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Amethi News: पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है पितृपक्ष
Tue, 09 Sep 2025 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 09 Sep 2025 12:49 AM IST
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अमेठी के मंडवा डेहरा में पिंडदान करते लोग।-संवाद
अमेठी। पितृपक्ष में विभिन्न गांवों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए श्राद्ध और तर्पण किया। इस दौरान लोगों ने सूरज को साक्षी मानकर तिल और जल अर्पित किया। साथ ही पिंडदान कर पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृपक्ष का हर दिन विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु गंगा तट पर या अपने घरों में जल अर्पित कर तर्पण करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किया गया श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण पितरों की आत्मा को शांति दिलाने के साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि लाता है। नवमी तिथि की हानि के चलते पितृपक्ष इस बार केवल 15 दिनों का रहेगा। यह 21 सितंबर तक चलेगा।
इन दिनों में प्रतिदिन पिंडदान, तर्पण और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। कई स्थानों पर ब्राह्मण भोज का भी आयोजन होगा। आचार्य त्रिवेणी प्रसाद ने बताया कि 21 सितंबर को अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा, जिसमें लोग विधिविधान से पितरों को विदाई देंगे। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह अपनी परंपराओं को जीवित रखने और पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम भी है।
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पिंडदान करने वाले रामसुफल ने कहा कि हम हर साल पितृपक्ष में यह अनुष्ठान करते हैं। इससे हमें संतोष मिलता है कि पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देंगे। शिवकुमार ने बताया कि पितरों की स्मृति में तर्पण करना जीवन का कर्तव्य है। यह परंपरा संस्कारों से जोड़ती है। वहीं राम बहादुर ने कहा कि पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करने का अवसर देता है। यही कारण है कि पूरा परिवार मिलकर इस अनुष्ठान में सम्मिलित होता है।
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आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृपक्ष का हर दिन विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु गंगा तट पर या अपने घरों में जल अर्पित कर तर्पण करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किया गया श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण पितरों की आत्मा को शांति दिलाने के साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि लाता है। नवमी तिथि की हानि के चलते पितृपक्ष इस बार केवल 15 दिनों का रहेगा। यह 21 सितंबर तक चलेगा।
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इन दिनों में प्रतिदिन पिंडदान, तर्पण और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। कई स्थानों पर ब्राह्मण भोज का भी आयोजन होगा। आचार्य त्रिवेणी प्रसाद ने बताया कि 21 सितंबर को अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा, जिसमें लोग विधिविधान से पितरों को विदाई देंगे। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह अपनी परंपराओं को जीवित रखने और पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम भी है।
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पिंडदान करने वाले रामसुफल ने कहा कि हम हर साल पितृपक्ष में यह अनुष्ठान करते हैं। इससे हमें संतोष मिलता है कि पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देंगे। शिवकुमार ने बताया कि पितरों की स्मृति में तर्पण करना जीवन का कर्तव्य है। यह परंपरा संस्कारों से जोड़ती है। वहीं राम बहादुर ने कहा कि पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करने का अवसर देता है। यही कारण है कि पूरा परिवार मिलकर इस अनुष्ठान में सम्मिलित होता है।