभार्थियों का कहना है कि रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच सिलिंडर भरा पाना अब उनके बूते की बात नहीं।
संग्रामपुर क्षेत्र की लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में सिलिंडर और गैस चूल्हा तो मिल गया लेकिन रसोई गैस के बढ़े दाम इसका उपयोग नहीं करने दे रहे। सिलिंडर की महंगाई ने उज्ज्वला योजना के तहत हम लोगों के चूल्हे बुझा दिए हैं। रसोई गैस की कीमत बजट से बाहर हो गई है। जिसकी वजह से चूल्हा फूंकना और हम महिलाओं को धुआं झेलना मजबूरी है। इन पर खाना बनाना रसोई गैस से बेहद सस्ता पड़ता है।
बनबीरपुर, अम्मरपुर, भावलपुर, शुकुलपुर, टिकरिया आदि गांवों में परिवार जहां साल भर पहले साल में करीब पांच से आठ सिलिंडर भराते थे, वहीं अब लोग बमुश्किल दो से तीन सिलिंडर भरा पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का कहना है कि योजना के तहत मिलने वाले सिलिंडर में गैस भरना अब हैसियत से बाहर हो गया है।
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बनवीरपुर निवासी सावित्री देवी ने बताया कि परिवार में छह से सात सदस्य हैं। एक सिलिंडर बमुश्किल महीने भर चल पाता है। ऐसे में चूल्हे में लकड़ियां जलाकर खाना बनाते हैं। गैस का प्रयोग जब परिवार में रिश्तेदार आते हैं तभी करते हैं। नोहरी का पुरवा निवासी उर्मिला देवी ने बताया कि उन्हें उज्ज्वला योजना के तहत सिलिंडर और चूल्हा दिया गया। कुछ दिन तक उन्होंने गैस के चूल्हे पर खाना बनाया। रसोई गैस के बढ़ते दामों के कारण अब सिलिंडर और गैस चूल्हा कोने में रखा है।
पाठक का पुरवा निवासी चंदकला देवी ने बताया कि पहले गैस चूल्हे पर खाना बनाते थे। अब गैस चूल्हे पर खाना बनाना हमारे बस की बात नहीं। घर के बजट के हिसाब से चलना पड़ता है। बघौरा निवासी पार्वती का कहना है कि सरकार के सिलिंडर देने से क्या होगा। अगर आम आदमी उसे महंगाई के चलते प्रयोग ही नहीं कर पाए। योजना के तहत सिलिंडर और चूल्हा मिला। जब तक बजट में था उनका उपयोग भी कर रहे थे लेकिन अब गैस चूल्हा बजट से बाहर हो गया है। फिर से मिट्टी के चूल्हे पर लौट आए हैं।
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संग्रामपुर क्षेत्र की लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में सिलिंडर और गैस चूल्हा तो मिल गया लेकिन रसोई गैस के बढ़े दाम इसका उपयोग नहीं करने दे रहे। सिलिंडर की महंगाई ने उज्ज्वला योजना के तहत हम लोगों के चूल्हे बुझा दिए हैं। रसोई गैस की कीमत बजट से बाहर हो गई है। जिसकी वजह से चूल्हा फूंकना और हम महिलाओं को धुआं झेलना मजबूरी है। इन पर खाना बनाना रसोई गैस से बेहद सस्ता पड़ता है।
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बनबीरपुर, अम्मरपुर, भावलपुर, शुकुलपुर, टिकरिया आदि गांवों में परिवार जहां साल भर पहले साल में करीब पांच से आठ सिलिंडर भराते थे, वहीं अब लोग बमुश्किल दो से तीन सिलिंडर भरा पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का कहना है कि योजना के तहत मिलने वाले सिलिंडर में गैस भरना अब हैसियत से बाहर हो गया है।
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बनवीरपुर निवासी सावित्री देवी ने बताया कि परिवार में छह से सात सदस्य हैं। एक सिलिंडर बमुश्किल महीने भर चल पाता है। ऐसे में चूल्हे में लकड़ियां जलाकर खाना बनाते हैं। गैस का प्रयोग जब परिवार में रिश्तेदार आते हैं तभी करते हैं। नोहरी का पुरवा निवासी उर्मिला देवी ने बताया कि उन्हें उज्ज्वला योजना के तहत सिलिंडर और चूल्हा दिया गया। कुछ दिन तक उन्होंने गैस के चूल्हे पर खाना बनाया। रसोई गैस के बढ़ते दामों के कारण अब सिलिंडर और गैस चूल्हा कोने में रखा है।
पाठक का पुरवा निवासी चंदकला देवी ने बताया कि पहले गैस चूल्हे पर खाना बनाते थे। अब गैस चूल्हे पर खाना बनाना हमारे बस की बात नहीं। घर के बजट के हिसाब से चलना पड़ता है। बघौरा निवासी पार्वती का कहना है कि सरकार के सिलिंडर देने से क्या होगा। अगर आम आदमी उसे महंगाई के चलते प्रयोग ही नहीं कर पाए। योजना के तहत सिलिंडर और चूल्हा मिला। जब तक बजट में था उनका उपयोग भी कर रहे थे लेकिन अब गैस चूल्हा बजट से बाहर हो गया है। फिर से मिट्टी के चूल्हे पर लौट आए हैं।