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अग्निशमन केंद्र पर न गाड़ी न ही चालक
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अमेठी। जिले का अग्निशमन विभाग संसाधनों के अभाव का दंश झेल रहा है। जिले के सात अग्निशमन केंद्रों पर चालकों के साथ स्टाफ की भारी कमी है। मौजूदा समय में किसी भी अग्निशमन केंद्र पर एफएसओ नहीं है। कहीं एफएसएसओ तो कहीं दीवान के भरोसे अग्निशमन केंद्र संचालित हो रहे हैं। जिले के एक अग्निशमन केंद्र पर गाड़ी (फायर टेंडर) एवं चालक नहीं है।
चिलचिलाती धूप और गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाएं बढ़ जा रही हैं। इन दिनों आए दिन शॉर्ट सर्किट एवं अन्य कारणों के चलते आगजनी की बड़ी घटनाएं शुरू हो गई हैं। आगजनी की घटनाओं को काबू करने वाला जिले का अग्निशमन विभाग संसाधनों एवं कर्मचारियों के अभाव का दंश झेल रहा है। जिले की करीब 25 लाख आबादी को आग से होने वाली घटनाओं से सुरक्षित करने के लिए कुल सात अग्निशमन केंद्र संचालित हैं।
अमेठी अग्निशमन केंद्र पर एक बड़ा और एक छोटा (फायर टेंडर) वाहन है। उक्त अग्निशमन केंद्र पर तीन चालक, एक दीवान और 18 आरक्षी तैनात हैं। यहां तैनात रहे एफएसओ का प्रमोशन सीएफओ के पद पर हो गया है। जिसके चलते यहां एफएसओ का पद खाली हो गया है। वहीं मुसाफिरखाना में एक बड़ा और एक छोटा (फायर टेंडर) वाहन है। यहां 16 आरक्षी पदों के सापेक्ष मात्र छह आरक्षी, दो दीवान और एक चालक तैनात है।
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यहां भी एफएसओ नहीं हैं। गौरीगंज फायर स्टेशन पर एक बड़ा (फायर टेंडर) वाहन, 16 पदों के सापेक्ष पांच आरक्षी, दो दीवान और एक चालक तैनात हैं। जगदीशपुर फायर स्टेशन पर एक बड़ा (फायर टेंडर) वाहन, आरक्षी के 16 पदों के सापेक्ष पांच आरक्षी, दो दीवान और एक चालक तैनात हैं। यहां पर एक एफएसएसओ तैनात है।
जायस फायर स्टेशन पर एक छोटा (फायर टेंडर) वाहन, 16 पदों के सापेक्ष पांच आरक्षी दो दीवान और एक चालक तैनात है। शुकुल बाजार फायर स्टेशन पर एक भी फायर टेंडर नहीं है। यहां 16 पदों के सापेक्ष चार आरक्षी व दो दीवान तैनात हैं। चालक एक भी नहीं है। मोहनगंज फायर स्टेशन पर एक छोटा (फायर टेंडर) वाहन, 16 पदों के सापेक्ष पांच आरक्षी, दो दीवान, एक चालक और एक एफएसएसओ तैनात है।
इस वजह से भी होती परेशानी
अग्निशमन केंद्रों पर कहीं बड़े फायर टेंडर तो कहीं छोटे फायर टेंडर हैं। बड़े फायर टेंडर की क्षमता 2200 लीटर से 2500 लीटर की है वहीं छोटे फायर टेंडर की क्षमता मात्र 400 लीटर है। छोटे फायर टेंडर में पानी की क्षमता कम होने तथा अग्निकांड के स्थान पर पानी का अभाव होने के चलते काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग के पास चालक का अभाव
24 घंटे सेवा में तत्पर रहने वाले विभाग के पास चालक का अभाव है। एक फायर टेंडर पर दो चालक के पद स्वीकृत हैं। चालक की कमी होने के चलते 24 घंटे सेवा देने में चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फायर स्टेशन पर नहीं हैं एफएसओ
जिले में कुल सात फायर स्टेशन हैं। अमेठी फायर स्टेशन पर एफएसओ सुरेंद्र चौबे तैनात थे। उनका प्रमोशन सीएफओ के पद पर हो गया है। इसके अलावा किसी भी फायर स्टेशन पर एफएसओ नहीं थे। मौजूदा समय में जिला एफएसओ विहीन हो गया है।
गौरीगंज फायर स्टेशन पर नहीं आवास
गौरीगंज फायर स्टेशन पर अधिकारियों कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अधिकारियों कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाहर आवास होने के चलते हर समय ड्यूटी करने में भी परेशानी आ रही है।
नहीं हो पाती सामान की मरम्मत
