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छह गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूटा
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05 : जगदीशपुर : डोमाडीह गांव में बरसात के बाद जमा पानी। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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जगदीशपुर (अमेठी)। पिछले दिनों हुई मूसलाधार बरसात के पांच दिन बाद भी क्षेत्र के छह गांव ऐसे हैं जिनका मुख्य मार्ग से संपर्क बहाल नहीं हो पाया है। आलम यह है कि इन गांवों के कई घरों में अब तक बरसात का पानी जमा है। जिससे करीब तीन हजार लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांववासियों के मुताबिक यह स्थिति जगदीशपुर अयोध्या फोर लेन निर्माण में लगी कार्यदायी संस्था की लापरवाही से आई है।
रायबरेली-अयोध्या फोरलेन हाइवे निर्माणाधीन है। यह हाईवे क्षेत्र के कई गांवों से होकर गुजरता है। इसी हाइवे पर कासिमपुर गांव में नाले पर पुल का निर्माण कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। पुल निर्माण के लिए नाला बंद कर दिया गया है।
नाले के दोनों ओर सर्विस लेन बनाई गई है। बरसात से पहले रानीगंज, भीखनपुर, भागीरथपुरम, कटेहटी, डोमाडीह व पूरे नरसिंह आदि गांव के लोग इसी सर्विस लेन का इस्तेमाल कर मुख्य मार्ग पर पहुंचते थे। पिछले हफ्ते करीब 36 घंटे हुई भीषण बरसात के बाद उपरोक्त सभी गांव टापू जैसे लगने लगे हैं।
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गांव के करीब-करीब हर घर में पानी घुस गया और लोगों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया। जिससे इन गांवों के लोग घरों में कैद होकर रह गए। नाले का पानी गांव में जमा हो जाने व सर्विस लेन के बह जाने से लोग करीब पांच-छह किलोमीटर घूमकर मुख्य मार्ग तक पहुंचने को मजबूर हैं।
कार्यदायी संस्था की लापरवाही से बनी स्थिति
जिन गांवों के लोगों का संपर्क अपने गांव के पास मुख्य मार्ग से टूटा है वे इसके लिए हाईवे निर्माण में जुटी कार्यदायी संस्था को दोषी ठहराते हैं। कहते हैं कि यदि पुल जल्दी बनवा कर सर्विस लेन हटा दी गई होती तो जलभराव की स्थिति न आती। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों ओर नाले में सर्विस लेन बनाने से पहले ह्यूम पाइप डाल दी गई होती तो सड़क भी ऊंची होती और पानी भी नीचे से बह जाता। इससे लोगों को दुश्वारियों का सामना नहीं करना पड़ता।
प्रशासन ने नहीं ली सुधि
मोहबतपुर के प्रधान श्रीप्रकाश तिवारी का कहना है कि जलभराव से रास्ता अवरुद्ध होने और घरों में पानी घुसने की जानकारी प्रशासन को दी गई। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
बीमारी फैलने की आशंका
डोमाडीह के कई घरों व उसके आसपास जलभराव की स्थिति है। इसी गांव की भगत पांडेय कहते हैं कि घरों के भीतर घुसे पानी के अभी तक नहीं सूखने से एक ओर मकानों के गिरने का तो दूसरी ओर जलभराव व गंदगी से बीमारी फैलने की आशंका है।
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रायबरेली-अयोध्या फोरलेन हाइवे निर्माणाधीन है। यह हाईवे क्षेत्र के कई गांवों से होकर गुजरता है। इसी हाइवे पर कासिमपुर गांव में नाले पर पुल का निर्माण कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। पुल निर्माण के लिए नाला बंद कर दिया गया है।
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नाले के दोनों ओर सर्विस लेन बनाई गई है। बरसात से पहले रानीगंज, भीखनपुर, भागीरथपुरम, कटेहटी, डोमाडीह व पूरे नरसिंह आदि गांव के लोग इसी सर्विस लेन का इस्तेमाल कर मुख्य मार्ग पर पहुंचते थे। पिछले हफ्ते करीब 36 घंटे हुई भीषण बरसात के बाद उपरोक्त सभी गांव टापू जैसे लगने लगे हैं।
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गांव के करीब-करीब हर घर में पानी घुस गया और लोगों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया। जिससे इन गांवों के लोग घरों में कैद होकर रह गए। नाले का पानी गांव में जमा हो जाने व सर्विस लेन के बह जाने से लोग करीब पांच-छह किलोमीटर घूमकर मुख्य मार्ग तक पहुंचने को मजबूर हैं।
कार्यदायी संस्था की लापरवाही से बनी स्थिति
जिन गांवों के लोगों का संपर्क अपने गांव के पास मुख्य मार्ग से टूटा है वे इसके लिए हाईवे निर्माण में जुटी कार्यदायी संस्था को दोषी ठहराते हैं। कहते हैं कि यदि पुल जल्दी बनवा कर सर्विस लेन हटा दी गई होती तो जलभराव की स्थिति न आती। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों ओर नाले में सर्विस लेन बनाने से पहले ह्यूम पाइप डाल दी गई होती तो सड़क भी ऊंची होती और पानी भी नीचे से बह जाता। इससे लोगों को दुश्वारियों का सामना नहीं करना पड़ता।
प्रशासन ने नहीं ली सुधि
मोहबतपुर के प्रधान श्रीप्रकाश तिवारी का कहना है कि जलभराव से रास्ता अवरुद्ध होने और घरों में पानी घुसने की जानकारी प्रशासन को दी गई। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
बीमारी फैलने की आशंका
डोमाडीह के कई घरों व उसके आसपास जलभराव की स्थिति है। इसी गांव की भगत पांडेय कहते हैं कि घरों के भीतर घुसे पानी के अभी तक नहीं सूखने से एक ओर मकानों के गिरने का तो दूसरी ओर जलभराव व गंदगी से बीमारी फैलने की आशंका है।