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Amethi News: उम्र की दीवार टूटी, निरक्षरों ने थामी कलम
Mon, 21 Sep 2026 12:42 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 21 Sep 2026 12:42 AM IST
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भादर के प्राथमिक विद्यालय खानापुर में साक्षरता परीक्षा देती महिलाएं। स्रोत - विभाग
अमेठी सिटी। उम्र के इस पड़ाव पर रविवार को करीब 50 बुजुर्गों ने कलम थामी और परीक्षा दी। उच्च प्राथमिक विद्यालय नरहरपुर में कोई अक्षर पहचानकर धीरे-धीरे जवाब लिख रहा था तो कोई सवाल हल करने में जुटा था। प्रश्नपत्र हल करते समय चेहरे पर सीखने का उत्साह साफ दिखा। नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिले के 470 केंद्रों पर आयोजित उल्लास प्रवेशिका परीक्षा में 2960 निरक्षरों ने प्रतिभाग किया।
नरहरपुर केंद्र पर परीक्षा शुरू होने से पहले ही बुजुर्ग पहुंचने लगे। कक्ष में बैठने के बाद सभी ने प्रश्नपत्र लिया और सवालों को ध्यान से समझा। इसके बाद अपनी समझ के अनुसार जवाब लिखने लगे। राजपती ने कहा कि पहले अपना नाम लिखने में भी मदद लेनी पड़ती थी। अब खुद लिख लेती हैं। केवलादेवी ने बताया कि पढ़ाई सीखने के बाद अक्षर पहचानने में आसानी होने लगी है। अब छोटे शब्द भी पढ़ लेती हैं।
रामपदारथ ने कहा कि शुरुआत में अक्षर समझने और लिखने में परेशानी हुई। लगातार अभ्यास से अब पहले से आसानी होती है। मोहम्मद शफीक ने बताया कि पढ़ना-लिखना सीखने के बाद मोबाइल पर आने वाली जरूरी जानकारी खुद पढ़ लेते हैं। अपना नाम लिखने में भी अब किसी की मदद नहीं लेनी पड़ती।
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परीक्षा के बाद प्रतिभागियों के उत्तरों का मूल्यांकन उल्लास एप पर दर्ज किया जाएगा। मूल्यांकन पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। शिक्षामित्र, अनुदेशक, स्वयंसेवक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निरक्षरों को पढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं।
बीएसए संजय तिवारी ने बताया कि नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत निरक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है। परीक्षा के माध्यम से उनके सीखने के स्तर का आकलन किया जाएगा। शिक्षामित्र, अनुदेशक, स्वयंसेवक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।
3600 निरक्षरों को किया गया चिह्नित
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे लोगों को उल्लास सर्वे एप से चिह्नित किया जाता है, जो पढ़ाई से वंचित रह गए हैं। जिले के सभी 13 ब्लॉकों में करीब 3600 निरक्षरों को चिह्नित किया गया है। इनमें से 2960 लोगों ने रविवार को परीक्षा दी।
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नरहरपुर केंद्र पर परीक्षा शुरू होने से पहले ही बुजुर्ग पहुंचने लगे। कक्ष में बैठने के बाद सभी ने प्रश्नपत्र लिया और सवालों को ध्यान से समझा। इसके बाद अपनी समझ के अनुसार जवाब लिखने लगे। राजपती ने कहा कि पहले अपना नाम लिखने में भी मदद लेनी पड़ती थी। अब खुद लिख लेती हैं। केवलादेवी ने बताया कि पढ़ाई सीखने के बाद अक्षर पहचानने में आसानी होने लगी है। अब छोटे शब्द भी पढ़ लेती हैं।
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रामपदारथ ने कहा कि शुरुआत में अक्षर समझने और लिखने में परेशानी हुई। लगातार अभ्यास से अब पहले से आसानी होती है। मोहम्मद शफीक ने बताया कि पढ़ना-लिखना सीखने के बाद मोबाइल पर आने वाली जरूरी जानकारी खुद पढ़ लेते हैं। अपना नाम लिखने में भी अब किसी की मदद नहीं लेनी पड़ती।
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परीक्षा के बाद प्रतिभागियों के उत्तरों का मूल्यांकन उल्लास एप पर दर्ज किया जाएगा। मूल्यांकन पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। शिक्षामित्र, अनुदेशक, स्वयंसेवक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निरक्षरों को पढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं।
बीएसए संजय तिवारी ने बताया कि नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत निरक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है। परीक्षा के माध्यम से उनके सीखने के स्तर का आकलन किया जाएगा। शिक्षामित्र, अनुदेशक, स्वयंसेवक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।
3600 निरक्षरों को किया गया चिह्नित
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे लोगों को उल्लास सर्वे एप से चिह्नित किया जाता है, जो पढ़ाई से वंचित रह गए हैं। जिले के सभी 13 ब्लॉकों में करीब 3600 निरक्षरों को चिह्नित किया गया है। इनमें से 2960 लोगों ने रविवार को परीक्षा दी।