आगजनी की घटनाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अग्निशमन विभाग के पास एडवांस में कोई बजट नहीं होता है। स्टेशन परिसर में पंप आदि खराब होने पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। संबंधित फायर स्टेशन द्वारा स्टीमेट बनाकर भेजे जाने के बाद ही सामान की मरम्मत हो पाती है। इस बीच अधिकारियों एवं कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ती है।
मुश्किलों में निभा रहे दायित्व
फायर कर्मियों के अनुसार घटना की सूचना जैसे ही मिलती है कम समय में उक्त स्थान तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है। ज्यादातर रास्ता नहीं होने के चलते फायर टेंडर घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाते। इसके साथ ही घटनास्थल पर मौजूद लोग सहयोग न कर कभी-कभी विवाद भी करने लगते हैं। वह रास्ता व पानी आदि की समस्याओं को नहीं समझना चाहते। लोगों को यह समझना चाहिए कि हम लोग उनकी सुरक्षा और सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
यह हो तो बने बात
गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाओं के मद्देनजर फायर टेंडरों की ड्यूटी बाहर नहीं लगाई जानी चाहिए। फायर स्टेशन पर फायर टेंडरों को हमेशा अलर्ट मोड में रखा जाना चाहिए। जिससे घटना की सूचना मिलते ही मौके पर फायर टेंडर समय से पहुंच सकते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
अमेठी का प्रभार देख रहे सुल्तानपुर के सीएफओ संजय कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में संसाधनों व कर्मचारियों की कमी है। इस के संबंध में लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही चालकों एवं कर्मचारियों के तैनाती की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बाजार शुकुल में छोटा फायर टेंडर है लेकिन चालक की कमी है।
बरतें यह सावधानियां
अग्निशमन विभाग के राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सावधानी बरतकर आग की घटना पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खेत में गेहूं की कटाई करते समय बीड़ी व सिगरेट का प्रयोग कतई न करें। घरों में कूड़ा एकत्र न होने दें। रात को सोते समय रसोई गैस सिलेंडर के रेगुलेटर को बंद जरूर करें। माचिस को छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें। होटलों व बड़े भवनों में वायरिंग को समय-समय पर दुरुस्त कराते रहें। जिन संस्थानों पर अग्निशमन यंत्र न हो, वे उसे जरूर लगवा लें।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
फोटो संख्या-2/3/4/5
अधिवक्त राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि फायर स्टेशन पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। जिससे आगजनी की घटना होने पर समय से वाहन पहुंचकर नियंत्रित कर सकें। जन एवं आर्थिक हानि न हो पाए। अधिवक्ता जगदंबा प्रसाद शुक्ला ने कहा कि फायर स्टेशन को हाइटेक सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस पर स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी ध्यान देने की जरूरत है। किसान नेता हरीश सिंह चुन्नू ने कहा कि आगजनी में सबसे अधिक किसानों की संपत्तियों का नुकसान होता है। जिससे वह उबर भी नहीं पाते। ऐसे में ब्लॉक स्तर पर भी आगजनी की दुर्घटनाओं को रोकने के संबंध में व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराई जानी चाहिए। सरकार को किसानों की क्षति के आकलन के हिसाब से मुआवजा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। सुरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि शहरों के अनुसार ग्रामीण स्तर पर भी आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थाएं होनी चाहिए। पानी के अभाव को देखते हुए जगह-जगह पानी पॉइंट बनाए जाने चाहिए। जिससे दमकल कर्मी वहां पहुंचकर पानी ले सकें और आगजनी की घटनाओं पर काबू कर सकें।
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चिलचिलाती धूप और गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाएं बढ़ जा रही हैं। इन दिनों आए दिन शॉर्ट सर्किट एवं अन्य कारणों के चलते आगजनी की बड़ी घटनाएं शुरू हो गई हैं। आगजनी की घटनाओं को काबू करने वाला जिले का अग्निशमन विभाग संसाधनों एवं कर्मचारियों के अभाव का दंश झेल रहा है। जिले की करीब 25 लाख आबादी को आग से होने वाली घटनाओं से सुरक्षित करने के लिए कुल सात अग्निशमन केंद्र संचालित हैं।
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अमेठी अग्निशमन केंद्र पर एक बड़ा और एक छोटा (फायर टेंडर) वाहन है। उक्त अग्निशमन केंद्र पर तीन चालक, एक दीवान और 18 आरक्षी तैनात हैं। यहां तैनात रहे एफएसओ का प्रमोशन सीएफओ के पद पर हो गया है। जिसके चलते यहां एफएसओ का पद खाली हो गया है। वहीं मुसाफिरखाना में एक बड़ा और एक छोटा (फायर टेंडर) वाहन है। यहां 16 आरक्षी पदों के सापेक्ष मात्र छह आरक्षी, दो दीवान और एक चालक तैनात है।
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यहां भी एफएसओ नहीं हैं। गौरीगंज फायर स्टेशन पर एक बड़ा (फायर टेंडर) वाहन, 16 पदों के सापेक्ष पांच आरक्षी, दो दीवान और एक चालक तैनात हैं। जगदीशपुर फायर स्टेशन पर एक बड़ा (फायर टेंडर) वाहन, आरक्षी के 16 पदों के सापेक्ष पांच आरक्षी, दो दीवान और एक चालक तैनात हैं। यहां पर एक एफएसएसओ तैनात है।
जायस फायर स्टेशन पर एक छोटा (फायर टेंडर) वाहन, 16 पदों के सापेक्ष पांच आरक्षी दो दीवान और एक चालक तैनात है। शुकुल बाजार फायर स्टेशन पर एक भी फायर टेंडर नहीं है। यहां 16 पदों के सापेक्ष चार आरक्षी व दो दीवान तैनात हैं। चालक एक भी नहीं है। मोहनगंज फायर स्टेशन पर एक छोटा (फायर टेंडर) वाहन, 16 पदों के सापेक्ष पांच आरक्षी, दो दीवान, एक चालक और एक एफएसएसओ तैनात है।
इस वजह से भी होती परेशानी
अग्निशमन केंद्रों पर कहीं बड़े फायर टेंडर तो कहीं छोटे फायर टेंडर हैं। बड़े फायर टेंडर की क्षमता 2200 लीटर से 2500 लीटर की है वहीं छोटे फायर टेंडर की क्षमता मात्र 400 लीटर है। छोटे फायर टेंडर में पानी की क्षमता कम होने तथा अग्निकांड के स्थान पर पानी का अभाव होने के चलते काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग के पास चालक का अभाव
24 घंटे सेवा में तत्पर रहने वाले विभाग के पास चालक का अभाव है। एक फायर टेंडर पर दो चालक के पद स्वीकृत हैं। चालक की कमी होने के चलते 24 घंटे सेवा देने में चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फायर स्टेशन पर नहीं हैं एफएसओ
जिले में कुल सात फायर स्टेशन हैं। अमेठी फायर स्टेशन पर एफएसओ सुरेंद्र चौबे तैनात थे। उनका प्रमोशन सीएफओ के पद पर हो गया है। इसके अलावा किसी भी फायर स्टेशन पर एफएसओ नहीं थे। मौजूदा समय में जिला एफएसओ विहीन हो गया है।
गौरीगंज फायर स्टेशन पर नहीं आवास
गौरीगंज फायर स्टेशन पर अधिकारियों कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अधिकारियों कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाहर आवास होने के चलते हर समय ड्यूटी करने में भी परेशानी आ रही है।
नहीं हो पाती सामान की मरम्मत
आगजनी की घटनाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अग्निशमन विभाग के पास एडवांस में कोई बजट नहीं होता है। स्टेशन परिसर में पंप आदि खराब होने पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। संबंधित फायर स्टेशन द्वारा स्टीमेट बनाकर भेजे जाने के बाद ही सामान की मरम्मत हो पाती है। इस बीच अधिकारियों एवं कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ती है।
मुश्किलों में निभा रहे दायित्व
फायर कर्मियों के अनुसार घटना की सूचना जैसे ही मिलती है कम समय में उक्त स्थान तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है। ज्यादातर रास्ता नहीं होने के चलते फायर टेंडर घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाते। इसके साथ ही घटनास्थल पर मौजूद लोग सहयोग न कर कभी-कभी विवाद भी करने लगते हैं। वह रास्ता व पानी आदि की समस्याओं को नहीं समझना चाहते। लोगों को यह समझना चाहिए कि हम लोग उनकी सुरक्षा और सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
यह हो तो बने बात
गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाओं के मद्देनजर फायर टेंडरों की ड्यूटी बाहर नहीं लगाई जानी चाहिए। फायर स्टेशन पर फायर टेंडरों को हमेशा अलर्ट मोड में रखा जाना चाहिए। जिससे घटना की सूचना मिलते ही मौके पर फायर टेंडर समय से पहुंच सकते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
अमेठी का प्रभार देख रहे सुल्तानपुर के सीएफओ संजय कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में संसाधनों व कर्मचारियों की कमी है। इस के संबंध में लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही चालकों एवं कर्मचारियों के तैनाती की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बाजार शुकुल में छोटा फायर टेंडर है लेकिन चालक की कमी है।
बरतें यह सावधानियां
अग्निशमन विभाग के राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सावधानी बरतकर आग की घटना पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खेत में गेहूं की कटाई करते समय बीड़ी व सिगरेट का प्रयोग कतई न करें। घरों में कूड़ा एकत्र न होने दें। रात को सोते समय रसोई गैस सिलेंडर के रेगुलेटर को बंद जरूर करें। माचिस को छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें। होटलों व बड़े भवनों में वायरिंग को समय-समय पर दुरुस्त कराते रहें। जिन संस्थानों पर अग्निशमन यंत्र न हो, वे उसे जरूर लगवा लें।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
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अधिवक्त राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि फायर स्टेशन पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। जिससे आगजनी की घटना होने पर समय से वाहन पहुंचकर नियंत्रित कर सकें। जन एवं आर्थिक हानि न हो पाए। अधिवक्ता जगदंबा प्रसाद शुक्ला ने कहा कि फायर स्टेशन को हाइटेक सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस पर स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी ध्यान देने की जरूरत है। किसान नेता हरीश सिंह चुन्नू ने कहा कि आगजनी में सबसे अधिक किसानों की संपत्तियों का नुकसान होता है। जिससे वह उबर भी नहीं पाते। ऐसे में ब्लॉक स्तर पर भी आगजनी की दुर्घटनाओं को रोकने के संबंध में व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराई जानी चाहिए। सरकार को किसानों की क्षति के आकलन के हिसाब से मुआवजा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। सुरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि शहरों के अनुसार ग्रामीण स्तर पर भी आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थाएं होनी चाहिए। पानी के अभाव को देखते हुए जगह-जगह पानी पॉइंट बनाए जाने चाहिए। जिससे दमकल कर्मी वहां पहुंचकर पानी ले सकें और आगजनी की घटनाओं पर काबू कर सकें।